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क्या होती है एक्टिव लिसनिंग? जानें बच्चों को एक्टिव लिसनर बनाने के तरीके और फायदे

Active Listening: आज के टाइम में बच्चों का एक्टिव लिसनर होना बहुत जरूरी है। एक्टिव लिसनिंग का मतलब है बोलने वाले की पूरी बातों पर ध्यान देना और उसके द्वारा कही जाने वाली पूरी बातों को समझने की कोशिश करना।

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क्या होती है एक्टिव लिसनिंग, क्या हैं एक्टिव लिसनिंग के फायदे? बच्चों को कैसे सिखाएं ध्यान से सुनना (Photo: Pexels)

अगर आप अपने बच्चे को भीड़ से अलग बनाना चाहते हैं तो उन्हें सुनने की कला सिखानी होगी। बड़े-बुजुर्ग कह गए हैं कि ध्यान से सुनना कुछ भी सीखने का सबसे महत्त्वपूर्ण भाग है। अगर आप सामने वाले की बात ध्यान से सुनते हैं तो आप अपनी एक अलग छाप छोड़ते हैं। अकसर देखने को मिलता है कि बच्चे पेरेंट्स या टीचर की बात ध्यान से नहीं सुनते। वह अकसर सामने वाले की बातों को इग्नोर करते हैं। समस्या ये है कि अगर बच्चा सामने वाले की बात ध्यान से सुनेगा नहीं तो कुछ सीख भी नहीं पाएगा।

एक्टिव लिसनिंग क्यों जरूरी है?

आज के टाइम में बच्चों का एक्टिव लिसनर होना बहुत जरूरी है। एक्टिव लिसनिंग का मतलब है बोलने वाले की पूरी बातों पर ध्यान देना और उसके द्वारा कही जाने वाली पूरी बातों को समझने की कोशिश करना। एक्टिव लिसनिंग हैबिट बच्चे में प्रॉब्लम सॉल्विंग, लीडरशिप और टीम वर्क जैसे स्किल्स को ना सिर्फ डेवलप करता है बल्कि उन्हें बढ़ाता भी है।

बच्चों को कैसे बनाएं एक्टिव लिसनर?

कुछ बातें हैं जिन्हें ध्यान में रखकर आप अपने बच्चे में लिसनिंग हैबिट्स के साथ और भी आदतें डाल सकते हैं। आइए जानते हैं कि बच्चों को एक्टिव लिसनर कैसे बनाया जाए:

1. आंखों में देख कर बात करना सिखाएं: बच्चों को बताएं कि जब भी सामने वाला कुछ बोले तो उसकी आंखों में देखना है। इससे बच्चों में एकाग्रता बढ़ती है। एकाग्रता बढ़ेंगी तो वह अपने आप बातों को ध्यान से सुनेगा।

2. इंटरेक्टिव बनें: बच्चों के साथ बातूनी बनना जरूरी है। अगर आप उन्हें कोई स्टोरी सुना रहे हैं तो बीच बीच में उनसे सवाल जवाब करते रहें। इससे बच्चा ध्यान से सुनना सीखता है।

3. कहानी बनाना सिखाएं: बच्चों को बचपन से ही कहानी गढ़ना सिखाएं। मसलन आप उन्हें कोई शब्द या विषय दें और बोलें इस पर कहानी सुनाओ। इससे बच्चे को सोचने की क्षमता का विकास होता है।

4. शब्दावली बढ़ाएं: कई बार बच्चे सामने वाले की बात इसलिए भी नहीं सुनते हैं क्योंकि उन्हें यही समझ नहीं आता कि क्या कहा जा रहा है। इसके लिए जरूरी है कि बच्चों की शब्दावली बढ़ाएं।

5. उदाहरण बनें: बच्चे सबसे ज्यादा माता-पिता से सीखते हैं। अगर आप चाहते हैं कि आपका बच्चा हर किसी की बात ध्यान से सुने तो आपको भी उसके सामने एक्टिव लिसनर की तरह बिहेव करना होगा। आपको बच्चे की बातों को भी पूरे ध्यान से सुनना होगा।

इन बातों को अपने और बच्चे की दिनचर्या में शामिल कर आप उसे एक्टिव लिसनर बना सकते हैं। बच्चा जिस दिन ध्यान से सुनना सीख जाएगा उस दिन आप उसमें सकारात्मक बदलाव देखेंगे। हमेशा ध्यान रखें कि एक्टिव लिसनिंग न केवल बच्चों के वर्तमान को निखारती हैं बल्कि उनके भविष्य को भी उज्ज्वल बनाती है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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