देश के पहले गांव में दिखती है विलुप्त हुई ये खास नदी, आज भी चट्टानों को चीरकर बहती हैं

भारत में छोटी बड़ी मिलाकर 400 से अधिक नदी प्रणाली है। विविधताओं से भरे भारत देश में नदियों का महत्व केवल जल स्रोत और विद्युत निर्माण तक ही नहीं है, बल्कि यहां नदियों का मां का दर्जा देकर पूजा जाता है। ऋषिकेश, वाराणसी, हरिद्वार जैसे कई शहरों में नदियों की आरती की जाती है। भारत में नदियां लोगों की आस्था और धर्म से जुड़ी हुई है। लेकिन आज हम आपको भारत की उस नदी के बारे में बताने जा रहे हैं, जो लुप्त हो चुकी है, या यूं कहें की विलुप्त मानी जाती है, लेकिन उसके साक्ष्य अभी भी है, जो उसकी मौजूदगी की कहानी कहते हैं।

Authored by: TNN एजुकेशन डेस्क Updated Feb 16 2026, 11:05 IST
भारत की लुप्त नदीImage Credit : Canva01 / 07

भारत की लुप्त नदी

​लुप्त नदी के नाम से ही आप समझ गए होंगी की हम किस नदी की बात कर रहे हैं। जी हां... आज हम धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लुप्त हुई सरस्वती नदी के बारे में बात करेंगे और जानेंगी उस स्थान के बारे में जहां आज भी वह अपने तेज वेग के साथ बहती हैं।​

पाताल में बहने का मिला था श्रापImage Credit : Canva02 / 07

पाताल में बहने का मिला था श्राप

​धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सरस्वती को नदी भूमिगत यानी पाताल में बहने का श्राप मिला था। ये श्राप उन्हें भगवान गणेश द्वारा दिया गया था। पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब महर्षि वेदव्यास महाभारत की रचना कर रहे थे और इसे भगवान गणेश द्वारा लिखा जा रहा था, उस दौरान सरस्वती नदी का शोर इतना का इस काम में बाधा आ रही थी।​

महाभारत की रचना से जुड़ा है इतिहासImage Credit : Canva03 / 07

महाभारत की रचना से जुड़ा है इतिहास

​गणेश जी के अनुरोध के बाद भी नदी का शोर कम नहीं हुआ और उन्होंने सरस्वती नदी को पाताल में बहने का श्राप दिया, जिसके बाद वह विलुप्त हो गई। लेकिन आज भी कुछ स्थानों पर नदी की मौजूदगी के साक्ष्य मिलते हैं। जानते है कि आज भी देश के कई स्थानों पर सरस्वती नदी के साक्ष्य हैं और उनके दर्शन किए जा सकते हैं। आइए आपको उसके बारे में बताएं।​

भारत के पहले गांव में दिखती हैं लुप्त हुई सरस्वती नदीImage Credit : Canva04 / 07

भारत के पहले गांव में दिखती हैं लुप्त हुई सरस्वती नदी

​उत्तराखंड में स्थित माणा गांव भारत का पहला गांव है। पहले इसे आखिरी गांव का दर्जा मिला था, लेकिन इसकी खूबसूरती और शांत वातावरण को देखते हुए पीएम मोदी ने इसे आखिरी नहीं बल्कि पहले गांव की उपाधि दी। इसी गांव में लुप्त हुई सरस्वती नदी की धारा देखने को मिलती है।​

माणा गांव में कहां दिखती है सरस्वती नदी की धारा?Image Credit : Canva05 / 07

माणा गांव में कहां दिखती है सरस्वती नदी की धारा?

​उत्तराखंड के माणा गांव में भीम पुल के पास स्थित केशव प्रयाग (जहां अलकनंदा और सरस्वती का संगम होता है) के पास चट्टानी दरार के बीच तेज वेग के साथ सरस्वती नदी दिखाई देती है और अलकनंदा में मिल जाती है।​

गुप्त रूप में होता है प्रयागराज में संगमImage Credit : Canva06 / 07

गुप्त रूप में होता है प्रयागराज में संगम

​बता दें कि प्रयागराज के त्रिवेणी संगम में यमुना, गंगा और सरस्वती नदी का संगम होता है। कहा जाता है कि यहां सरस्वती नदी अदृश्य रूप में गंगा और यमुना से मिलती है। ​

दो स्थानों पर अन्य नदियों से होता है सरस्वती नदी का संगमImage Credit : Canva07 / 07

दो स्थानों पर अन्य नदियों से होता है सरस्वती नदी का संगम

​पहले प्रयागराज में यमुना और गंगा से सरस्वती नदी का गुप्त संगम होता है। दूसरा उत्तराखंड के माणा गांव में अलकनंदा से नदी का संगम होता है। इसके अलावा कुछ प्राचीन मान्यताओं की मानें तो मथुरा में यमुना के साथ सरस्वती नदी का संगम होता है।​

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