Soft Wellness: आज फिट रहने के लिए लोग स्ट्रिक रूटीन फॉलो करते हैं। सुबह 5 बजे से पहले उठना, जिम में पसीना बहाना, उबला हुआ खाना खाना और हर समय खुद को बेहतर बनाने के तनाव में रहना, ऐसे लोगों का डेली रूटीन बन चुका है। इसके ठीक उलट एक नया फिटनेस ट्रेंड तेजी से फैल रहा है। इसे सॉफ्ट वेलनेस का नाम दिया गया है।
क्या है यह सॉफ्ट वेलनेस?
सरल शब्दों में कहें तो सॉफ्ट वेलनेस का मतलब है बिना किसी कड़ी मेहनत या दबाव के अपनी सेहत का ख्याल रखना। यह ट्रेंड हमें सिखाता है कि अच्छी सेहत पाने के लिए खुद को सजा देना या शरीर पर अत्याचार करना बिल्कुल जरूरी नहीं है।
जहां ट्रेडिशनल वेलनेस आपको हर दिन शत प्रतिशत देने और खुद को पुश करने के लिए कहती है, वहीं सॉफ्ट वेलनेस कहती है कि अगर आज शरीर थका है तो कोई बात नहीं..10 मिनट टहल लो या बस गहरी सांसें लेकर आराम कर लो। यह मानसिक शांति, आराम और सेल्फ कम्पैशन को फिटनेस जितना ही जरूरी मानती है।
हार्डकोर वेलनेस से क्यों ऊब रहे हैं लोग?
एक्सपर्ट्स की मानें तो पिछले कुछ सालों में लोग वेलनेस बर्नआउट का शिकार हुए हैं। सोशल मीडिया पर परफेक्ट बॉडी, सख्त डाइट प्लान और तड़के 4 बजे उठने के ट्रेंड्स ने लोगों में यह अपराधबोध भर दिया था कि अगर वे ऐसा नहीं कर रहे, तो वे आलसी हैं।
सॉफ्ट वेलनेस इसी मानसिक बोझ को उतारने का जरिया है। एक्सपर्ट्स का मानना है कि जो बदलाव हम खुशी-खुशी और बिना किसी दबाव के अपनी रोजमर्रा की जिंदगी में लाते हैं, वे लंबे समय तक टिकते हैं।
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सॉफ्ट वेलनेस को कैसे अपनाएं?
इसे अपनी जिंदगी का हिस्सा बनाना बेहद आसान है। जानिए इसके लिए आपको क्या करना है -
- धीमी शुरुआत करें: अगर जिम जाने का मन नहीं है, तो जबरदस्ती करने के बजाय हल्की स्ट्रेचिंग करें, बालकनी में टहलें या पसंदीदा गानों पर थोड़ा डांस कर लें।
- नींद को दें प्राथमिकता: रात देर तक जागकर वर्कआउट का शेड्यूल बनाने से बेहतर है कि आप 7-8 घंटे की सुकून भरी नींद लें।
- खुद से प्यार से बात करें: अगर किसी दिन डाइट टूट जाए या आप कसरत न कर पाएं, तो खुद को कोसने के बजाय स्वीकार करें कि आराम करना भी सेहत का ही एक हिस्सा है।
- माइंडफुलनेस अपनाएं: दिन में कुछ मिनट बिना फोन के बैठें, ताजी हवा का आनंद लें और अपने मन को शांत रखें।
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कुल मिलाक सॉफ्ट वेलनेस ट्रेंड का संदेश यही है कि फिटनेस कोई दौड़ या प्रतियोगिता नहीं है, जिसे जीतकर किसी को साबित करना हो। यह आपकी अपनी जीवनशैली है। असली फिटनेस वही है जो आपको भीतर से खुशी, शांति और ऊर्जा दे..न कि तनाव और थकान।
