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नाम में क्या रखा है- जीवन के कई गहरे सबक सिखाता है शेक्सपियर का ये एक कोट

William Shakespeare Quote: यह मशहूर कोट शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक ‘रोमियो एंड जूलियट’ के दूसरे एक्ट के दूसरे सीन में इस्तेमाल हुआ था। नाटक की रचना 1595-1596 के आसपास हुई थी। इस प्ले के मुताबिक जूलियट कैपुलेट परिवार की बेटी है, जो मोंटेग्यू परिवार के रोमियो से प्रेम करती है। दोनों परिवारों के बीच सदियों पुरानी दुश्मनी है।

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नाम में क्या रखा है: विलियम शेक्सपियर (Photo: AI Image)

William Shakespeare Motivational Quote: विलियम शेक्सपियर का मशहूर कोट है– नाम में क्या रखा है? जिसे हम गुलाब कहते हैं, वह किसी और नाम से भी उतना ही सुगंधित रहेगा (What's in a name? That which we call a rose, by any other name would smell as sweet)। यह कोट सदियों से लोगों की जुबान पर चढ़ा हुआ है। अकसर लोगों को हम ये कहते सुनते ही हैं कि आखिर नाम में क्या रखा है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि शेक्सपियर ने ये बात कब और क्यों कही थी? क्या है इस एक कोट के पीछे का भाव और इंसान के जीवन में इसका महत्व?

शेक्सपियर ने कब कहा कि 'नाम में क्या रखा है'

यह मशहूर कोट शेक्सपियर के प्रसिद्ध नाटक ‘रोमियो एंड जूलियट’ के दूसरे एक्ट के दूसरे सीन में इस्तेमाल हुआ था। नाटक की रचना 1595-1596 के आसपास हुई थी। इस प्ले के मुताबिक जूलियट कैपुलेट परिवार की बेटी है, जो मोंटेग्यू परिवार के रोमियो से प्रेम करती है। दोनों परिवारों के बीच सदियों पुरानी दुश्मनी है। बालकनी पर खड़ी जूलियट अपने मन की बात कहती है कि अगर रोमियो का नाम कुछ और होता तो क्या फर्क पड़ता? नाम तो सिर्फ एक लेबल है, व्यक्ति की असली पहचान उसकी आत्मा और गुणों में है।

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शेक्सपियर के नाटक रोमियो एंड जूलियट की प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo: AI Image)

शेक्सपियर ने क्यों कहा था- What is in a name

शेक्सपियर ने यह इसलिए लिखा ताकि सामाजिक बंधनों और नामों की वजह से होने वाले भेदभाव को मिटाया जा सके। शेक्सपियर यहां दर्शन की बात करते हैं। वह कहना चाहते थे कि नाम मनुष्य द्वारा बनाए गए हैं, वे चीजों की असली खुशबू या मूल्य नहीं बदल सकते। गुलाब का उदाहरण देकर वे कहते हैं कि लेबल बदलने से सार नहीं बदलता। रोमियो एंड जूलियट में यह दो परिवारों की दुश्मनी पर व्यंग्य है, जो सिर्फ नामों पर आधारित है। शेक्सपियर का इरादा था समाज को यह दिखाना कि पूर्वाग्रह और रूढ़ियां कितनी बेकार हैं।

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शेक्सपियर के मोटिवेशनल कोट्स (Photo: AI Image)

क्या सिखाता है शेक्सपियर का यह कोट

यह कोट जिंदगी के कई गहरे सबक सिखाता है। नाम जाति, धर्म, कुल या पदवी का प्रतीक होते हैं, लेकिन वे इंसान की क्षमता या चरित्र नहीं तय करते। आज के दौर में जहां लोग सरनेम से जज करते हैं, उन्हें समझना चाहिए इंसान का असली मूल्य उसके आचरण में है। फिलॉसफी में इसे ‘एसेंस बनाम एग्जिस्टेंस’ से जोड़ा जाता है। प्रेम, दोस्ती या करियर में शेक्सपियर का यह कोट सिखाता है कि लेबल्स को नजरअंदाज कर सार पर फोकस करो। जैसे कोई गरीब परिवार का बच्चा बड़ा वैज्ञानिक बन सकता है, नाम की परवाह किए बिना।

मौजूदा समय में यह कोट और भी रेलिवेंट है। शेक्सपियर का यह कथन हमें सिखाता है कि नाम बदल सकते हैं, लेकिन इंसान के गुण तो वही रहेंगे। इस कोट के संदेश को अपनाकर हम पूर्वाग्रह मुक्त समाज बना सकते हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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