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भारत के युवाओं की मानसिक सेहत क्यों गिर रही है, ग्लोबल मेंटल हेल्थ इंडेक्स मिला 60वीं रैंक, जानिए बड़ी वजह

​​​ग्लोबल मेंटल हेल्थ इंडेक्स में भारत के युवा 60वें स्थान पर रहे हैं। यह आंकड़ा सिर्फ एक रैंक नहीं, बल्कि बढ़ते तनाव, सोशल मीडिया दबाव, बेरोजगारी और अकेलेपन की गंभीर तस्वीर दिखाता है। जानिए रिपोर्ट में क्या खुलासा हुआ और क्यों युवाओं की मानसिक सेहत पर तुरंत ध्यान देना जरूरी है।

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भारतीय युवा क्यों हो रहे मानसिक रूप से कमजोर (Istock)

आज का युवा बाहर से जितना आत्मविश्वासी दिखता है, अंदर से उतना ही दबाव और चिंता झेल रहा है। हाल ही में जारी Global Mental Health Index में भारत के युवाओं को 60वीं रैंक मिली है। यह रैंकिंग बताती है कि मानसिक सेहत के मामले में हमारी स्थिति चिंताजनक है। सवाल यह है कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? क्या वजह है कि देश की युवा आबादी तनाव, एंग्जायटी और डिप्रेशन से जूझ रही है? आइए समझते हैं इस रिपोर्ट के अहम बिंदु।

भारत के युवाओं की मानसिक सेहत क्यों गिर रही है?

हाल ही में एक वैश्विक अध्ययन ने भारतीय युवाओं की मानसिक सेहत के मामले में चिंता का एक नया संकेत दिया है। अमेरिका के सैपियन लैब्स द्वारा जारी ग्लोबल माइंड हेल्थ 2025 रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत के युवा वयस्कों ने मानसिक स्वास्थ्य के लिए केवल 33 अंक प्राप्त किए हैं, जो कि 84 देशों में 60वां स्थान है। यह रैंकिंग न केवल व्यक्तिगत स्तर पर, बल्कि समाज के लिए भी गंभीर संकेत है। इस लेख में हम इस गिरावट के पीछे के कुछ प्रमुख कारणों पर चर्चा करेंगे।

MHQ क्या है?

MHQ, यानी माइंड हेल्थ कोटिएंट, मानसिक कार्यक्षमता का एक व्यापक माप है। यह 47 संकेतकों को शामिल करता है, जिनमें भावनात्मक नियंत्रण, ध्यान, तनाव सहनशीलता, और संबंध स्थिरता शामिल हैं। एक कम स्कोर यह दर्शाता है कि व्यक्ति जीवन की चुनौतियों का सामना करने में सक्षम नहीं है।

युवाओं और बुजुर्गों के बीच का अंतर

रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि 55 वर्ष से ऊपर के भारतीयों ने 96 अंक प्राप्त किए हैं, जो उन्हें वैश्विक स्तर पर 49वां स्थान दिलाता है। यह स्पष्ट है कि बुजुर्ग पीढ़ी मानसिक कौशल में युवाओं की तुलना में कहीं अधिक सक्षम है, जो कि एक तीन गुना अंतर को दर्शाता है।

मानसिक स्वास्थ्य का महत्व

मानसिक स्वास्थ्य केवल मूड से संबंधित नहीं है; यह जीवन के परिणामों पर भी प्रभाव डालता है। जब युवा अपने भावनाओं को नियंत्रित करने, स्थिर संबंध बनाने, और ध्यान बनाए रखने में असमर्थ होते हैं, तो इसके परिणाम गंभीर होते हैं। इससे कार्यक्षमता में कमी, सामाजिक संबंधों में दरार, और व्यक्तिगत जीवन में तनाव बढ़ता है।

आधुनिक दबावों का प्रभाव

इस गिरावट के पीछे कई कारण हो सकते हैं। पहला, स्मार्टफोन का जल्दी उपयोग। भारतीय युवा औसतन 16.5 वर्ष की आयु में स्मार्टफोन का उपयोग शुरू करते हैं, जो उनके ध्यान और सामाजिक इंटरैक्शन को प्रभावित करता है। दूसरा, प्रोसेस्ड आहार का बढ़ता उपयोग, जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है। तीसरा, परिवारों में कमजोर संबंध, जिससे युवाओं में अकेलापन और भावनात्मक संकट बढ़ता है।

ग्लोबल पैटर्न, लेकिन भारत में विशेष रूप से चिंताजनक

यह समस्या केवल भारत में नहीं है; दुनिया भर में युवा वयस्कों की मानसिक सेहत में गिरावट आई है। लेकिन भारत में यह विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि यहां की युवा पीढ़ी आधुनिक जीवनशैली के कारण अधिक प्रभावित हो रही है।

निष्कर्ष

60वां स्थान केवल एक संख्या नहीं है, बल्कि यह एक पीढ़ी की तस्वीर है जो संघर्ष कर रही है। इसे सुलझाने के लिए परिवारों, स्कूलों, कार्यस्थलों, और नीति निर्माताओं से सामूहिक प्रयास की आवश्यकता है, ताकि यह न केवल एक वादा बने, बल्कि वास्तविकता भी बने।
Vineet
विनीतauthor

विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विषयों पर गहरी समझ है। इन्होंने हेल्थ, फिटनेस, न्यूट्रिशन और सप्लीमेंट के फील्ड में प्रोफेशनल सर्टिफिकेशन भी किए हैं। वे 6 साल से इस फील्ड से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर 7,000 से अधिक लेख लिख चुके हैं। विनीत की खासियत उनकी रिसर्च-बेस्ड लेखन शैली और जनहित को ध्यान में रखते हुए लिखी गई जानकारीपूर्ण स्टोरीज हैं।

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