Snowfall In Delhi: दिल्ली एनसीआर (Delhi NCR) समेत भारत के उत्तर पूर्वी राज्यों में ठंड का सितम जारी है। कोहरे की चादर में लिपटी दिल्ली में हाड़ कंपा देने वाली ठंड पड़ रही है। दिल्ली एनसीआर ठंड से कांप रहा है, सर्द हवाओं व शीतलहर के कारण आम लोगों का घर से निकलना मुश्किल हो गया है। हवाओं में ऐसी कनकनी है कि पूरा बदन सिहर जा रहा है। बेजुबान जानवर से लेकर आम इंसान ठंड से बेबस है। मंगलवार को राजधानी न्यूनतम तापमान 2.4 डिग्री दर्ज किया (Delhi Temprature)गया था। वहीं सफदरजंग वेधशाला में न्यूनतम तापमान 2.4 डिग्री दर्ज (Delhi Weather) किया गया। दिल्ली वालों को भीषण शीतलहर का सामना करना (Snowfall In Delhi) पड़ रहा है।
मौसम विभाग की मानें तो करीब 10 साल बाद राजधानी इतने लंबे शीतलहर का प्रकोप झेल रही है। इससे पहले साल 2013 में इतनी लंबी शीतलहर ने शहर को अपने आगोश में लिया था। हाल ही में दिल्ली के कई इलाकों में पारा 1.8 डिग्री दर्ज किया (Snowfall In Delhi NCR) गया था। दिल्ली को शिमला कहा जाए तो गलत (Snowfall In Delhi News) नहीं होगी। कंपकंपाती ठंड के बीच लोगों के मन में एक सवाल है कि, दिल्ली में आखिर पारा माइनस में जानें के बाद भी बर्फबारी क्यों नहीं होती। यहां हम आपको बताएंगे कि, दिल्ली में पारा माइनस में जानें के बाद भी बर्फबारी क्यों नहीं होती।
क्या दिल्ली में हो सकती है बर्फबारी?
बर्फ की चादर हर किसी को पसंद है। खासकर दिल्ली वालों का बर्फीली इलाकों में रहना व घूमना सपना होता है। लोग कंपकंपाती ठंड के बीच भी शिमला या कुल्लू मनाली घूमने से नहीं चूकते। ऐसे में दिल्ली वालों का अक्सर एक सवाल रहता है कि, शहर में पारा माइनस में जानें के बाद भी आखिर बर्फ क्यों नहीं होती। बता दें इसके पीछे भौगोलिक कारण के साथ मौसम से जुड़ी तकनीक भी है। बर्फबारी एक तरह के प्रेसिपिटेशन है यानी उसके लिए बादलों की जरूरत होती है, इसके लिए शून्य डिग्री तापमान के साथ बादल का कॉम्बिनेशन होना चाहिए।पारा माइनस में जानें के बाद भी क्यों नहीं होती बर्फबारी?
मौसम विभाग की मानें तो दिल्ली में कभी भी बर्फबारी नहीं हो सकती। इसके पीछे कई भौगोलिक कारण के साथ मौसम संबंधी तकनीक भी हैं। हाल ही में आईएमडी के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्रा ने मीडिया से बातचीत के दौरान बताया कि बर्फबारी एक तरह की वर्षा है, जिसे बादलों की जरूरत होती है। दिल्ली जैसे मैदानी इलाकों में बादलों को बनने की जरूरत होती है। बर्फबारी के लिए जमीनी स्तर पर भी तापमान शून्य होना चाहिए।उन्होंने बताया कि आमतौर पर हिमालय में बर्फबारी के बाद मैदानी इलाकों में तापमान माइनस में चला जाता है। सामान्य तौर पर यह वायु शुष्क होती है। तथा इसके साथ बादलों का निर्माणनह होता। यही कारण है कि कई जगहों पर तापमान तेजी से गिरने लगता है, लेकिन बर्फबारी की स्थिति नहीं बनती। अगर सर्दियों के दौरान आसमान में बादल छाए रहते हैं तो बादल
के बाद हालांकि पिछले 2 दिनों से शीतलहर का प्रकोप थोड़ा कम हुआ है।
