कुमार विश्वास कई बार छात्रों से रूबरू हो चुके हैं। एक दफा वे इंदौर में कौटिल्य अकेडमी के स्थापना समारोह पहुंचे थे। वे कहते हैं लोग मुझे कहते हैं कि आप धारा के विपरीत क्यों हैं। मैं कहता हूं जिंदा छातियां और बाहें धारा के विपरीत तैरती हैं, लाशें धारा के साथ बहती हैं।
उन्होंने कहा कि जो परीक्षाएं हैं, ये तो सिर्फ एक हर्डल है। जिंदगी को इससे आगे शुरू होगी। थोड़े समय के लिए आपको भ्रमित करने के लिए सारे उपचार हैं। वे कहते हैं कि लोग मुझसे पूछते हैं कि आपको बचपन की बहुत बातें याद रहती हैं। ऐसा कैसे ?
कुमार विश्वास कहते हैं कि मेरे समय में मोबाइल फोन नहीं था। ऐसे में कोई डायवर्जन भी नहीं था। जीवन में जो काम करता हूं एकाग्र होकर करता हूं। अकेडमी तो सिर्फ एक चौहद्दी है, जिसने आपको माहौल दिया है, असली टॉपर तो आपके अंदर है।
वे कहते हैं कि आप कसम खा लो कि जब तक परीक्षा क्रैक नहीं करोगे, दिनभर में सिर्फ 2 घंटे के लिए मोबाइल छुओगे। एक घंटे सुबह एक घंटे शाम। जब तक चयन ना हो जाए, 8 घंटे पढ़ाई, 2 घंटे टीवी और मोबाइल मिलाकर, 4 घंटे कोई और काम जो आप करते हों। इसके अलावा 8 घंटे की नींद। अगर आपने ये टाइम टेबल बना लिया तो परीक्षा में कुछ नहीं रखा है।
उन्होंने कहा कि एक कसम खानी होगी- आज रात को घर जाकर सोने से पहले खुद से वादा करोंगे, अपना नाम लेकर खुद से कहोगे कि मैं तुझे कमस खाकर भरोसा दिलाता हूं कि जिस प्रतियोगी परीक्षा के लिए मां-बाप ने तुझे यहां भेजा है, उसे किसी भी हालत में पार करके दिखाऊंगा।
वे कहते हैं कि अगर आपने ये कसम खा ली तो आप कर के भी दिखा देंगे। कुमार विश्वास ने कहा कि ना किसी राह ना रहगुजर से निकलेगा, हमारे पांव का कांटा हमी से निकलेगा।
कुमार विश्वास की ये बातेंवाकई जोश भर देती हैं। अगर उनकी इन बातों पर छात्र अमल कर लें तो जाहिर तौर पर उन्हें आगे बढ़ने से कोई भी नहीं रोक सकता।