पीएम मोदी ने असम के बागुरुम्बा ड्व्हौ डांस को दिलाई इंटरनेशनल पहचान, जानिए कैसे बनाया दुनिया की नजरों में खास
- Authored by: Vineet
- Updated Jan 20, 2026, 07:11 PM IST
What Is Dwhou Dance: असम की मिट्टी से जन्मा बागुरुम्बा ड्व्हौ डांस (Bagurumba Dwhou dance) आज दुनिया भर में चर्चा में है। यह लोकनृत्य अब एक ग्लोबल पहचान बन चुका है। असम के इस नृत्य को नई पहचान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिलाई है। हाल ही में उन्होंने इस नृत्य का कुछ कंटेंट सोशल मीडिया पर शेयर किया था, जिसके बाद इसे दुनियाभर में देखा गया। चलिए जानते हैं आखिर पीएम मोदी ने असम के लोकनृत्य को कैसे दुनिया की नजरों में खास बना दिया है।
असम का बागुरुम्बा ड्व्हौ डांस बना ग्लोबल पहचान (PC- IG/ Pinterest)
What Is Dwhou Dance: कभी-कभी किसी संस्कृति को पहचान दिलाने के लिए बड़े मंच या लंबे भाषण की जरूरत नहीं होती, बस एक सच्चा जुड़ाव काफी होता है। असम का पारंपरिक बागुरुम्बा ड्व्हौ डांस (Bagurumba Dwhou dance) भी कुछ ऐसा ही है। सालों से यह नृत्य बोडो समुदाय की पहचान रहा है, लेकिन हाल ही में जब यह डांस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सोशल मीडिया से जुड़ा, तो इसकी पहुंच देश की सीमाओं को पार कर गई। सोशल मीडिया पर इस डांस से जुड़े वीडियो ने करोड़ों लोगों का ध्यान खींचा और देखते ही देखते यह लोकनृत्य ग्लोबल चर्चा का हिस्सा बन गया। यह कहानी सिर्फ एक डांस की नहीं, बल्कि उस पहचान की है, जिसे सही मंच मिलने पर पूरी दुनिया सराहती है।
बागुरुम्बा ड्व्हौ डांस क्या है
बागुरुम्बा ड्व्हौ डांस असम के बोडो समुदाय का पारंपरिक लोकनृत्य है, जिसे अक्सर तितली नृत्य भी कहा जाता है। इस डांस में महिलाओं की कोमल चाल, हाथों की लयबद्ध हरकतें और रंग-बिरंगे पारंपरिक परिधान देखने लायक होते हैं। यह नृत्य आमतौर पर बसंत ऋतु और बोडो फेस्टिवल्स के दौरान किया जाता है। बागुरुम्बा सिर्फ मनोरंजन नहीं, बल्कि प्रकृति, खुशी और सामुदायिक एकता का प्रतीक माना जाता है।
पीएम मोदी ने कैसे दिलाई ग्लोबल पहचान
हाल ही में जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर बागुरुम्बा ड्व्हौ डांस से जुड़ा कंटेंट शेयर किया, तो यह पल खास बन गया। पीएम मोदी के सोशल मीडिया नेटवर्क पर इस डांस से जुड़े वीडियो को 200 मिलियन से ज्यादा व्यूज मिले। इतनी बड़ी संख्या सिर्फ एक आंकड़ा नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे एक लोकनृत्य लोगों के दिलों तक पहुंच सकता है। पीएम मोदी का यह कदम असम की संस्कृति के प्रति सम्मान और देश की विविधता को सामने लाने की कोशिश के तौर पर देखा गया।
सोशल मीडिया ने भी निभाया अहम रोल
आज के समय में सोशल मीडिया किसी भी कला या संस्कृति के लिए सबसे बड़ा मंच बन चुका है। बागुरुम्बा ड्व्हौ डांस का मामला भी कुछ ऐसा ही रहा। पहले यह नृत्य स्थानीय कार्यक्रमों और सांस्कृतिक मंचों तक सीमित था, लेकिन डिजिटल प्लेटफॉर्म पर आते ही इसकी पहचान बदल गई। लोगों ने इसे सिर्फ देखा ही नहीं, बल्कि शेयर किया, इसके बारे में पढ़ा और जानने की कोशिश की। यही वजह है कि यह लोकनृत्य अब इंटरनेशनल ऑडियंस तक पहुंच पाया।
असम की संस्कृति को मिला नया सम्मान
बागुरुम्बा डांस को मिली यह पहचान सिर्फ एक कला रूप की जीत नहीं है, बल्कि पूरे असम और बोडो समुदाय के लिए गर्व का पल है। इससे यह साफ होता है कि भारत की लोकसंस्कृतियां आज भी उतनी ही प्रासंगिक हैं, बस उन्हें सही मंच मिलने की जरूरत है।
पीएम मोदी द्वारा इस डांस को सामने लाने से यह संदेश भी गया कि लोकल कल्चर भी ग्लोबल हो सकता है, अगर उसे सम्मान और पहचान दी जाए।
अब बागुरुम्बा ड्व्हौ डांस आज सिर्फ एक लोकनृत्य नहीं रहा, बल्कि यह उदाहरण बन गया है कि कैसे एक सांस्कृतिक विरासत, सही समय और सही मंच मिलने पर दुनिया भर में अपनी जगह बना सकती है।
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