बीपीएससी परीक्षा पास कर अफसर बनने वाले आर्यन राज बिहार के बेगूसराय जिले के एक बेहद सामान्य परिवार से ताल्लुक रखते हैं। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने अपने संघर्षों के बारे में बताया। पढ़ाई में अच्छे आर्यन का जीवन तानों से भरा रहा है। उन्होंने बताया कि वह बचपन से ही पढ़ाई में काफी होनहार थे और उन्होंने दसवीं व बारहवीं की परीक्षाओं में बेहतरीन अंक हासिल किए थे। उनके अच्छे प्रदर्शन को देखकर परिवार और आसपास के लोगों को उनसे कुछ बड़ा कर दिखाने की उम्मीद थी।
स्कूल की पढ़ाई के बाद आर्यन का सपना इंजीनियर बनने का था और वह देश के बेहतरीन संस्थान से इंजीनियरिंग करना चाहते थे। इसलिए उन्होंने 'भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान' (IIT) की कठिन प्रवेश परीक्षा की तैयारी की। लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था। उन्हें आईआईटी में दाखिला लेने में सफलता नहीं मिली, लेकिन उसी दौरान उन्होंने वेल्लोर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के लिए वीआईटी प्रवेश परीक्षा दी, जिसमें उन्हें सफलता मिली और उन्होंने 2015 में VIT में एडमिशन लिया। इसी कॉलेज की पढ़ाई के दौरान साल 2016 में उनकी जिंदगी में एक लड़की आई, जो उनकी गर्लफ्रेंड बनी।
2019 में आर्यन ने इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की। उन्होंने नौकरी करने की बजाए सिविल सेवा की परीक्षा की तैयारी शुरू की। अभी उनकी तैयारी को शुरू हुए अधिक समय भी नहीं हुआ था, कि 2020 में कोरोना महामारी के दौरान उनके पिता की नौकरी चली गई। परिवार को आर्थिक संकट से उबारने के लिए आर्यन ने बच्चों को ट्यूशन और कोचिंग पढ़ाना शुरू किया। इस दौरान समाज के लोगों ने उन्हें खूब ताने दिए कि इतने बड़े और महंगे कॉलेज से इंजीनियरिंग करने के बाद यह छोटा-मोटा काम कर रहा है। लेकिन आर्यन बिना विचलित हुए अपनी पढ़ाई और काम में जुटे रहे।
आर्यन के जीवन में संघर्ष के इसी दौर सबसे बड़ा तूफान तब आया जब उनकी गर्लफ्रेंड के घरवाले उसके लिए कोई दूसरा रिश्ता देखने लगे। आर्यन ने करियर के लिए 2 साल का समय मांगा, लेकिन उनकी प्रेमिका ने यह कहते हुए रिश्ता तोड़ दिया कि उसके घरवाले सिर्फ सरकारी नौकरी वाले लड़के से ही उसकी शादी करना चाहते हैं। 4 साल पुराने रिश्ते चंद सेकेंड में टूट गया। हजारों तानों से भी नहीं डगमगाए आर्यन के लिए यह वह दौर था, जहां उन्हें लगा सब खत्म हो गया। इस नाजुक वक्त में उनके कुछ करीबी दोस्तों ने उन्हें संभाला और करियर पर फोकस करने की सलाह दी।
खुद को मानसिक रूप से मजबूत करने के बाद बीपीएससी की परीक्षा की तैयारी के लिए आर्यन साल 2021 में दिल्ली आ गए। दिल्ली में रहने और पढ़ाई करने के लिए पैसों की किल्लत में उनके भाई ने उनका साथ दिया। आर्यन ने खुद को पढ़ाई में पूरी तरह झोंक दिया। कोचिंग के साथ-साथ लाइब्रेरी में घंटों सेल्फ स्टडी कर उन्होंने हर विषय पर बारीकी से काम किया, नोट्स बनाए और लगातार मॉक टेस्ट दिए।
उनकी अटूट दृढ़ता और कड़ा परिश्रम आखिरकार रंग लाया और आर्यन ने अपने पहले ही प्रयास में बीपीएससी की 67वीं संयुक्त प्रतियोगी परीक्षा को न सिर्फ पास किया, बल्कि सीधे अधिकारी का पद हासिल कर लिया। उनकी नियुक्ति लेबर इंफोर्समेंट ऑफिसर (LEO) के पद पर हुई। अब वह भी एक अधिकारी हैं और वो भी सरकारी नौकरी वाले।
आर्यन राज की सफलता की ये कहानी लाखों लोगों के लिए मिसाल है। यह हमें सिखाती है कि परिस्थितियां चाहे कितनी भी विपरीत क्यों न हों, अगर आप अपने दर्द और अपमान को अपनी ऊर्जा में बदल लें, तो दुनिया की कोई भी ताकत आपको सफल होने से नहीं रोक सकती। बस आपक में कुछ कर दिखाने की चाहत और उसके लिए संघर्ष करने की इच्छा होनी जरूरी है।