भारत में इंटरनेट की आधिकारिक शुरुआत 15 अगस्त 1995 में हुई थी। इंडिया में इंटरनेट को लॉन्च सरकारी स्वामित्व वाली विदेश संचार निगम लिमिटेड द्वारा की गई थी।
भारत में आम जनता के लिए इंटरनेट उपलब्ध होने से पहले एजुकेशनल रिसर्च नेटवर्क ने रिसर्च और शैक्षिक उद्देश्यों के लिए इंटरनेट सुविधा प्रदान की थी।
2025 के आंकड़ों के अनुसार, भारत में इंटरनेट उपयोगकर्ता की संख्या 950 मिलियन थी। सबसे अधिक इंटरनेट उपयोगकर्ता उत्तर प्रदेश राज्य में है। यहां इनकी संख्या करीब 13 करोड़ से अधिक है।
भारत में इंटरनेट समुद्र तल पर बिछाई गई हाई कैपेसिटी फाइबर-ऑप्टिक केबलों के माध्यम से मिलती है। यह केबल वैश्विक नेटवर्क से जुड़ती है।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भारत में इंटरनेट मुख्य रूप से 17 अंतरराष्ट्रीय पनडुब्बी केबलों के माध्यम से पहुंचाया जाता है। यह सभी केबल अलग-अलग केबल लैंडिंग स्टेशनों पर उतरती हैं और भारत में इंटरनेट पहुंचाया जाता है।
भारत में इंटरनेट पहुंचाने वाले केबल लैंडिंग स्टेशन देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के साथ चेन्नई, कोचीन, तूतीकोरिन और त्रिवेंद्रम में स्थित है।
भारत में दो मुख्य केंद्र हैं, जो अधिकतम इंटरनेट ट्रैफिक संभालते हैं। एक है मुंबई और दूसरा दक्षिण भारत में स्थित चेन्नई है।
भारत के प्रमुख इंटरनेट केबल मार्ग के बारे में बात करें तो इसमें SEA-ME-WE-4 (SMW4), SEA-ME-WE-5 (SMW5), I-ME-WE और Falcon शामिल हैं। यह भारत को यूरोप और एशिया से जोड़ता है।