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World Music Day 2026: क्या दवा का भी काम करता है संगीत, किस रोग को दूर करता है कौन सा राग

World Music Day 2026: प्राचीन काल से ही संगीत को उपचार का एक माध्यम माना जाता रहा है। भारतीय शास्त्रीय संगीत में रागों के माध्यम से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की परंपरा रही है।

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जानें संगीत को क्यों माना गया है औषधि? (AI Generated Image)

World Music Day 2026: आज विश्व संगीत दिवस है। दुनिया भर में यह खास दिन हर साल 21 जून को मनाया जाता है। संगीत में ऐसी शक्ति है कि ये भाषा, देश और संस्कृति की सीमाओं से परे लोगों के दिलों को एक धागे में जोड़ देता है। गम हो, खुशी हो या कोई दुख तकलीफ, संगीत हर एहसास को बयां करने का जरिया भी है। संगीत के सुरों में ऐसा जादू है कि ये कठोर से कठोर इंसान का भी मन मोह ले। भारतीय संस्कृति में संगीत को आत्मा की औषधि भी माना गया है। तो क्या सचमुच रागों में रोगों से भी लड़ने की ताकत है?

क्या दवा का काम करता है संगीत

प्राचीन काल से ही संगीत को उपचार का एक माध्यम माना जाता रहा है। भारतीय शास्त्रीय संगीत में रागों के माध्यम से मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्राप्त करने की परंपरा रही है। आज आधुनिक विज्ञान भी मानता है कि मधुर संगीत तनाव, चिंता और अवसाद को कम करने में सहायक हो सकता है।

जब मन अशांत होता है, तब संगीत भावनाओं को सहलाने का काम करता है। इसकी मधुर धुनें मस्तिष्क में ऐसे केमिकल्स का फ्लो बढ़ाती हैं, जो खुशी और सुकून का एहसास कराते हैं। यही वजह है कि अस्पतालों और चिकित्सा केंद्रों में भी संगीत चिकित्सा यानी म्यूजिक थेरेपी का इस्तेमाल किया जा रहा है।

हालांकि संगीत किसी गंभीर बीमारी का सीधा इलाज नहीं है, लेकिन यह रोगों से लड़ने की मानसिक शक्ति बढ़ाने और तनाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यही कारण है कि कहा जाता है कि संगीत में वह जादू है, जो दुख, चिंता और मानसिक थकान जैसे कई रोगों का नाश कर सकता है।

क्या कहते हैं एक्सपर्ट्स

मनोविज्ञान कहता है कि दिमाग में अल्फा, बीटा, डेल्टा व थीटा वेव सोने और जागने में मदद करती हैं। थीटा और डेल्टा वेव सोने में मदद करती हैं। शास्त्रीय संगीत के कई ऐसे राग हैं जिनकी फ्रीक्वेंसी थीटा और डेल्टा से मिल जाती है और नींद लाने में मदद करती हैं। वहीं मेडिकल साइंस मानता है कि एलोपैथी एलोपैथी के मुताबिक संगीत से रोग दूर नहीं होते। हालांकि व्यवहारिक रूप से कई लोगों को संगीत सुनने या पढ़ने से नींद आ जाती है।

कौन सा राग किस रोग में फायदेमंद

वैसे बहुत से लोगों ने ये दावा किया है कि संगीत में रोगों को दूर करने की शक्ति है। कई प्राचीन किताबों में भी इस तरह की बात कही गई है है। इन दावों की मानें तो राग पूरिया धनाश्री नींद ना आने की दिक्कत को दूर करता है, तो राग मालकौंस तनाव से निजात दिलाता है।

राग शिवरंजिनी मन को सुखद अनुभूति देता है। राग मोहिनी आत्मविश्वास बढ़ाता है। राग भैरवी ब्लड प्रेशर और पूरे तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित रखता है। राग पहाड़ी स्नायु तंत्र को ठीक करता है। राग दरबारी कान्हड़ा तनाव दूर करता है। राग अहीर भैरव व तोड़ी उच्च रक्तचाप के लिए कारगर है। राग दरबारी कान्हड़ा में अस्थमा को ठीक करने की ताकत है तो वहीं राग भैरवी साइनस से राहत दिलाता है। बात राग तोड़ी की की जाए तो दावा किया जाता है कि ये सिरदर्द और क्रोध से निजात दिलाता है।

यहां सबसे जरूरी बात ये है कि भले मेडिकल साइंस संगीत की शक्ति को एलोपैथी का हिस्सा ना माने, लेकिन बहुत से लोगों ने इसे अनुभव किया है। ये आपको तय करना है कि आप किसकी बात मानते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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