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मार्शल आर्ट से पद्मश्री तक का सफर, जानें कौन हैं PM मोदी को दंडवत करने वाले मार्शल आर्ट गुरू पजानिवेल

Padma Shri K Pajanivel: पद्मश्री से सम्मानित मार्शल आर्ट गुरू पजानिवेल ने सम्मान लेने से पहले पीएम मोदी को दंडवत प्रणाम किया। इस नजारे ने लोगों को अपनी ओर खींच लिया। आइए जानते हैं कौन हैं ये मार्शल आर्ट गुरू।

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मार्शल आर्ट गुरू के. पजानिवेल (Image - Instagram)

Padma Shri K Pajanivel: राष्ट्रपति भवन में आयोजित पद्म पुरस्कार समारोह (Padma Shri 2026) के दौरान एक ऐसा भावुक दृश्य देखने को मिला, जिसने हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। जैसे ही मार्शल आर्ट गुरू पजानिवेल को पद्मश्री सम्मान देने के लिए मंच पर बुलाया गया, उन्होंने सम्मान ग्रहण करने से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दंडवत प्रणाम किया। उनका यह विनम्र भाव सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया और लोग जानना चाहने लगे कि आखिर यह साधारण से दिखने वाले मार्शल आर्ट गुरू कौन हैं। यदि आप भी इनके बारे में जानने के उत्सुक हैं, तो आगे पढ़ें पूरा लेख।

कौन हैं मार्शल आर्ट गुरू पजानिवेल

30 जनवरी 1973 को पुडुचेरी के पूरनंकुप्पम में जन्मे पजानिवेल का बचपन बेहद साधारण माहौल में गुरजा है। बचपन से ही पारंपरिक युद्ध कला की ओर उनका झुकाव था। उन्होंने प्रसिद्ध गुरु मास्टर राजाराम के मार्गदर्शन में दक्षिण भारत की प्राचीन मार्शल आर्ट 'सिलंबम' का प्रशिक्षण लेना शुरू किया। यही सिलंबम आगे चलकर उनकी पहचान बना और उन्हें देश के प्रतिष्ठित पद्मश्री सम्मान तक ले गया।

मार्शल आर्ट परंपरा का संरक्षण

मार्शल आर्ट गुरू पजानिवेल दक्षिण भारत की पारंपरिक युद्ध कला के जाने-माने प्रशिक्षक माने जाते हैं। उन्होंने वर्षों तक भारतीय पारंपरिक मार्शल आर्ट को जीवित रखने और नई पीढ़ी तक पहुंचाने का काम किया है। जहां आधुनिक खेलों और विदेशी मार्शल आर्ट का प्रभाव तेजी से बढ़ा, वहीं पजानिवेल ने भारतीय संस्कृति से जुड़ी इस प्राचीन विद्या को अपनी पहचान बनाया।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो उन्होंने ग्रामीण इलाकों में रहकर युवाओं को आत्मरक्षा और अनुशासन का प्रशिक्षण दिया है। उनका मानना रहा है कि मार्शल आर्ट केवल लड़ाई की कला नहीं है बल्कि यह हमारे शरीर और मन को संतुलित रखने का भी माध्यम है।

पद्मश्री सम्मान से बढ़ा मान

देश की पारंपरिक कला का संरक्षण करने के लिए पजानिवेल को भारत सरकार द्वारा पद्मश्री सम्मान देश सम्मानित किया गया है। यह देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मानों में गिना जाता है। यह सम्मान उनके व्यक्तिगत संघर्ष की जीत के अलावा उन लोक कलाओं और पारंपरिक खेलों की भी पहचान है, जो अक्सर मुख्यधारा से दूर रह जाते हैं।

पुरस्कार वितरण समारोह के दौरान उनका विनम्र व्यवहार लोगों को बेहद पसंद आ रहा है। देश के बड़े मंच पर प्रधानमंत्री को दंडवत प्रणाम करने का उनका अंदाज भारतीय संस्कारों और गुरु-शिष्य परंपरा की झलक को दिखाता है।

इससे पहले भी मिले कई पुरस्कार

पारंपरिक मार्शल आर्ट के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए के. पजानिवेल को कई प्रतिष्ठित सम्मानों से नवाजा जा चुका है। साल 2023 में उन्हें मार्शल आर्ट्स के लिए संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया। इससे पहले 2012 में पुडुचेरी सरकार द्वारा उन्हें 'कलाइमामणि पुरस्कार' से सम्मानित किया गया। इसके अलावा साल 2004 में नेहरू युवा केंद्र ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ युवा पुरस्कार से सम्मानित किया था। साल 2002 में मिला ‘सिलंबम इंटरनेशनल अवॉर्ड’ उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते प्रभाव और पारंपरिक युद्ध कला के प्रति समर्पण का साफ प्रमाण है।

gulshan kumar
गुलशन कुमार author

गुलशन कुमार टाइम्स नाउ हिंदी डिजिटल के हेल्थ सेक्शन से जुड़े हैं। फिटनेस और योग के प्रति उनकी रुचि उन्हें हेल्थ जर्नलिज्म की ओर लेकर आई, जहां वे आम लो... और देखें

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