Aaj Ki Shayari: अमीरजादों से दिल्ली के मिल न तामक्दूर, कि हम फकीर हुए हैं इन्हीं की दौलत से
- Authored by: Suneet Singh
- Updated Dec 12, 2025, 10:48 AM IST
Aaj Ki Shayari(आज की शायरी): शायरी अनकहे जज्बातों को कहने की कला है। नजरों की भाषा, लम्हों की खुशबू और एहसासों की नर्मी भी है शायरी। किसी रात की तन्हाई में एक छोटी सी मिसरा भी चांद बन जाता है और किसी पुराने दर्द का जिक्र सूरज सा उजाला कर देता है।
आज की शायरी (Photo: Pexels)
Shayari of the Day : शायरी को अगर बयां करना हो तो हम कह सकते हैं कि यह रूह की खिड़कियों पर दस्तक देती हुई एक नरम हवा की तरह है। य हवा कभी मधुर, कभी तीखी, कभी सवाल बनकर तो कभी मलहम की तरह बहती हुई आती है। शायरियों में पूरी एक मुकम्मल दुनिया बसती है, जहां दर्द भी गुलाब बनकर खिलता है और मोहब्बत भी बारिश की बूंदों में घुलकर उतरती है। शायरी अनकहे जज्बातों को कहने की कला है। नजरों की भाषा, लम्हों की खुशबू और एहसासों की नर्मी भी है शायरी। किसी रात की तन्हाई में एक छोटी सी मिसरा भी चांद बन जाता है और किसी पुराने दर्द का जिक्र सूरज सा उजाला कर देता है। आज हम आपके लिए लाए हैं मीर तकी मीर का एक बेहद खूबसूरत शेर:
अमीर-ज़ादों से दिल्ली के मिल न ता-मक़्दूर
कि हम फ़क़ीर हुए हैं इन्हीं की दौलत से
- मीर तकी मीर
क्या कहता है मीर का ये शेर
अमीर का मतलब यहां सरदार, हाकिम या धनवान व्यक्ति से है। गरीब मतलब निर्धन या परदेसी। दौलत यानी धन, माल, इक़बाल, नसीब, साम्राज्य, हुकूमत, जीत, ख़ुशी, औलाद। मीर का यह शेर संलग्नकों के कारण दिलचस्प भी है और अजीब भी।
इस शेर में मीर ने संदर्भों से अच्छा विषय पैदा किया है। इसके विधानों में अमीर-ज़ादों, गरीब और दौलत बहुत अर्थपूर्ण हैं और फिर उनकी उपयुक्तता दिल्ली से भी खूब है। मीर खुद से कहते हैं कि दिल्ली के अमीरजादों की संगति से बचो क्योंकि हम उन ही के दौलत से गरीब हुए हैं।
अगर दौलत को मात्र धन और माल के मायने में लिया जाए तो शेर के यह मायने होते हैं कि मीर दिल्ली के अमीरजादों से दूर रहो क्योंकि हम इन ही के धन-दौलत से गरीब हुए हैं। मगर मीर जितने सहल-पसंद थे उतने ही उनके अशआर में पेचीदगी और तहदारी भी है।
दरअसल मीर का कहना ये है कि चूंकि दिल्ली के अमीरजादों के नसीब और उनके इकबाल की वजह से खुदा उन पर मेहरबान है और खुदा उनको दौलत से माला-माल करना चाहता है इसलिए हमारे हिस्से की दौलत भी उनको अता की जिसकी वजह से हम निर्धन हो गए।
यदि मार्क्सवाद के दृष्टिकोण से देखा जाए तो मीर ये कहते हैं कि चूंकि दिल्ली के अमीर भौतिकवादी हैं और धन संचय करने की कोई युक्ति नहीं छोड़ते इसलिए उन्होंने हमारा धन हमसे लूट कर हमें गरीब बना दिया है।
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