e20 Petrol को लेकर सर्वे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा! क्या आप भी फेस कर रहे हैं परेशानी

भारत में पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सरकार ने E20 पेट्रोल (20% एथनॉल मिश्रित ईंधन) को धीरे-धीरे लागू करना शुरू किया है, लेकिन इसका असर बहुत तेजी से हो रहा है। ई-20 पेट्रोल से आम जनता काफी परेशान नजर आ रही है। लोगों की शिकायतों के आधार पर कहा जा सकता है कि यह तेल अब लोगों के लिए सिरदर्द बनता जा रहा है।

Authored by: प्रदीप पाण्डेयUpdated Oct 16 2025, 11:46 IST
सर्वे में दावाImage Credit : Canva01 / 08

सर्वे में दावा

​ई-20 पेट्रोल आम वाहन मालिकों की जेब पर भारी पड़ रहा है। एक हालिया LocalCircles रिपोर्ट के अनुसार, देशभर में 80% पेट्रोल वाहन मालिकों ने शिकायत की है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद उनकी गाड़ियों का माइलेज घट गया है यानी 10 में से 8 लोग ई-20 पेट्रोल से परेशान हैं।​

​लोगों की परेशानी: माइलेज में भारी गिरावट​Image Credit : Canva02 / 08

​लोगों की परेशानी: माइलेज में भारी गिरावट​

​रिपोर्ट में देश के 323 जिलों के वाहन मालिकों की राय शामिल की गई। नतीजे चौंकाने वाले थे। सर्वे में शामिल 80% लोगों ने कहा कि उनकी गाड़ियों का माइलेज घट गया है। इनमें से 16% वाहन मालिकों ने बताया कि उनका माइलेज 20% से अधिक घटा है। 45% लोगों को 15–20% तक की गिरावट महसूस हुई। ​

बढ़ी टेंशनImage Credit : Canva03 / 08

बढ़ी टेंशन

​जबकि 13% ने 10–15% तक की कमी देखी। सिर्फ 5% लोगों ने कहा कि उनके वाहन की परफॉर्मेंस पर कोई फर्क नहीं पड़ा। सोचिए, जब पहले ही पेट्रोल के दाम आसमान छू रहे हों, तब माइलेज में गिरावट होना आम लोगों के लिए कितनी बड़ी चिंता बन जाता है।

अटक रहा बाइक का एक्सीलेटर​Image Credit : Canva04 / 08

अटक रहा बाइक का एक्सीलेटर​

​सर्वे में शामिल कई बाइक मालिकों ने बताया कि उनकी बाइक का एक्सीलेटर चिपक रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि 2011 से 2025 के बीच बेचे गए अधिकतर पेट्रोल वाहन केवल E5 या E10 ईंधन के लिए डिजाइन किए गए थे, इसलिए E20 जैसे उच्च एथनॉल मिश्रण उनके इंजन को नुकसान पहुंचा सकते हैं।​

सरकार का रुख: “E20 सुरक्षित है”Image Credit : Canva05 / 08

सरकार का रुख: “E20 सुरक्षित है”

जहां आम लोग परेशान हैं, वहीं सरकार का कहना है कि E20 पेट्रोल पूरी तरह सुरक्षित है और यह भारत की स्वच्छ ऊर्जा नीति (Clean Energy Strategy) का एक अहम हिस्सा है। सरकारी अधिकारियों का तर्क है कि नई पीढ़ी की गाड़ियां पहले से ही E20 के अनुरूप डिजाइन की जा रही हैं, इसलिए आने वाले समय में यह समस्या खत्म हो जाएगी, लेकिन वास्तविकता यह है कि देश में करोड़ों पुरानी गाड़ियां चल रही हैं, जिनके मालिक अचानक से बढ़े हुए मेंटेनेंस और घटे माइलेज से जूझ रहे हैं।

​ग्राहकों की मांग: “E20 वैकल्पिक हो, सस्ता हो”​Image Credit : Canva06 / 08

​ग्राहकों की मांग: “E20 वैकल्पिक हो, सस्ता हो”​

​LocalCircles की रिपोर्ट के अनुसार, 52% उपभोक्ताओं का मानना है कि E20 पेट्रोल को वैकल्पिक बनाया जाना चाहिए, न कि जबरदस्ती लागू किया जाए। साथ ही लोगों का सुझाव है कि अगर सरकार E20 लागू करना चाहती है, तो इसकी कीमत साधारण पेट्रोल से कम रखी जानी चाहिए, ताकि बढ़े हुए फ्यूल कंजंप्शन का बोझ थोड़ा कम हो सके।​

​विशेषज्ञों की राय: धीरे-धीरे बदलाव की जरूरत​Image Credit : Canva07 / 08

​विशेषज्ञों की राय: धीरे-धीरे बदलाव की जरूरत​

​ऑटो इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि भारत में E20 की ओर बढ़ने की प्रक्रिया को धीरे-धीरे और सोच-समझकर आगे बढ़ाना चाहिए। पहले वाहनों की तकनीकी संगतता (compatibility) सुनिश्चित की जाए, फिर जनजागरूकता अभियान चलाकर लोगों को सही जानकारी दी जाए। ​

धीरे-धीरे लागू होImage Credit : Canva08 / 08

धीरे-धीरे लागू हो

​बिना तैयारी के बदलाव न केवल उपभोक्ताओं को आर्थिक रूप से नुकसान पहुंचा सकता है, बल्कि वाहन के दीर्घकालिक स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डाल सकता है।​

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