​मिल गया सोने का बड़ा भंडार, निकाल लिया तो भारत बन जाएगा Gold Mining का धुरंधर​

​हमारे देश को कभी सोने की चिड़िया कहा जाता था। आज भी देश में सोने के प्रति आकर्षण जबरदस्त है। तमाम देशों की तरह भारत का केंद्रीय बैंक यानी रिजर्व बैंक भी सोने की बड़ी मात्रा में खरीद करता है। लेकिन भारत में सोने की खदानें बहुत कम हैं और 99 फीसद सोना विदेशों से आयात होता है। अब सोने का एक बड़ा भंडार मिला है, जिसे अगर निकाल लिया जाए तो भारत गोल्ड माइनिंग का धुरंधर बन जाएगा।​

कहां मिला सोना
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​कहां मिला सोना​

​सोने का यह भंडार कर्नाटक मेंकोप्पल जिले के अमरापुर ब्लॉक में मिला है। इस खोज ने देश के भूगर्भ वैज्ञानिकों, उद्योगपतियों और नीति-निर्माओं को चौंका दिया है। अगर भारत इस सोने को निकालने में सफल रहता है तो गोल्ड माइनिंग में धुरंधर साबित हो सकता है।​

सोने का विशाल भंडार
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​सोने का विशाल भंडार​

​अमरापुर ब्लॉक में सोने का विशाल भंडार हो सकता है। यहां पर सोने की ऐसी ग्रेडिंग मिली है, जो सामान्य तौर पर नहीं मिलती है। यहां प्रति टन 12-14 ग्राम सोने की ग्रेडिंग मिली है, जो कॉमर्शियल खोदाई के लिए उपयुक्त जगह से 4-7 गुना ज्यादा है।​

रोज निकलेगा 25-30 किलो सोना
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​रोज निकलेगा 25-30 किलो सोना!​

​राज्य के खनन एवं भूविज्ञान विभाग ने 6 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में किए गए पुनर्ग्रहण सर्वे के दौरान इस खोज की पुष्टि की है। शुरुआती सतही नमूनों में जिस स्तर का सोना मिला, उसने यह संकेत दे दिया कि अगर गहराई में भी 8–10 ग्राम प्रति टन का स्तर रहा, तो मात्र एक खदान प्रतिदिन 25–30 किलोग्राम सोना उगल सकती है, जिसकी आज के भाव से कीमत 18–22 करोड़ रुपये प्रतिदिन होगी।​

आड़े आ रही ये दिक्कत
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​आड़े आ रही ये दिक्कत​

​सोने का भंडार तो मिल गया, लेकिन इसे निकालने में एक दिक्कत आड़े आ रही है। और यह दिक्कत है आरक्षित वन क्षेत्र। अमरापुर ब्लॉक संरक्षित वन क्षेत्र और ईको-सेंसिटिव जोन में आता है। नियम के तहत बिना स्टेज-1 फॉरेस्ट क्लियरेंस के 10-20 मीटर से नीचे ड्रिंलिंग नहीं कर सकते।​

खजाना लेकिन बंद तिजोरी में क्यों
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​खजाना, लेकिन बंद तिजोरी में क्यों​

​वन विभाग को सोने की खोदाई को लेकर कई तरह की चिंताएं हैं। जिसमें यहां से होकर गुजरने वाले वन्यजीव मार्ग, भूमिगत जल का पुनर्भरण क्षेत्र, आसपास की आदिवासी बस्तियां व पश्चिमी घाट के संवेदनशील पर्यावरम पर पड़ने वाला संभावित असर भी है।​

मंजूरी के लिए कोशिशें तेज
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​मंजूरी के लिए कोशिशें तेज​

​वन क्षेत्र में सोने का खजाना मिलने की खबर मिलते ही हर किसी के काम खड़े हो गए हैं। राजनीतिक और औद्योगिक समूह तेजी से मंजूरी दिलाने के लिए दबाव बना रहे हैं।​

पुष्पा हुआ एक्टिव
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​'पुष्पा' हुआ एक्टिव​

​सरकारी मंजूरी न मिलने और वन क्षेत्र में अधिक निगरानी न होने पर अवैध तरीके से सर्वे और खोदायी की कोशिशें बढ़ने लगी हैं। जिस तरह से फिल्म पुष्पा में नायक चंदन की तस्करी करता था, वैसे ही यहां से सोने की खोदायी और तस्करी की आशंका है।​

दिल्ली अभी दूर है
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​दिल्ली अभी दूर है​

​कर्नाटक सरकार ने अब एक अंतर-विभागीय समिति बनाकर वन-विनियोजन प्रस्ताव तैयार करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। अनुमान है कि मध्य 2026 से पहले स्टेज-I मंजूरी मुश्किल है। इसके बाद ही G3 स्तर की गहरी ड्रिलिंग शुरू हो सकेगी। अगर संभव हुआ तो व्यावसायिक खनन कम से कम 5-8 साल बाद ही शुरू हो पाएगा।​

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