Sandwich Generation: 40 की उम्र पार करते-करते जिंदगी का गणित बदलने लगता है। करियर अपने पीक पर होता है। बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की चिंता बढ़ जाती है। दूसरी तरफ बुजुर्ग होते माता-पिता की जिम्मेदारियां भी कंधों पर आ जाती हैं। इसी दौर में बहुत से लोग महसूस करते हैं कि उनके दोस्तों का दायरा पहले जैसा नहीं रहा। कॉलेज और जवानी के दिनों की दोस्तियां धीरे-धीरे छूटने लगती हैं और मुलाकातें भी कम हो जाती हैं। इस दौर के लोगों को सोशल मीडिया 'सैंडविच जनरेशन' कहता है।
उम्र में 40 साल की दहलीज पार कर चुके इंसान की जिंदगी किसी सैंडविच सरीखी ही हो जाती है। दरअसल वह दो पीढ़ियों के बीच फंसा होता है। उसे अपने बच्चों को भी देखना है और मां-बाप की जिम्मेदारियां भी उठानी है। वो इन जिम्मेदारियों में इतना उलझ चुका रहता है कि पुराने यार दोस्त सब दूर होते जाते हैं। लेकिन ऐसा होता क्यों है। आइए कोशिश करते हैं समझने की:
समय नहीं बचता
सैंडविच जेरनेशन के पास समय की बड़ी किल्लत होती है। सुबह दफ्तर, शाम को बच्चों की जिम्मेदारियां और बीच-बीच में माता-पिता की डॉक्टर विजिट, दवाइयां और उनकी देखभाल। ऐसे में दोस्तों के लिये समय निकालने की गुंजाइश कम होती जाती है। धीरे-धीरे दोस्ती प्राथमिकताओं की सूची में नीचे खिसकने लगती है।
दोस्त कम नहीं होते, दूर हो जाते हैं
40 के बाद दोस्तियां टूटती कम हैं, बदल ज्यादा जाती हैं। पहले जिन दोस्तों से रोज बातें होती थीं, अब उनसे महीने या साल में एक-दो बार बात होती है। इसका मतलब यह नहीं कि स्नेह खत्म हो गया है। बस जिंदगी का ढांचा बदल गया है। लोग अब दोस्ती में संख्या नहीं, गुणवत्ता तलाशते हैं। दस दोस्तों के बजाय दो या तीन ऐसे दोस्त ज्यादा जरूरी लगते हैं, जिनसे बिना किसी औपचारिकता के बात की जा सके।
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दिमागी तौर पर थक जाते हैं ये लोग
सैंडविच जनरेशन के लोग मानसिक रूप से थके हुए रहते हैं। वे बच्चों के भविष्य और माता-पिता के स्वास्थ्य को लेकर लगातार चिंतित रहते हैं। कई बार आर्थिक दबाव भी बढ़ जाता है। ऐसे में सामाजिक मेलजोल के लिए ऊर्जा बचती ही नहीं। शोध बताते हैं कि इस पीढ़ी के लोग समय के दबाव और भावनात्मक तनाव को ज्यादा महसूस करते हैं।
प्राथमिकताएं बदलने लगती हैं
20 और 30 की उम्र में दोस्त हमारी दुनिया का बड़ा हिस्सा होते हैं। लेकिन 40 के बाद परिवार, स्वास्थ्य और आर्थिक स्थिरता ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाते हैं। लोग अपने सीमित खाली समय को भी परिवार के साथ बिताना पसंद करते हैं। यही वजह है कि कई पुरानी दोस्तियां धीरे-धीरे निष्क्रिय हो जाती हैं।
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क्या उम्र के इस पड़ाव पर कम हो जाती है दोस्ती की अहमियत?
विशेषज्ञ मानते हैं कि जिम्मेदारियों से घिरे इस उम्र में दोस्त पहले से ज्यादा जरूरी हो जाते हैं। दोस्त तनाव कम करने, इमोशनल सपोर्ट देने और अकेलेपन को दूर करने में बड़ी भूमिका निभाता है। इसलिए एक्सपर्ट्स सलाह देते हैं कि चाहे जिंदगी कितनी भी व्यस्त क्यों न हो, पुराने दोस्तों से संपर्क बनाए रखने की कोशिश करनी चाहिए।
तो अगर आप 40 की उम्र पार कर गए हैं तो याद रखें कि सैंडविच जनरेशन की जिम्मेदारी खुद को भी खोने से बचाना है और इसमें दोस्त सबसे ज्यादा मददगार साबित होते हैं।
