Gardening Tips: गर्मी का मौसम आते ही कई लोगों की शिकायत शुरू हो जाती है कि उनके गुड़हल, मोगरा या गुलाब के पौधों में फूल कम आने लगे हैं। पौधे हरे तो दिखाई देते हैं, लेकिन नई कलियां बनने की रफ्तार धीमी हो जाती है। ऐसे में लोग बाजार से महंगे फर्टिलाइजर खरीदते हैं, जबकि कई बार समाधान आपकी रसोई में ही मौजूद होता है।
दालचीनी एक ऐसा मसाला है जिसे आमतौर पर चाय, मिठाइयों और खाने का स्वाद बढ़ाने के लिए इस्तेमाल किया जाता है। लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि छोटी लकड़ी जैसे दिखने वाली यही दालचीनी पौधों के लिए भी किसी नेचुरल टॉनिक से कम नहीं है। खासकर गुड़हल, मोगरा, चमेली और गुलाब जैसे फूलों वाले पौधों के लिए यह काफी फायदेमंद मानी जाती है।
आखिर पौधों के लिए दालचीनी क्यों है खास
दालचीनी में प्राकृतिक एंटीफंगल और एंटीबैक्टीरियल गुण पाए जाते हैं। यही वजह है कि यह मिट्टी में पनपने वाले कई हानिकारक फंगस और बैक्टीरिया को नियंत्रित करने में मदद करती है। जब मिट्टी स्वस्थ रहती है तो पौधों की जड़ें बेहतर तरीके से पोषक तत्वों को अवशोषित कर पाती हैं। इसका सीधा असर पौधे की ग्रोथ और फ्लावरिंग पर दिखाई देता है।
इसके अलावा दालचीनी की तेज खुशबू कई छोटे कीड़ों और चींटियों को भी दूर रखने में मदद करती है। गर्मियों में जब कीटों की समस्या बढ़ जाती है, तब यह घरेलू उपाय काफी काम आ सकता है।
गुड़हल की मिट्टी में कैसे करें इस्तेमाल
अगर आपके पास दालचीनी की लकड़ी है तो उसका एक छोटा टुकड़ा लेकर हल्का-सा कूट लें। अब इसे गुड़हल के गमले की ऊपरी मिट्टी में दबा दें। पानी देने पर इसके गुण धीरे-धीरे मिट्टी में मिलते रहेंगे।
आप चाहें तो दालचीनी का पाउडर भी इस्तेमाल कर सकते हैं। आधा चम्मच दालचीनी पाउडर को मिट्टी की ऊपरी परत में मिलाकर हल्की गुड़ाई कर दें। इसके बाद सामान्य रूप से पानी दें।
चायपत्ती के साथ बढ़ जाता है असर
दालचीनी का असर और बेहतर बनाने के लिए इसमें चायपत्ती का इस्तेमाल भी किया जा सकता है। एक छोटा चम्मच ताजी चायपत्ती और एक इंच दालचीनी के टुकड़े को एक गिलास पानी में 24 घंटे के लिए भिगो दें। अगले दिन इसे छानकर तीन से चार गुना सादा पानी मिला लें।
इस घोल को सप्ताह में एक बार पौधों की जड़ों में डालें। यह मिश्रण मिट्टी को पोषण देने के साथ-साथ उसे स्वस्थ बनाए रखने में भी मदद करता है।
किन पौधों पर मिलता है सबसे अच्छा परिणाम
यह घरेलू फर्टिलाइजर सिर्फ गुड़हल तक सीमित नहीं है। मोगरा, चमेली, गुलाब, गेंदा और अन्य फूलों वाले पौधों पर भी इसका अच्छा असर देखने को मिल सकता है। नियमित इस्तेमाल से पौधों की पत्तियां ज्यादा हरी दिखाई देती हैं और नई कलियां बनने की प्रक्रिया तेज हो सकती है।
ध्यान रखने वाली जरूरी बातें
किसी भी घरेलू फर्टिलाइजर का इस्तेमाल संतुलित मात्रा में ही करना चाहिए। बहुत ज्यादा दालचीनी या अत्यधिक सांद्र घोल पौधों के लिए नुकसानदायक भी हो सकता है। सप्ताह में एक बार इसका उपयोग पर्याप्त माना जाता है। साथ ही पौधों को पर्याप्त धूप और सही मात्रा में पानी मिलना भी जरूरी है।
अगर आपके गुड़हल के पौधे में लंबे समय से फूल नहीं आ रहे हैं, तो दालचीनी और चायपत्ती का यह आसान घरेलू उपाय एक बार जरूर आजमाकर देखें। कई गार्डनिंग प्रेमियों के अनुसार यह पौधों की सेहत सुधारने और फ्लावरिंग बढ़ाने में मददगार साबित हो सकता है।
