पेट्रोल एक वाष्पशील (Evaporative) हाइड्रोकार्बन का एक मिश्रण है। जिसमें रासायनिक और भौतिक गुण अलग-अलग है। इसका निर्माण कच्चे तेल से किया जाता है। कच्चे तेल को रिफाइंड करते हुए पेट्रोल बनाया जाता है।
कच्चे तेल से पेट्रोल-डीजल आदि बनाने के लिए डिस्टिलेशन, क्रैकिंग, रीफॉर्मिंग और अल्काईलेशन जैसी विभिन्न प्रक्रियाओं का इस्तेमाल किया जाता है। अगर बात करें पेट्रोल की तो पेट्रोल का निर्माण मुख्य रूप से डिस्टिलेशन के दौरान होता है।
पेट्रोल बनाने के बाद इसकी गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए अल-अलग कंपाउंड्स के साथ इसे मिलाया जाता है। जिसके बाद वाहनों में इस्तेमाल किए जाने वाला पेट्रोल तैयार होता है।
पेट्रोल जमीन के नीचे दबे लाखों साल पुराने मृत समुद्री जीवों और पौधों के अवशेषों से बनता है। जानकारी के अनुसार, अत्यधिक गर्मी और दबाव के कारण ये जीवाश्म कच्चे तेल में बदल जाते हैं। जिससे बाद में पेट्रोल को अलग किया जाता है।
पेट्रोल कच्चे तेल से तैयार होने वाला ईंधन है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि पेट्रोल की कहानी नई नहीं है। यह करोड़ो सालों पुरानी है और महासागरों से जुड़ी है। महासागर के तली में मरे हुए जीव, पौधे की गाद रेत और मिट्टी की परतों के नीचे दब जाते हैं। ऑक्सीजन की कमी और अत्यधिक दबाव और ऊष्मा के कारण ये धीरे-धीरे पेट्रोलियम और गैस में बदल जाते है।
कच्चे तेल निर्माण में भूवैज्ञानिक परिस्थितियों के आधार पर 10 मिलियन से 300 मिलियन वर्षों का समय लगता है। इसी कच्चे तेल को रिफाइंड करते हुए पेट्रोल बनाया जाता है।
बता दें कि पेट्रोल को कुछ देशों में गैसोलीन के नाम से भी जाना जाता है। जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका (USA) और कनाडा। इन दोनों ही देशों में पेट्रोलियम को गैसोलीन कहते हैं।