सीमा पर देश की रक्षा करने वाले सैनिक से लेकर भविष्य के सिविल सेवक तक ये कहानी है नीतीश कुमार सिंह की, जो कि भारतीय सेना के EME अधिकारी और NDA के पूर्व छात्र हैं। दक्षिण कश्मीर के शोपियां में 2017 में हुए एक आतंकवाद-विरोधी अभियान के दौरान गंभीर रूप से घायल हो गए थे। बावजूद इसके, बिहार के बेगूसराय के इस योद्धा ने UPSC CSE 2025 की परीक्षा में 305वीं AIR (ऑल इंडिया रैंक) हासिल की है, और अब वे LBSNAA, मसूरी में प्रशिक्षण ले रहे हैं।
बिहार के बेगूसराय जिले में शाम्हो थाना क्षेत्र के अंतर्गत बिजुलिया पश्चिम टोला से आने वाले नीतीश कुमार जज्बे से लबरेज रहते हैं, फिर चाहे बात पढ़ाई की हो या देश सेवा की, वे हमेशा अपना 100 प्रतिशत देते आए हैं।
यूपीएससी सिविल सेवा परीक्षा 2025 में नीतीश कुमार सिंह ने 305वीं अखिल भारतीय रैंक हासिल की। नीतीश वर्तमान में भारतीय सेना में मेजर के पद पर सेवारत हैं। अपनी सैन्य सेवा के दौरान, मेजर सिंह ने जम्मू और कश्मीर में आतंकवाद-रोधी अभियानों में हिस्सा लिया। वर्ष 2017 में, जब वे दक्षिण कश्मीर के शोपियां में तैनात थे, तब एक आतंकवाद-रोधी मुठभेड़ के दौरान उन्हें गंभीर चोटें आईं। इन चोटों के कारण उन्हें सेना से चिकित्सकीय आधार पर सेवानिवृत्ति लेनी पड़ी।
बेंचमार्क दिव्यांगता वाले व्यक्ति' (PwBD-1) श्रेणी के अंतर्गत वर्गीकृत होने के कारण, उन्हें शारीरिक रूप से कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। इसके बावजूद, उन्होंने अपने दृढ़ संकल्प को सार्वजनिक सेवा के एक नए अध्याय की ओर मोड़ा। नीतीश ने 8वीं तक की पढ़ाई बिजुलिया गांव के एक स्कूल से की। इसके बाद 2007 में मध्य प्रदेश से 10वीं की परीक्षा पास की और 2009 में महाराष्ट्र से 12वीं की परीक्षा में सफल हुए।
12वीं के बाद उन्होंने मेडिकल की तैयारी शुरू की, साथ ही साथ NDA परीक्षा भी दी। इस दौरान उन्होंने एनडीए भी पास कर लिया, अब दोनों में से एक का चुनाव करना था इसलिए उन्होंने मेडिकल की तैयारी छोड़ दी।
वर्ष 2010 से वे भारतीय सेना में अधिकारी के रूप में सेवा दे रहे थे। लेकिन सेवानिवृत्त होने के बाद उन्होंने पूरे मन से यूपीएससी की तैयारी की। इसके बाद एंथ्रोपोलॉजी विषय चुनकर सेल्फ स्टडी की। यह उनका तीसरा प्रयास था; पहले दो बार उन्होंने परीक्षा दी थी और एक बार इंटरव्यू तक पहुंचे थे।
नीतीश की इस सफलता का श्रेय पढ़ाई के महौल को भी जाता है। वे हमेशा पढ़ाई को सीरियस लेते आए हैं, वे पढ़ाई के वक्त कोई उन्हें डिस्टर्ब न करें, इस बात का विशेष ध्यान रखते थे।