चार मीनार सिर्फ हैदराबाद शहर की पहचान नहीं है, बल्कि यह पूरे तेलंगाना की पहचान है। यह हैदराबाद की संस्कृति और इतिहास का हिस्सा है।
चार मीनार को साल 1591 में सुल्तान मुहम्मद कुली कुतब शाह ने बनवाया। यह मस्जिद यहां मुसी नदी के तट पर बनी है।
चार मीनार का निर्माण कुतब शाही राजवंश के पांचवे शासक सुल्तान मुहम्मद कुली कुतब शाह ने 1591 में तब करवाया, जब उसने अपनी राजधानी गोलकुंडा से ने नए बसाए गए हैदराबाद शहर में शिफ्ट की।
चार मीनार को बाद में दौर में मुगलों ने अपने कब्जे में लिया और यह मुगल सल्तनत के लिए प्रमुख बिल्डिंग बन गई। चार मीनार की चौकी में 80 हजार मुगल सैनिक रहते थे और इस बिल्डिंग को ताजमहल की सिब्लिंग के तौर पर देखा जाता था।
कुतब शाही राजवंश के चौथे सुल्तान इब्राहिम कुतब शाह (1550-80) को गोलकुंडा के मिट्टी की ईंट के किले को पत्थर और चूने में बदलने का श्रेय दिया जाता है।
गोलकुंडा का किला भारत में सबसे अभेद्य किलों में से एक था और कुतब शाहियों द्वारा शासित इस छोटे से राज्य की समृद्धि के किस्से दूर-दूर तक फैले हुए थे।
चार मीनार को बनाने के लिए सुल्तान मुहम्मद कुली कुतब शाह ने इब्राहिम मस्जिद से प्रेरणा ली थी। इब्राहिम मस्जिद की बनावट चार मीनार की चारों मीनारों से मिलती-जुलती है।
इब्राहिम मस्जिद उसी गोलकुंडा किले में है, जो पांच पीढ़ी तक कुतब शाही वंश की राजधानी रही। राजधानी को गोलकुंडा किले से हैदराबाद शिफ्ट करने के साथ ही सुल्तान मुहम्मद कुली कुतब शाह ने इब्राहिम मस्जिद की तर्ज पर चार मीनार मस्जिद बनवाई।
इब्राहिम कुतब शाह ने (1550-80) में इस मस्जिद का निर्माण करावाया था। अगर आप इब्राहीम मस्जिद देखने जा रहे हैं तो यहां आपको 25 रुपये का टिकट लेना होगा, कैमरे का चार्ज अलग से लिया जाता है।
इब्राहिम मस्जिद कुतब शाही राजवंश की राजधानी गोलकुंडा किले के ऊपरी हिस्से में मौजूद है। यह मस्जिद बंद है और फिलहाल भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के अधीन है। इसे बाहर से ही देखा जा सकता है।