भारत को नदियों का देश कहा जाता है, और इसके पीछे मजबूत कारण भी है। पूरे देश में सैकड़ों नदियों का बहाव है। छोटी और बड़ी मिलाकर इनकी संख्या 400 से ज्यादा है, जिनमें करीब 200 प्रमुख नदियां विभिन्न क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं। ये नदियां केवल जल का स्रोत ही नहीं हैं, बल्कि करोड़ों लोगों के जीवन, खेती और रोजगार का आधार भी हैं। (Image - chatgpt)
देश में मौजूद तमाम नदियों के बीच एक ऐसी नदी भी है, जिसे सबसे अधिक ऑक्सीजन युक्त नदी माना जाता है। यही कारण है कि इसे भारत की जीवनरेखा भी कहा जाता है, क्योंकि यह कई राज्यों को पानी उपलब्ध कराने के साथ-साथ पारिस्थितिकी संतुलन बनाए रखती है।
यह नदी है गंगा। आम धारणा के अनुसार, गंगा के जल में घुलित ऑक्सीजन (Dissolved Oxygen) का स्तर अन्य नदियों की तुलना में अधिक पाया जाता है। इसी विशेषता के कारण इसका पानी लंबे समय तक अपेक्षाकृत ताजा बना रहता है और इसमें जीव-जंतुओं के लिए बेहतर परिस्थितियां बनी रहती हैं।
गंगा के पानी में अधिक ऑक्सीजन होने का एक प्रमुख कारण इसकी प्राकृतिक स्वशोधन क्षमता मानी जाती है। सरल शब्दों में कहें तो, यह नदी अपने पानी को काफी हद तक खुद साफ रखने की क्षमता रखती है। कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि गंगा का जल जैविक रूप से सक्रिय रहता है, जिससे इसमें ऑक्सीजन का स्तर संतुलित बना रहता है।
वैज्ञानिक शोध भी पाया गया है कि गंगा के कई हिस्सों में घुलित ऑक्सीजन का स्तर लगभग 5.8 से 8.9 mg/L के बीच पाया गया है, जो जलीय जीवन के लिए अनुकूल माना जाता है।
सामान्यतः 5 mg/L से अधिक का स्तर सुरक्षित माना जाता है, ऐसे में गंगा कई स्थानों पर इस मानक से बेहतर प्रदर्शन करती है। हालांकि, यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि हर स्थान पर गंगा का जल समान गुणवत्ता का नहीं होता।
प्रदूषण और मानव गतिविधियों के कारण कई हिस्सों में इसकी स्थिति प्रभावित हुई है। गंगा नदी अपनी विशेष संरचना और स्वशोधन क्षमता के कारण अन्य नदियों से अलग पहचान रखती है। अधिक ऑक्सीजन स्तर इसकी सबसे बड़ी खासियतों में से एक है, जो इसे न केवल जीवनदायिनी बनाता है बल्कि पर्यावरण के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण बनाता है।