पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा जारी जानकारी के अनुसार, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के तहत दिल्ली में साल 2025-26 में परिवारों की औसत खपत 7.4 सिलेंडर उपयोग किए गए थे। वहीं योजना से बाहर के परिवारों को मिला दें तो यह खपत 9.2 सिलेंडर है।
एलपीजी के मामले में दिल्ली के बाद सबसे अधिक उपभोक्ता चंडीगढ़ शहर में है। आंकड़ों के अनुसार, यहां 2025 में परिवारों की औसत खपत 7.2 सिलेंडर उपयोग किए गए हैं। योजना से बाहर के परिवारों को मिलाकर खपत बढ़कर 9.6 सिलेंडर हो जाती है।
बता दें कि भारत का राष्ट्रीय औसत 4.8 सिलेंडर है। अगर योजना से बाहर के परिवारों की खपत को भी मिला दें तो राष्ट्रीय औसत बढ़कर 6.8 हो जाता है। बता दें यह आंकड़े 2025-26 के हैं।
बता दें कि भारत में सबसे अधिक एलपीजी उपयोग करने वाले राज्यों में हरियाणा अव्वल पर है। उसके बाद पंजाब, उत्तर प्रदेश और राजस्थान आते हैं।
जहां हरियाणा सबसे अधिक एलपीजी उपयोग करने वाले राज्यों में है, वहीं छत्तीसगढ़ सबसे कम एलपीजी इस्तेमाल करने वाले राज्यों में से एक है। इसमें दूसरे स्थान पर झारखंड और तीसरे स्थान पर मध्य प्रदेश शामिल है।
भारत कच्चे तेल का आयात करता है। उसके बाद देश में स्थित बड़ी रिफाइनरियों में इससे पेट्रोल और डीजल का निर्माण किया जाता है। उसी दौरान बाय-प्रोडक्ट के तौर पर एलपीजी बनता है, जिसे अधिक दबाव में लिक्विड में बदलकर सिलेंडर में भरा जाता है और उसे लोगों के घरों में पहुंचाया जाता है।