World Bicycle Day: दिल्ली समेत देश के कई बड़े शहर आज दो बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहे हैं - बढ़ता वायु प्रदूषण और सड़कों पर लगातार बढ़ता ट्रैफिक। रोजाना घंटों जाम में फंसना और खराब हवा में सांस लेना अब लोगों की जिंदगी का हिस्सा बनता जा रहा है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि समाधान सिर्फ नई सड़कें बनाने या ज्यादा वाहन खरीदने में नहीं, बल्कि साइकिल जैसे सरल, सस्ते और पर्यावरण के अनुकूल साधनों को बढ़ावा देने में भी छिपा है।
विश्व साइकिल दिवस के अवसर पर इंडिया इंटरनेशनल सेंटर (IIC) में आयोजित एक राष्ट्रीय सेमिनार में इसी विषय पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम में देश और विदेश के कई विशेषज्ञों, सरकारी अधिकारियों और शहरी परिवहन से जुड़े लोगों ने हिस्सा लिया। सभी ने इस बात पर जोर दिया कि साइकिलिंग भारत के शहरों को अधिक स्वच्छ, स्वस्थ और रहने योग्य बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
बढ़ती आबादी के साथ बढ़ रही हैं चुनौतियां
कार्यक्रम की शुरुआत में इंडिया इंटरनेशनल सेंटर के निदेशक और पूर्व नागरिक उड्डयन सचिव के.एन. श्रीवास्तव ने कहा कि शहरों की आबादी तेजी से बढ़ रही है। इसके साथ ही ट्रैफिक, प्रदूषण और परिवहन से जुड़ी समस्याएं भी बढ़ती जा रही हैं। उनका कहना था कि अब समय आ गया है कि पर्यावरण के अनुकूल यात्रा के साधनों को गंभीरता से अपनाया जाए।

दुनिया के कई शहरों में सफल रहा साइकिलिंग मॉडल
दुनिया के कई शहरों में सफल रहा साइकिलिंग मॉडल
वर्ल्ड साइक्लिंग एलायंस के अध्यक्ष सर ग्राहम वॉटसन ने बताया कि दुनिया के कई देशों ने साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए सुरक्षित साइकिल लेन और बेहतर सुविधाएं विकसित की हैं। जहां लोगों को सुरक्षित माहौल मिला, वहां साइकिल का उपयोग भी तेजी से बढ़ा। उन्होंने कहा कि साइकिल सिर्फ एक वाहन नहीं है, बल्कि प्रदूषण और ट्रैफिक जैसी समस्याओं को कम करने का प्रभावी उपाय भी है।
सेहत और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार
यूरोपियन साइक्लिस्ट फेडरेशन की मुख्य कार्यकारी अधिकारी लॉरिएन क्रिड ने कहा कि यूरोप के कई शहरों ने वर्षों पहले साइकिल को अपनी परिवहन व्यवस्था का अहम हिस्सा बना लिया था। इसका फायदा आज साफ दिखाई देता है। इससे न केवल प्रदूषण कम हुआ, बल्कि लोगों की फिटनेस, सक्रियता और जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला।
छोटी दूरी के लिए साइकिल है बेहतर विकल्प
स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) के उप महानिदेशक मयंक श्रीवास्तव ने कहा कि साइकिलिंग एक आसान और असरदार शारीरिक गतिविधि है। अगर लोग घर, बाजार, स्कूल या ऑफिस जैसी छोटी दूरी तय करने के लिए साइकिल का इस्तेमाल करें, तो इससे शरीर को सक्रिय रखने में मदद मिल सकती है। साथ ही ईंधन पर होने वाला खर्च भी कम हो सकता है।
क्यों जरूरी है राष्ट्रीय साइकिलिंग नीति
सेमिनार में प्रस्तावित राष्ट्रीय साइकिलिंग नीति पर भी चर्चा हुई। स्मार्टबाइक के अध्यक्ष डी.वी. मनोहर ने कहा कि भारत जैसे बड़े देश में साइकिलिंग को बढ़ावा देने के लिए स्पष्ट और लंबी अवधि की योजना की जरूरत है। उनका सुझाव था कि साइकिल को बस, मेट्रो और अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाओं से जोड़ा जाए, ताकि लोगों की यात्रा और आसान हो सके।
पब्लिक बाइक शेयरिंग की बढ़ रही लोकप्रियता
कार्यक्रम में साझा किए गए आंकड़ों के अनुसार, पब्लिक बाइक शेयरिंग सेवाओं का उपयोग करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है। लाखों लोग इन सेवाओं का फायदा उठा चुके हैं। इससे लोगों को कम खर्च में यात्रा का विकल्प मिला है और वाहनों से होने वाले प्रदूषण को कम करने में भी मदद मिली है।
सिर्फ पर्यावरण नहीं जेब के लिए भी फायदेमंद
विशेषज्ञों का मानना है कि साइकिलिंग के फायदे सिर्फ पर्यावरण तक सीमित नहीं हैं। यह एक किफायती यात्रा साधन है, जिससे ईंधन का खर्च बचता है। साथ ही सड़कों पर वाहनों का दबाव कम हो सकता है और शहरों में आवाजाही आसान बन सकती है। हालांकि इसके लिए सुरक्षित साइकिल ट्रैक, बेहतर बुनियादी सुविधाएं और लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है।
भविष्य के शहरों के लिए जरूरी कदम
सेमिनार से एक बात साफ निकलकर सामने आई कि यदि भारत अपने शहरों को आने वाले वर्षों के लिए बेहतर बनाना चाहता है, तो साइकिल को फिर से सड़कों पर सम्मानजनक स्थान देना होगा। साफ हवा, कम ट्रैफिक, कम खर्च और बेहतर जीवनशैली जैसे कई फायदे साइकिलिंग से जुड़े हैं। शायद यही वजह है कि दुनिया के कई शहर आज फिर से साइकिल को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत के लिए भी यह बदलाव एक सकारात्मक शुरुआत साबित हो सकता है।
