इतिहास में गुरुग्राम के नीचे बहने वाली नदी जो अब विलुप्त हो चुकी है उसका नाम है साहिबी नदी (Sahibi River)।
बता दें कि यह नदी राजस्थान के सीकर जिले की पहाड़ियों से निकलती थी। वहां से बहते हुए यह हरियाणा के रेवाड़ी और फिर गुरुग्राम के इलाकों में प्रवेश करती थी। प्राचीन समय में इसे एक पवित्र और महत्वपूर्ण जल स्रोत माना जाता था।
एक समय था जब साहिबी नदी गुरुग्राम और उसके आसपास के दर्जनों गांवों के लिए किसी जीवनदायिनी से कम नहीं थी। इस नदी के पानी से न केवल फसलों की सिंचाई होती थी, बल्कि यह पूरे इलाके के ग्राउंडवाटर लेवल को भी बनाए रखती थी। नदी के किनारे कई समृद्ध बस्तियां बसी हुई थी।
साहिबी नदी का अचानक गायब होना कोई जादुई घटना नहीं है, बल्कि इसके पीछे इंसानी दखल और प्रकृति रही है। जी हां, समय के साथ नदी के जलग्रहण क्षेत्रों में कम बारिश होने लगी, जिसके कारण नदी का बहाव क्षेत्र में अंधाधुंध निर्माण कार्य और अतिक्रमण होने के कारण पानी का रास्ता धीरे-धीरे बंद हो गया।
गुरुग्राम से आगे बढ़कर यह नदी दिल्ली के करीब नजफगढ़ झील में जाकर मिलती थी। आज की स्थिति यह है कि साहिबी नदी का जो हिस्सा कभी साफ पानी से लबालब रहता था, वह अब एक बड़े नाले (नजफगढ़ ड्रेन) के रूप में बदल चुका है। नदी का अस्तित्व अब केवल सरकारी कागजों और नक्शों तक ही सीमित रह गया है।
इस नदी के सूखने और गायब होने का सबसे बुरा असर गुरुग्राम के पर्यावरण पर पड़ा है। नदी के जाने से इलाके का वाटर लेवल बेहद नीचे चला गया है। इसके अलावा, नदी के आसपास का प्राकृतिक ईकोसिस्टम भी बूरी तरह से प्रभावित हुआ है।
पर्यावरण विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार और प्रशासन मिलकर नदी के पुराने रास्तों से अतिक्रमण हटाएं और बड़े स्तर पर जल संरक्षण अभियान चलाएं, तो इसके स्वरूप को कुछ हद तक वापस पाया जा सकता है।