Settling Down Phobia : आज की युवा पीढ़ी खासकर Gen-Z समाज की पारंपरिक धाराओं से हटकर अपनी जिंदगी को नए ढंग से जीना चाहती है। लेकिन भारतीय समाज में लोगों के शादी को जीवन का एक अहम काम देखा जाता है। शादी करना और अपना घर बसा लेना एक जरूरी कदम है, जिसे लोग सेटल होना बोलते हैं। लेकिन आज युवाओं में सेटल होने का मतलब सिर्फ शादी करने तक सीमित नहीं है। बल्कि शादी के बाद करियर और आजादी के बीच संतुलन बनाना भी उतना ही जरूरी है। यही कारण है कि युवाओं के बीच 'सेटल डाउन फोबिया' यानी स्थायी रिश्तों, शादी या जिंदगी में एक ड्राइव करने-वाले निर्णय लेने से डर काफी आम होता जा रहा है। आज हम आपको इसके बारे में विस्तार से बताने जा रहे हैं।
क्यों बढ़ रहा सेटल डाउन फोबिया?
आज की युवा पीढ़ी खासकर जनरेशन Z समाज की पारंपरिक धाराओं से हटकर अपनी जिंदगी को नए ढंग से जीना चाहती है। “सेटल डाउन फोबिया” यानी स्थायी रिश्तों, शादी या ज़िंदगी में एक ड्राइव करने वाले निर्णय लेने से डरना, अब केवल व्यक्तिगत नहीं बल्कि सामाजिक व्यवहार एक बड़ा रूप बन गया है। आइए जानते हैं इसके कुछ मुख्य कारण...
1. आजादी की चाह
आजादी एक ऐसा विषय है जो लोगों को काफी पसंद होती है। वहीं बात करें आज की जनरेशन की तो उन्हें जीवन में किसी तरह की बंदिशें नहीं चाहिए। अभिनस्थ जीवनशैली और आजादी की चाह लोगों को सेटल डाउन फोबिया की ओर ले जा रही है।
2. विकल्पों की बाढ़
Gen- Z के लिए करियर, आत्म-विकास और व्यक्तिगत पहचान बेहद महत्वपूर्ण हैं।
वहीं करियर हो या साथी का चुनाव जब ऑप्शन ज्यादा हों तो चुनाव करना मुश्किल हो जाता है। यही कारण है कि आज युवा किसी एक जगह सेटल होने की जगह पूरी जिंदगी नए-नए अनुभव को चुनते हैं।
3. सोशल मीडिया का दौर
आज सोशल मीडिया के दौर पर जहां डेटिंग एप्स की भरमार हो गई है, तो आपके पास मौजूद अनेक ऑप्शन्स ने साथी के चुनाव की प्रक्रिया को काफी जटिल बना दिया है। ज्यादातर युवाओं को लगता है कि यदि सेटल हो गए तो बेहतर ऑप्शन छूट न जाए।
