शेयर के बदले लोन वह सुविधा है, जिसमें आप अपने पास मौजूद शेयर, म्यूचुअल फंड या ETF को गिरवी रखकर बैंक या NBFC से लोन ले सकते हैं। इसमें आपको अपने शेयर बेचने की जरूरत नहीं होती और वे आपके नाम पर ही रहते हैं। लोन चुकाने के बाद शेयर फिर से पूरी तरह आपके कंट्रोल में आ जाते हैं।
इस सुविधा के लिए निवेशक को बैंक या फाइनेंस कंपनी के पास आवेदन करना होता है। आपको अपने डीमैट अकाउंट की जानकारी देनी होती है। इसके बाद कंपनी आपके शेयरों की वैल्यू देखती है और आमतौर पर 50% से 70% तक लोन मंजूर करती है। प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल भी हो सकती है और पैसा जल्दी खाते में आ जाता है।
हर शेयर पर लोन नहीं मिलता। आमतौर पर बड़ी और भरोसेमंद कंपनियों के शेयर, जिन्हें ब्लू-चिप स्टॉक्स कहा जाता है, उन्हीं पर लोन दिया जाता है। इसके अलावा म्यूचुअल फंड और ETF पर भी यह सुविधा मिल सकती है। जोखिम भरे या बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव वाले शेयरों पर लोन नहीं मिलता।
शेयर के बदले मिलने वाले लोन की ब्याज दर आमतौर पर पर्सनल लोन से कम होती है। यह दर 9% से 12% के बीच हो सकती है, जो बैंक और आपके प्रोफाइल पर निर्भर करती है। क्योंकि इसमें शेयर गिरवी होते हैं, इसलिए लेंडर का जोखिम कम रहता है।
इस तरह के लोन की अवधि आमतौर पर 1 से 3 साल तक होती है। कुछ मामलों में ओवरड्राफ्ट जैसी सुविधा भी मिलती है, जिसमें आप जरूरत के हिसाब से पैसा निकाल सकते हैं और केवल उपयोग की गई राशि पर ही ब्याज देना होता है।
अगर लोन के दौरान शेयर की कीमत बहुत ज्यादा गिर जाती है, तो बैंक आपसे अतिरिक्त शेयर गिरवी रखने या कुछ रकम चुकाने के लिए कह सकता है। इसे मार्जिन कॉल कहा जाता है। अगर ऐसा नहीं किया गया, तो बैंक शेयर बेचकर अपना पैसा वसूल सकता है।
इस लोन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि आपको निवेश तोड़ना नहीं पड़ता। आप बाजार में बने रहते हैं और शेयर की वैल्यू बढ़ने का फायदा भी उठा सकते हैं। साथ ही यह टैक्स प्लानिंग के लिहाज से भी बेहतर हो सकता है, क्योंकि शेयर बेचने पर लगने वाला कैपिटल गेन टैक्स नहीं देना पड़ता।