नई स्पीड लिमिट गाइडलाइंस आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, पूर्वांचल एक्सप्रेसवे, बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे और गोरखपुर लिंक एक्सप्रेसवे पर लागू की गई हैं। कोहरे के कारण दृश्यता कम होने से इन मार्गों पर दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ गई थी, जिसके चलते यह फैसला लिया गया है।
प्रशासन के अनुसार संशोधित गति सीमा तत्काल प्रभाव से लागू हो गई है और यह मध्य फरवरी तक या फिर कोहरे की स्थिति सामान्य होने तक प्रभावी रहेगी। इस दौरान नियमों का उल्लंघन करने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी।
M-1 श्रेणी के वाहनों, यानी ऐसे यात्री वाहन जिनमें ड्राइवर समेत अधिकतम आठ सीटें होती हैं (कार, एसयूवी आदि), के लिए सामान्य 120 किमी प्रति घंटा की सीमा घटा दी गई है। अब दिन में (सुबह 8 से रात 8 बजे तक) अधिकतम गति 80 किमी प्रति घंटा और रात में (रात 8 से सुबह 8 बजे तक) 60 किमी प्रति घंटा तय की गई है।
M-2 और M-3 श्रेणी में वे यात्री वाहन आते हैं जिनमें ड्राइवर समेत नौ या उससे अधिक सीटें होती हैं, जैसे बसें और मिनी बसें। इनके लिए पहले 100 किमी प्रति घंटा की अनुमति थी, जिसे घटाकर दिन में 60 किमी प्रति घंटा और रात में 50 किमी प्रति घंटा कर दिया गया है।
N श्रेणी के वाहन, यानी ट्रक और अन्य माल ढोने वाले वाहन, के लिए भी नई सीमा तय की गई है। इनकी गति दिन में 50 किमी प्रति घंटा और रात में 40 किमी प्रति घंटा से अधिक नहीं हो सकेगी, जबकि पहले यह सीमा 80 किमी प्रति घंटा थी।
नई स्पीड लिमिट के तहत एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (ATMS) के जरिए ओवरस्पीडिंग चालान काटे जाएंगे। एक्सप्रेसवे पर लगे कैमरे और सेंसर नई गाइडलाइंस के अनुसार ही वाहनों की गति को रिकॉर्ड करेंगे।
प्रशासन ने सुरक्षा के लिहाज से एक्सप्रेसवे के एंट्री और एग्जिट प्वाइंट पर फॉग लाइट लगाने, चेतावनी बोर्ड लगाने और रिफ्लेक्टर व ब्लिंकर की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं। नदियों और नालों के पास वाले हिस्सों में विशेष सतर्कता बरती जाएगी। वहीं, अत्यधिक घने कोहरे में (जब विजिबिलिटी 560 मीटर से कम हो) वाहनों को नजदीकी टोल प्लाजा या सुविधा केंद्र पर रोककर काफिले में आगे भेजने की व्यवस्था की जाएगी। इसके लिए UPEIDA और पुलिस मिलकर एक मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार कर रहे हैं।