आगरा के बोदला निवासी श्याम बघेल एक निजी क्लीनिक में कंपाउंडर का काम करते हैं। उनके परिवार में दो बेटे और एक बेटी हैं। तीनों बच्चों ने बचपन से ही अपने पिता को दिन-रात मेहनत करते और मरीजों की सेवा करते देखा है। पिता को काम करते देख बच्चों के मन में डॉक्टर बनने की इच्छा जागी और इस तरह से नीट परीक्षा की तैयारी का उनका सफर शुरू हुआ। श्याम बघेल के बच्चों ने बचपन में ही यह तय कर लिया था कि वे डॉक्टर बनकर न केवल मरीजों का इलाज करेंगे, बल्कि अपने पिता के संघर्ष को सही मायने में सम्मान देंगे।
श्याम बघेल के तीनों बच्चों की मेहनत और सफलता का यह सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। उनकी सबसे बड़ी बेटी गुंजन पाल (25 वर्ष) ने सबसे पहले वर्ष 2021 में नीट की परीक्षा पास कर परिवार में सफलता का खाता खोला। पिता के बाद बहन को मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने की तैयारी करता देख दूसरे बच्चे जतिन पाल (22 वर्ष) ने बहन के खोले रास्ते पर चलते हुए 2024 में आयोजित हुई नीट यूजी की परीक्षा में सफलता हासिल की। दोनों भाई-बहनों को देख सबसे छोटा बेटा सचिन पाल (20 वर्ष) भी पीछे नहीं रहा और उसने 2026 में नीट यूजी परीक्षा पास कर पूरे परिवार का नाम रोशन किया। एक के बाद एक श्याम बघेल के तीनों बच्चों ने नीट परीक्षा पास कर इतिहास रच दिया।
सबसे छोटे बेटे सचिन पाल ने नीट 2026 में ऑल इंडिया 16,000वीं रैंक हासिल कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है। पिता श्याम बताते हैं कि वह बचपन से ही डॉक्टर-डॉक्टर वाला खेल खेला करता था। पिता का भी हमेशा से यही सपना था कि उनके बच्चे अच्छे इंसान और काबिल डॉक्टर बनें। आज जब उनका यह सपना सच हो रहा है, तो उनकी खुशी का कोई ठिकाना नहीं है।
आजकल जहां प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने के लिए अधिकांश छात्र महंगे कोचिंग सेंटर का सहारा ले रहे हैं, वहां श्याम बघेल के छोटे बेटे सचिन ने सेल्फ स्टडी पर ज्यादा भरोसा किया। न्होंने अपनी तैयारी के लिए केवल कुछ ऑनलाइन क्लासों का सहारा लिया और बाकी समय खुद से पढ़ाई की। जब भी पढ़ाई में कोई उलझन होती या तनाव बढ़ता, तो वह अपने पिता से मार्गदर्शन लिया करते थे। पिता का अनुभव और बच्चे की निरंतर मेहनत आखिरकार अब रंग लाई।
एक साधारण कंपाउंडर के घर से तीन-तीन बच्चों का नीट क्लियर करना को आम बात नहीं है। पूरे क्षेत्र के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है। सचिन के नीट परीक्षा पास करने के बाद बोदला स्थित उनके घर पर आसपास के लोगों, रिश्तेदारों और शुभचिंतकों का बधाई देने के लिए तांता लगा हुआ है। पिता श्याम बघेल कहते हैं कि एक पिता के लिए इससे बड़े गर्व की और क्या बात हो सकती है कि उसके बच्चे अपनी मेहनत और ईमानदारी के दम पर अपने सपनों को साकार कर रहे हैं।
तीनों भाई-बहन अब एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी कर समाज के जरूरतमंद लोगों की सेवा करना चाहते हैं। उनका लक्ष्य एक संवेदनशील और कुशल डॉक्टर बनकर उन लोगों की मदद करना है, जो महंगे इलाज का खर्च नहीं उठा पाते। आगरा के इस परिवार की यह कहानी उन लाखों युवाओं के लिए उम्मीद की एक नई किरण है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखने की हिम्मत रखते हैं।
इन तीनों बच्चों की कड़ी मेहनत और नीट परीक्षा में प्राप्त सफलता ने यह साबित कर दिया है कि बड़े-बड़े मुकाम हासिल करने के लिए बहुत सारे की आवश्यकता नहीं होती। अगर आपके पास मजबूत इरादे, सही दिशा और निरंतर मेहनत करने का जज्बा है, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं है।