कौन है डॉ. राम्या मंजूनाथ, जो संभालेंगी नासा का मिलियन डॉलर का मिशन, यहां देखें एजुकेशन क्वालिफिकेशन

नासा दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित स्पेस एजेंसी में से एक है। स्पेस की पढ़ाई करने वाले हर युवा का सपना एक बार नासा में काम करने का होता है। अंतरिक्ष को समझने की जिज्ञासा रखने वाला भारतीय मूल की डॉ. राम्या मंजूनाथ को नासा ने अपने 20 मिलियन डॉलर प्रोजेक्ट का हिस्सा जो बनाया है। सीमित संसाधनों के बावजूद अपने सपने को पूरा कर दिखाने वाली राम्या आज देश-विदेश के हजारों छात्रों के लिए किसी मिसाल से कम नहीं है। आइए आज उनकी प्रेरणादायक कहानी के बारे में विस्तार से जानें -

Authored by: Varsha KushwahaUpdated Nov 2 2026, 13:11 IST
साधारण गलियों से नासा के शिखर तक का सफरImage Credit : AI/Newsroom Verified01 / 07

साधारण गलियों से नासा के शिखर तक का सफर

​कर्नाटक की शांत गलियों में पली-बढ़ी एक नन्ही बच्ची राम्या मंजूनाथ जब भी रात के खुले आसमान को निहारती, तो तारों की अनगिनत चमक उसके मन में जिज्ञासा का एक अथाह समंदर खड़ा कर देती थी। अंधेरे के उस पार क्या है और ये तारे कैसे जन्म लेते हैं—यही असीम कौतुक आगे चलकर उसके जीवन का सबसे बड़ा ध्येय बन गया। एक साधारण मध्यमवर्गीय परिवेश से ताल्लुक रखने वाली उसी प्रतिभावान बेटी को आज नासा के करीब 20 मिलियन डॉलर (लगभग 180 करोड़ रुपये से अधिक) के अत्यंत प्रतिष्ठित अंतरिक्ष मिशन 'पफिन्स' (PUFFINS) का मुख्य वैज्ञानिक (Principal Investigator) चुना गया है। यह मिशन अंतरिक्ष में तैरती धूल के उन सूक्ष्म कणों के रहस्यों को खंगालेगा, जिनसे संपूर्ण ब्रह्मांड की रचना हुई है।​

क्या है नासा का 'पफिन्स' मिशन और इसका उद्देश्य?​Image Credit : Canva02 / 07

क्या है नासा का 'पफिन्स' मिशन और इसका उद्देश्य?​

​डॉ. राम्या मंजूनाथ के नेतृत्व में संचालित होने वाले इस महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियान का नाम 'पफिन्स' है। इस महत्वाकांक्षी मिशन के तहत लगभग 10 इंच की एक विशेष दूरबीन से लैस एक छोटे उपग्रह को पृथ्वी की निचली कक्षा में स्थापित किया जाएगा। यह उपग्रह अंतरिक्ष में स्थित लगभग 70 दूरस्थ तारों से आने वाले पराबैंगनी प्रकाश (Ultraviolet Light) का बारीकी से अध्ययन करेगा। इस अध्ययन का मुख्य उद्देश्य उन शुरुआती ब्रह्मांडीय धूल के कणों और गैसों की पहेली को सुलझाना है, जो तारों और ग्रहों के निर्माण की मूल इकाई माने जाते हैं। इस प्रोजेक्ट के जरिए नासा अंतरिक्ष विज्ञान के कई अनछुए पहलुओं को सामने लाने की योजना बना रहा है।​

बचपन की प्रेरणा और कल्पना चावला का प्रभावImage Credit : Canva03 / 07

बचपन की प्रेरणा और कल्पना चावला का प्रभाव

​बेंगलुरु (कर्नाटक) के देवनहल्ली से ताल्लुक रखने वाली डॉ. राम्या मंजूनाथ आंचे की शुरुआती और संपूर्ण स्कूली शिक्षा भारत में ही पूरी हुई है। उनके वैज्ञानिक बनने के सफर में भारत की पहली महिला अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला की जीवन गाथा ने बहुत बड़ा योगदान दिया। बचपन में ही कल्पना चावला के अंतरिक्ष सफर की कहानियों ने नन्ही राम्या के कोमल मन में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति गहरा आकर्षण पैदा कर दिया था।​

शिक्षा और अकादमिक Image Credit : Canva04 / 07

शिक्षा और अकादमिक

​डॉ. राम्या ने वर्ष 2011 में उन्होंने विश्वेश्वरैया टेक्नोलॉजिकल यूनिवर्सिटी (VTU) से इलेक्ट्रिकल एवं इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में अपनी बीई (BE) की डिग्री पूरी की। खगोल भौतिकी के क्षेत्र में गहरी रुचि के चलते उन्होंने साल 2012 में प्रतिष्ठित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ एस्ट्रोफिजिक्स (IIA) का रुख किया। इसके बाद आईआईए से जुड़कर उन्होंने खगोलीय उपकरणों और प्रकाश के गुणों का गहराई से अध्ययन किया और 2015 से 2019 के दौरान यहीं से अपनी पीएचडी पूरी की। उनका शोध मुख्य रूप से दूरस्थ तारों के प्रकाश का विश्लेषण करने वाली वैज्ञानिक तकनीकों पर आधारित था।​

चीन में बनाई विशेष पहचान​Image Credit : Canva05 / 07

चीन में बनाई विशेष पहचान​

​डॉ. राम्या ने अपनी वैज्ञानिक समझ और शोध के दायरे को केवल देश तक सीमित नहीं रखा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी अपनी विशेष पहचान बनाई। उन्हें अंतरराष्ट्रीय पहचान तब मिली जब उन्होंने चीन की 'National Astronomical Observatories' में रिसर्च इंजीनियर के रूप में कार्य किया। वहां उन्होंने 'Advanced Space Solar Observatory' के एक उपकरण के लिए प्रकाश के ध्रुवण (Polarization) का एक बेहतरीन मॉडल तैयार किया।​

अमेरिका का सफरImage Credit : Canva06 / 07

अमेरिका का सफर

​भारत में आईयूसीएए (IUCAA) के साथ शोध कार्य आगे बढ़ाने के बाद, अक्तूबर 2021 में वह अमेरिका की प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी ऑफ एरिजोना की 'स्टुअर्ड ऑब्जर्वेटरी' से जुड़ीं। पहले पोस्टडॉक्टोरल रिसर्चर और बाद में असिस्टेंट रिसर्च प्रोफेसर के रूप में उन्होंने अंतरिक्ष दूरबीनों और अत्याधुनिक वैज्ञानिक उपकरणों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया।​

मूल्यवान सीख और युवाओं के लिए प्रेरणाImage Credit : Canva07 / 07

मूल्यवान सीख और युवाओं के लिए प्रेरणा

डॉ. राम्या मंजूनाथ आंचे की सफलता की यह कहानी आज के युवाओं को सीख देती है कि बड़े सपनों को पंख देने के लिए संसाधनों का बड़ा होना जरूरी नहीं है, बल्कि इरादों का मजबूत होना आवश्यक है। नई चीजें सीखने और हर पल कुछ नया खोजने का साहस ही आगे चलकर इंसान को विशिष्ट पहचान दिलाता है। मेहनत और समर्पण से सींचे गए सपने एक दिन अवश्य सच होते हैं, बशर्ते आप अपनी सोच को किसी दायरे में बांधकर न रखें।

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