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World Day of Disability: विकलांगता पर ये प्रेरक बातें दिलाती हैं साहस, आप भी जानें

  • Produced by: टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल
  • Updated Dec 3, 2022, 01:28 PM IST

World Day of the Disability Quotes: हर साल 3 दिसंबर को पूरे विश्‍व में विश्व विकलांग दिवस मनाया जाता है। यह दिन खास तौर पर विकलांग लोगों में उत्‍साह जगाने और उनके सम्‍मान व जीवन को बेहतर बनाने के लिए में मनाया जाता है। यहां हम कुछ ऐसे महापुरुषों के संदेश्‍ा लेकर आये हैं जो किसी भी व्‍यक्ति को प्रेरणा दे सकती हैं।

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World Day Of Disability Quotes

KEY HIGHLIGHTS
  • वर्ष 1992 से मनाया जा रहा है विश्व विकलांग दिवस
  • विकलांग लोगों में इच्छाशक्ति एवं मानसिक बल बढ़ाना लक्ष्‍य
  • महापुरुषों ने विकलांगता पर कहीं है मनोबल बढ़ाने वाले बातें


World Day of the Disability Quotes: हर साल 3 दिसंबर को पूरे विश्‍व में धूमधाम से अंतरराष्ट्रीय विकलांग दिवस मनाया जाता है। विश्व विकलांग दिवस (World Disabilities Day 2022) के लिए पहली बार वार्षिक ऑब्जरवेशन की घोषणा यूनाइटेड नेशंस ने जनरल असेम्बली रेजोल्यूशन में 1992 में किया था। जिसके बाद से यह दिन विकलांग दिवस, विकलांग व्यक्तियों के प्रति करुणा, आत्म-सम्मान और उनके जीवन को बेहतर बनाने के समर्थन के उद्देश्य के तौर पर मनाया जाता है। यह उत्सव समाज में समानता के लिए है और खासकर उस वर्ग के लिए है जो इच्छाशक्ति एवं मानसिक बल में सामान्य लोगों की तुलना में कई गुना ज्यादा सक्षम हैं। संसार में दिव्यांग आज हर तरह के कार्य कर रहे हैं और ये लोग अब कई मामलों में आगे जा चुके हैं। इस उत्सव के अवसर पर हमें दिव्यांगों को प्रोत्साहित करना चाहिए। इसलिए यहां पर हम कुछ महापुरुषों की ऐसे प्रेरक संदेशों को बता रहे हैं जो हर किसी का मनोबल बढ़ा सकते हैं।

स्टीफन हॉकिंग-

कोई भी व्यक्ति अगर शारीरिक रूप से अक्षम है तो वह मानसिक रूप से अक्षम नहीं हो सकता। वह हर तरीके से सामान्‍य होता है।

टी. कृष्णमाचार्य-

कोई भी जन्म से बुद्धिमान व शारीरिक रूप से सक्षम नहीं होता, यह दोनों चीजें व्‍यक्ति अपने प्रयासों से ही प्राप्त करता है।

स्कॉट हैमिल्टन-

हमारे जीवन में कठिन परिस्थितियां सफलता का रास्ता रोकने के लिए नहीं, बल्कि हमारे भीतर के साहस और शक्ति को बाहर लाने के लिए आती हैं।

देवदत्त पटनायक-

संसार के प्रवाह को स्वीकार करने से इंकार करना गलत है। जो है, उसे खुलकर स्‍वीकार्य करें, दुख खुद ही दूर हो जाएंगे।

जॉय रैमन-

मैंने अपने जीवन में यह सीखा है कि एथलीट्स विकलांग नहीं हैं, बल्कि अत्यधिक सक्षम हैं। पैरालिम्पिक ऐसी जगह है जहां पर ये हीरो आते हैं।

सैंडी फुशेल-

मनुष्‍य जीवन एक संतुलन पर टिका है। चूंकि मेरे पास एक ही पैर है, इसलिए मैं इसे अन्‍य लोगों से ज्‍यादा बेहतर तरीके से समझता हूं।

मैडम क्यूरी-

आशावादिता वह विश्वास है जो उपलब्धि की ओर ले जाता है। बिना आशा और हिम्मत के कुछ काम नहीं किया जा सकता।

शेन ई ब्रायन-

मैं विकलांग नहीं हूं। मेरे पास भगवार का दिया गया एक उपहार है, जिससे लोग विकलांगता के तौर पर देखते हैं, लेकिन मैं इसे एक चुनौती की तरह देखता हूं। यह मुझे मजबूत बनाती है।

टाइम्स नाउ नवभारत
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