डोनाल्ड ट्रंप ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को जल्द खोले जाने के संकेत दिए हैं। ये एक अहम समुद्री मार्ग है, जो कि बीते कई दिनों से प्रभावित हो रहा था। इसी समुद्री रास्ते से कच्चे तेल और ईंधन की आपूर्ति भारत समेत कई देशों में की जाती है। चलिए जानें स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत आने में जहाज को कितना समय लगता है?
गल्फ देशों से आने वाले तेल का बड़ा हिस्सा इसी (स्ट्रेट ऑफ होर्मुज) रास्ते से होकर गुजरता है। मौजूदा हालात में कई देशों के जहाज इस जलडमरूमध्य के पास फंसे हुए हैं, क्योंकि ईरान ने सुरक्षा कारणों से यहां आवाजाही सीमित कर दी है। इसका असर भारतीय जहाजों पर भी पड़ा है, जो इस मार्ग से होकर भारत आते हैं।
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज एक पतला यानी कम चौड़ा, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग है, जिसकी चौड़ाई लगभग 21 से 33 किलोमीटर के बीच है। यह फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी से जोड़ता है और वैश्विक तेल परिवहन का एक बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से गुजरता है।
अगर दूरी की बात करें, तो इस जलडमरूमध्य से भारत के पश्चिमी तट, खासकर गुजरात के कांडला बंदरगाह तक की दूरी करीब 1000 से 1550 किलोमीटर है। इस दूरी को तय करने में जहाजों को आमतौर पर 37 घंटे से लेकर 53 घंटे तक का समय लग सकता है, जो उनकी गति और समुद्री परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
सामान्य दिनों में तेल टैंकर लगभग 24 से 31 किलोमीटर प्रति घंटे की औसत रफ्तार से चलते हैं। इस हिसाब से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से भारत पहुंचने में लगभग 2 से 3 दिन का समय लग जाता है।
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा इसी मार्ग के जरिए पूरा करता है, इसलिए यह समुद्री रास्ता देश के लिए बेहद रणनीतिक महत्व रखता है। हालात को देखते हुए भारतीय नौसेना ने अपने युद्धपोत तैनात किए हैं, जो तेल और गैस ले जाने वाले जहाजों को सुरक्षा प्रदान कर रहे हैं।
तनाव के बावजूद, कुछ भारतीय जहाज नौसेना की निगरानी में सुरक्षित भारत पहुंच चुके हैं, जबकि अभी भी कई जहाज इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं। यही कारण है कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से जुड़ी हर खबर का असर सीधे वैश्विक तेल कीमतों और अर्थव्यवस्था पर देखने को मिलता है।