Anant Chaturdashi:गणपति विसर्जन से सीख सकते हैं जीवन के ये 7 बड़े सबक

अनंत चतुर्दशी के साथ ही गणपति विसर्जन की बेला करीब आ चुकी है। यह विसर्जन हमें जीवन के कई बड़े सबक भी सिखाता है। अगर हम विसर्जन से मिलने वाले सबको को हमेशा याद रखें तो पहले से बेहतर इंसान बन सकते हैं।

Authored by: Suneet SinghUpdated Sep 24 2026, 18:59 IST
​कुछ भी नहीं है स्थायी​Image Credit : IStock01 / 07

​कुछ भी नहीं है स्थायी​

गणपति विसर्जन का सबसे पहला और बड़ा सबक यह है कि इस दुनिया में कुछ भी स्थायी नहीं है। जिस मूर्ति को हम इतने प्रेम, आदर और भव्यता से लाते हैं, उसे एक दिन विसर्जित करना ही पड़ता है। इसी तरह जीवन में सुख या दुख, स्थितियां हमेशा बदलती रहती हैं।

​आसक्ति से मुक्ति​Image Credit : IStock02 / 07

​आसक्ति से मुक्ति​

दस दिनों तक गणेश जी की सेवा करने के बाद उनके विसर्जन का क्षण बेहद भावुक होता है। यह हमें सिखाती है कि किसी भी वस्तु, व्यक्ति या स्थिति से इतना मोह न रखें कि उसका अलगाव सहना असंभव हो जाए। जीवन में प्रेम पूरा रखें, लेकिन आसक्ति से मुक्त रहना सीखें।

​सकारात्मकता​Image Credit : IStock03 / 07

​सकारात्मकता​

विसर्जन अंत नहीं, बल्कि एक नए आगमन की उम्मीद है। जीवन में जब भी कोई दौर समाप्त होता है या असफलता मिलती है, तो यह सबक याद रखें कि हर अंत के बाद एक नई और बेहतर शुरुआत अवश्य होती है।

​अहंकार और सर्वस्व का समर्पण​Image Credit : IStock04 / 07

​अहंकार और सर्वस्व का समर्पण​

गणपति विसर्जन में जल में मूर्ति का लीन हो जाना प्रतीक है कि अंततः सब कुछ प्रकृति में ही समा जाना है। मिट्टी से बनी मूर्ति मिट्टी में और जल में विलीन हो जाती है। यह दृश्य मनुष्य को सिखाता है कि उसका रूप, पद, पैसा और अहंकार सब नश्वर हैं।

​प्रकृति से जुड़ाव​Image Credit : IStock05 / 07

​प्रकृति से जुड़ाव​

विसर्जन हमें सिखाता है कि मनुष्य का अस्तित्व प्रकृति के बिना संभव नहीं है। हमें अपने जीवन शैली और उत्सवों में प्रकृति के संतुलन का ध्यान रखना चाहिए और पर्यावरण को नुकसान पहुँचाने से बचना चाहिए।

​एकता और सामाजिक सद्भाव​Image Credit : IStock06 / 07

​एकता और सामाजिक सद्भाव​

विसर्जन यात्रा में अमीर-गरीब, छोटे-बड़े का भेद मिट जाता है। सभी लोग एक साथ ढोल-ताशों की थाप पर नाचते हैं और एक-दूसरे को गुलाल लगाते हैं। यह सबक देता है कि जीवन की सच्ची खुशी और उत्सव सामूहिक भाईचारे, एकता और समाज को साथ लेकर चलने में निहित है।

​'विघ्नहर्ता' बनने की सीख​Image Credit : IStock07 / 07

​'विघ्नहर्ता' बनने की सीख​

गणेश जी को विघ्नहर्ता कहा जाता है। विसर्जन के समय हम प्रार्थना करते हैं कि बप्पा जाते-जाते हमारे सारे दुख और कष्ट अपने साथ ले जाएं। इससे हमें सीख मिलती है कि हमें भी दूसरों के जीवन में खुशियां बांटनी चाहिए और दूसरों के रास्ते के विघ्न व रुकावटों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए।

End of Photo Gallery
Subscribe to our daily Newsletter!