देश के विभिन्न राज्यों में हाईटेक एक्सप्रेसवे और हाईवे मार्ग विकसित किए जा रहे हैं, जो एक साथ कई राज्यों को कनेक्ट करते हैं। इसी क्रम में यूपी में सड़क परिवहन की दिशा में कई अहम परियोजनाओं पर कार्य चल रहा है। मौजूदा समय में राज्य के पास 15 एक्सप्रेसवे और करीब 12 हजार किलोमीटर लंबाई के हाईवे मार्ग होने का दावा है, जिनमें से कई ट्रैवल के लिए खोल दिए गए हैं और कईयों पर कार्य चल रहा था। इन्हीं में से एक डिजिटल राजमार्ग पड़ोसी राज्य नेपाल तक विकसित किया जा रहा है, जिसके 6 लेन विस्तार के लिए 27,927 करोड़ रुपये का बजट तय किया है। इस परियोजना के विकसित होने से पूर्वी यूपी और नेपाल बॉर्डर तक कनेक्टिविटी मजबूत होगी, जिससे आवागमन बेहद आसान होगा। इसमें ऑप्टिकल फाइबर केबल 5G/6G और AI जैसी सुविधाएं मिलेंगी।
पूर्वी उत्तर प्रदेश को डायरेक्ट नेपाल के साथ कनेक्टिविटी देने के लिए 6 लेन हाईवे के विस्तार की परिकल्पना की गई है। इस प्रोजेक्ट के विस्तार से रूट के संबंधित जिलों के लोगों समेत अन्य वाहन चालकों को सफर में सहलियत होगी और कम समय में गंतव्य तक पहुंचने में मदद मिलेगी। यह परियोजना एनएचएआई की राष्ट्रव्यापी 10000 किमी. डिजिटल हाईवे का हिस्सा है। इससे पूर्व द्वारका एक्सप्रेसवे फुल AI एक्सप्रेसवे बना फिर दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे को पहले डिजिटल एक्सप्रेसवे के रूप में विकसित किया गया है।
बाराबंकी-रुपईडीहा हाईवे नेपाल सीमा तक जाने वाला इंटरनेशनल आवागमन के लिहाज से बेहद अहम है। साल 2014 से पहले इस परियोजना के 153 किलोमीटर सड़क के निर्माण के लिए 1600 करोड़ रुपये खर्च किए थे। फिलहाल, 6 लेन तक बढ़ाने के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है। इस परियोजना के निर्माण से स्थानीय पर्यटन के साथ लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।
बाराबंकी-रुपईडीहा हाईवे परियोजना को 6 लेन के विस्तार के लिए केंद्र ने 27,927 करोड़ रुपये मंजूर किया था। इसके रूट पर बाराबंकी, बहराइच, गोंडा, बलरामपुर और श्रावस्ती से होकर गुजरेगा। इसके खुलने से कटारनिया घाट, दुधवा नेशनल पार्क और सोहेलवा जैसे पर्यटन स्थलों तक पहुंचना बेहद आसान होगा।
बाराबंकी-रुपईडीहा हाईवे (NH-927 का हिस्सा) है, जो बाराबंकी के शुक्लाई-पलहारी गांव के पास से शुरू होता है। यह सड़क मार्ग बाराबंकी के चौपुल क्षेत्र के पास लखनऊ-अयोध्या नेशनल हाईवे (NH-27) से कनेक्ट होता है। उधर, बहराइच से आगे नेपालगंज होकर वहां से राजमार्ग का हिस्सा हो जाता है। जानकारी के मुताबिक, यह यूपी का पहला डिजिटल हाईवे है, जिससे 4 लेन में बदला जा रहा है और आगे यही 6 लेन में विस्तार होगा।
मॉर्डन दौर पर पारंपरिक सड़कों से हटकर डिजिटल और आधुनिक हाईवे एक्सप्रेसवे विकसित किए जा रहे हैं, जो सड़कों को इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT), ऑप्टिकल फाइबर केबल (OFC), और स्मार्ट सेंसर इत्यादि टेक्निक की सहूलियत देंगे। नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) का उद्देश्य हाईस्पीड ट्रैक के साथ सुरक्षित यात्रा का अनुभव देना है। लिहाजा, डिजिटली सर्विस से लैस मार्गों पर 24 घंटे कनेक्टिविटी के साथ रियल टाइम ट्रैफिक मैनेजमेंट और हाईस्पीड इंटरनेट सुविधाएं आदि प्रदान करना है। हालांकि, भारतमाला परियोजना के तहत विकसित किए जा रहे सभी एक्सप्रेसवे डिजिटली विकसित किए जा रहे हैं। इसी प्रकार बाराबंकी-रुपईडीहा हाईवे में 3 मीटर चौड़ी डक्ट में ऑप्टिकल फाइबर केबल बिछाई जा रही है, जिससे इंटरनेट और मोबाइल कनेक्टिविटी और बेहतर रहेगी।
बाराबंकी-रुपईडीहा हाईवे पर प्रतिदिन औसतन 20 हजार वाहन गुजरते हैं। हाईवे की लेन कम होने से वाहनों की रफ्तार कम रहती है और जाम जैसी स्थिति हो जाती है। लिहाजा, इसे 6 लेन तक विस्तार करने की मांग की जा रही थी। फिलहाल, चार चरणों का सर्वेक्षण पूरा हो चुका है और 6 लेन के लिहाज से भूमि अधिग्रहण का कार्य जारी है। जिन किसानों से जमीन खरीदी जा रही है, उन्हें तय सर्किल रेट के हिसाब से मुआवजा दिया जाएगा, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर होगी।