Permissive Parenting Style: पेरेंटिंग की दुनिया जितनी महत्वपूर्ण है उतनी ही विशाल भी है। अपने बच्चों का भविष्य संवारने के लिए पेरेंट्स तरह-तरह के पेरेंटिंग स्टाइल आजमाते हैं। कोई एलिफेंट पेरेंटिंग की राह चुनता है तो किसी तो पांडा पेरेंटिंग रास आता है। बहुत से माता-पिता परमिसिव पेरेंटिंग पर जोर देते हैं। भारत में भी सबसे ज्यादा पॉपुलर पेरेंटिंग स्टाइल यही है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि परमिसिव पेरेंटिंग क्या है और बच्चों पर इसका कैसा असर पड़ता है। इस आर्टिकल में हम यही समझने की कोशिश करेंगे।
परमिसिव पेरेंटिंग क्या होती है ( What is Permissive Parenting)
परमिसिव पेरेंटिंग बच्चों के परवरिश की वह शैली है, जिसमें माता-पिता बच्चों के प्रति बेहद प्यार और नरम रवैया रखते हैं। इसमें नियम और सख्ती बहुत कम होती है, जबकि बच्चों को अपनी पसंद और फैसले लेने की आजादी ज्यादा दी जाती है। ऐसे माता-पिता बच्चों पर नियंत्रण करने के बजाय उन्हें समझने और सपोर्ट करने पर ध्यान देते हैं।
कैसे होती है परमिसिव पेरेंटिंग (Permissive Parenting Characteristics)
इस पेरेंटिंग स्टाइल में माता-पिता बच्चों के दोस्त की तरह व्यवहार करते हैं। वे बच्चों की बात ध्यान से सुनते हैं, उनकी भावनाओं को महत्व देते हैं और उन्हें अपनी बात रखने का पूरा मौका देते हैं। यहां सजा या डांट की जगह समझाने और बातचीत का तरीका अपनाया जाता है।
बच्चों के लिए कितनी सही है परमिसिव पेरेंटिंग (Permissive Parenting effects on child)
परमिसिव पेरंटिंग के काफी फायदे हैं। शायद इसीलिए बड़ी संख्या में पेरेंट्स इसी स्टाइल को अपनाते हैं। आइए जानते हैं कि बच्चों के लिए कितनी बेहतर है परमिसिव पेरेंटिंग:
कॉन्फिडेंस बढ़ता है
जब बच्चों को अपनी बात रखने और फैसले लेने की आजादी मिलती है, तो उनका आत्मविश्वास मजबूत होता है। वे बिना डर के अपनी सोच व्यक्त करना सीखते हैं।
आती है क्रिएटिविटी
कम नियमों के कारण बच्चे अपनी कल्पना और रचनात्मकता को खुलकर विकसित कर पाते हैं। वे नए-नए तरीके से चीजों को समझने और सीखने लगते हैं।
पेरेंट्स संग मजबूत बॉन्डिंग
इस पेरेंटिंग स्टाइल में बच्चों और माता-पिता के बीच खुलापन रहता है। इससे दोनों के बीच भरोसा और भावनात्मक जुड़ाव मजबूत होता है।
स्ट्रेस से रहते हैं दूर
बच्चों पर ज्यादा दबाव नहीं होता, जिससे वे मानसिक रूप से ज्यादा खुश और शांत रहते हैं। उन्हें डर या सजा का तनाव नहीं झेलना पड़ता।
परमिसिव पेरेंटिंग में ध्यान रखने वाली बातें
हालांकि परमिसिव पेरेंटिंग के कई फायदे हैं, लेकिन इसमें बैलेंस बेहद जरूरी है। अगर नियम बिल्कुल न हों, तो बच्चे अनुशासन की कमी महसूस कर सकते हैं। इसलिए प्यार के साथ-साथ कुछ सीमाएं तय करना भी जरूरी है, ताकि बच्चा सही और गलत में फर्क समझ सके।
कुल मिलाकर परमिसिव पेरेंटिंग बच्चों को आजादी और आत्मविश्वास देती है, जिससे उनका मानसिक और भावनात्मक विकास बेहतर होता है। लेकिन इसे अपनाते समय संतुलन बनाए रखना जरूरी है, ताकि बच्चे स्वतंत्र होने के साथ जिम्मेदार भी बन सकें।
