Monsoon Slip And Fall Health Risk: बारिश का मौसम हर किसी को अच्छा लगता है, लेकिन यही मौसम कई बार अपने साथ बड़ी परेशानी भी लेकर आता है। इन दिनों गीली सड़कें, काई जमे फुटपाथ, फिसलन वाली सीढ़ियां और पानी से भरे गड्ढे किसी भी व्यक्ति का संतुलन बिगाड़ सकते हैं। अक्सर लोग फिसलकर गिरने के बाद सोचते हैं कि बस हल्की चोट लगी है और कुछ देर में सब ठीक हो जाएगा। लेकिन डॉक्टरों का कहना है कि हर गिरना इतना मामूली नहीं होता। कई बार एक पल की फिसलन हड्डी टूटने, जोड़ों में गंभीर चोट, रीढ़ की समस्या या सिर में ऐसी चोट की वजह बन जाती है, जिसका असर कई महीनों तक रहता है। इसलिए बारिश में हुई किसी भी गिरावट को हल्के में लेना सही नहीं है। समय पर पहचान और सही इलाज आपको बड़ी परेशानी से बचा सकता है।
बारिश में गिरना क्यों बन जाता है बड़ा हादसा
अमृता हॉस्पिटल, फरीदाबाद के ऑर्थोपेडिक्स और स्पाइन सर्जरी विभाग के कंसल्टेंट एवं असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. अर्चित गोयल बताते हैं कि बारिश में सड़कें, फुटपाथ, सीढ़ियां और टाइल्स बेहद फिसलन भरी हो जाती हैं। ऐसे में संतुलन बिगड़ते ही शरीर का पूरा वजन अचानक टखने, घुटने, कलाई, कूल्हे या कमर पर पड़ सकता है। इसी वजह से कई बार छोटी दिखने वाली गिरावट भी गंभीर चोट में बदल जाती है।
वहीं यशोदा हॉस्पिटल्स के सीनियर कंसल्टेंट ऑर्थोपेडिक सर्जन डॉ. अभिषेक बारली कहते हैं कि बारिश के मौसम में बच्चे, बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं और जिन लोगों को संतुलन बनाने में दिक्कत होती है, उन्हें सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। मुंबई के एक बड़े ट्रॉमा सेंटर में हुए अध्ययन में भी पाया गया कि जून, जुलाई और अगस्त के दौरान सड़क हादसों के बाद फिसलकर गिरने के मामलों में सबसे ज्यादा बढ़ोतरी देखने को मिलती है।

डॉक्टर क्यों मानते हैं इसे रिस्की
शरीर के कई हिस्सों को हो सकता है नुकसान
डॉ. अर्चित गोयल बताते हैं कि गिरते समय लोग खुद को बचाने के लिए अक्सर हाथ आगे कर देते हैं। ऐसे में पूरा वजन कलाई पर आ जाता है, जिससे हड्डी टूट सकती है। कई बार घुटने या टखने के अंदर मौजूद मजबूत ऊतक (लिगामेंट) भी फट सकते हैं। खास बात यह है कि शुरुआत में एक्स-रे सामान्य आने पर भी अंदरूनी चोट हो सकती है।
डॉ. अभिषेक बारली के अनुसार, अगर गिरते समय सिर किसी कठोर सतह से टकरा जाए तो मस्तिष्क को भी चोट लग सकती है। वहीं कमर या रीढ़ पर तेज झटका लगने से लंबे समय तक दर्द बना रह सकता है। इसलिए गिरने के बाद सिर्फ बाहर दिख रही चोट देखकर राहत महसूस नहीं करनी चाहिए।
बुजुर्गों के लिए क्यों बढ़ जाता है खतरा
बढ़ती उम्र के साथ हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। ऐसे में मामूली फिसलन भी कूल्हे, कलाई या रीढ़ की हड्डी तोड़ सकती है। डॉ. अर्चित गोयल बताते हैं कि कूल्हे की हड्डी टूटने के बाद कई मरीजों को ऑपरेशन कराना पड़ता है और लंबे समय तक बिस्तर पर रहना पड़ता है। इससे शरीर में संक्रमण, खून के थक्के बनने और रोजमर्रा के काम करने में परेशानी जैसी दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं। भारत में हुए कई अध्ययनों में भी बुजुर्गों में गिरने के बाद फ्रैक्चर और विकलांगता का खतरा ज्यादा पाया गया है।

फिसलन से गिर जाएं तो ये रखें ध्यान
गिरने के बाद इन संकेतों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
डॉ. अभिषेक बारली के अनुसार, अगर बारिश में गिरने के बाद नीचे दिए गए लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से जांच करानी चाहिए।
- तेज दर्द हो और खड़े होने या चलने में परेशानी हो।
- हाथ, पैर या किसी जोड़ में तेजी से सूजन बढ़ने लगे।
- शरीर का कोई हिस्सा टेढ़ा दिखाई दे या हड्डी टूटने का शक हो।
- सिर लगने के बाद बेहोशी, उल्टी, लगातार सिरदर्द या भ्रम महसूस हो।
- गर्दन या कमर के दर्द के साथ हाथ-पैरों में सुन्नपन या कमजोरी महसूस हो।
- बार-बार चक्कर आए या गिरने के बाद दोबारा संतुलन बनाने में दिक्कत हो।
डॉ. गोयल कहते हैं कि कई बार व्यक्ति गिरने के तुरंत बाद चल-फिर लेता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि अंदर कोई चोट नहीं है। इसलिए मालिश करना, दर्द सहकर चलते रहना या घरेलू इलाज पर भरोसा करना सही नहीं है।
बारिश में ये छोटी सावधानियां आपको बड़ी चोट से बचा सकती हैं
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल दुनिया में करीब 3.73 करोड़ लोग ऐसे गिरने का शिकार होते हैं, जिनमें इलाज की जरूरत पड़ती है। इसलिए बारिश के मौसम में कुछ आसान आदतें अपनाना बेहद जरूरी है।
- अच्छी पकड़ (ग्रिप) वाले जूते या चप्पल पहनें।
- गीले फर्श, सीढ़ियों और ढलान पर धीरे-धीरे चलें।
- जहां रेलिंग हो, उसका सहारा जरूर लें।
- चलते समय मोबाइल देखने से बचें।
- घर के प्रवेश द्वार और बाथरूम का फर्श सूखा रखें।
- कम रोशनी या बारिश के दौरान रास्ता देखकर ही चलें।
डॉ. अर्चित गोयल और डॉ. अभिषेक बारली का कहना है कि बारिश में फिसलकर गिरना सिर्फ कुछ सेकंड का हादसा लगता है, लेकिन कई लोगों के लिए यही कुछ सेकंड महीनों के इलाज, ऑपरेशन और लंबी रिकवरी की वजह बन जाते हैं। इसलिए बारिश का आनंद जरूर लें, लेकिन हर कदम संभलकर रखें।
