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क्या च्युइंग गम चबाने से होगा वायरस से बचाव, वैज्ञानिकों ने बनाया एंटी-वायरल गम, जानें कैसे करती है काम

  • Authored by: Vineet
  • Updated Feb 17, 2026, 01:10 PM IST

Antiviral chewing gum to prevent virus in hindi: क्या आप जानते हैं, वैज्ञानिकों ने एक ऐसी खास एंटी-वायरल च्युइंग गम विकसित की है, जो मुंह में मौजूद हानिकारक वायरस को ट्रैप कर उन्हें बेअसर करने में मदद करती है। यह रिसर्च अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया के शोधकर्ताओं द्वारा की गई है। जानिए यह गम कैसे काम करती है, किन वायरस पर असर डालती है और क्या यह संक्रमण रोकने में नई उम्मीद बन सकती है।

च्युइंग गम चबाने से वायरस से कैसे होगा बचाव

च्युइंग गम चबाने से वायरस से कैसे होगा बचाव

Antiviral chewing gum to prevent virus in hindi: कोरोना महामारी के बाद से लोग वायरस से बचाव के नए-नए तरीकों के बारे में ज्यादा जागरूक हो गए हैं। मास्क, सैनिटाइजर और वैक्सीन के अलावा क्या कोई और आसान तरीका हो सकता है जो संक्रमण के खतरे को कम करे? इसी सवाल का जवाब ढूंढते हुए वैज्ञानिकों ने एक खास एंटी-वायरल च्युइंग गम तैयार की है। यह कोई साधारण गम नहीं है, बल्कि इसे इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह मुंह में मौजूद खतरनाक वायरस को पकड़कर बेअसर कर सके। हाल ही में आई एक वैज्ञानिक रिसर्च के मुताबिक, यह गम वायरस के फैलाव को कम करने में मददगार हो सकती है। आइए आसान भाषा में समझते हैं कि यह गम कैसे काम करती है और इसे किसने विकसित किया है।

किसने बनाई एंटी-वायरल च्युइंग गम?

यह खास च्युइंग गम अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ पेनसिल्वेनिया (University of Pennsylvania) के वैज्ञानिकों ने विकसित की है। रिसर्च टीम का नेतृत्व डेंटल मेडिसिन से जुड़े विशेषज्ञों ने किया। उनका मकसद था कि ऐसा आसान और किफायती तरीका खोजा जाए, जिससे मुंह के जरिए फैलने वाले वायरस को रोका जा सके। यह शोध एक वैज्ञानिक जर्नल में प्रकाशित हुआ है और इसे लैब में टेस्ट भी किया गया है।

कैसे काम करती है यह गम?

यह गम प्लांट-बेस्ड यानी पौधों से तैयार की गई है। इसमें खास तरह का प्रोटीन मिलाया गया है, जिसे 'FRIL' (फ्रूट-डेराइव्ड प्रोटीन) कहा जाता है। यह प्रोटीन वायरस को अपनी ओर आकर्षित करता है और उन्हें ट्रैप कर लेता है। जब कोई व्यक्ति इस गम को चबाता है, तो मुंह में मौजूद वायरस इस प्रोटीन से चिपक जाते हैं और निष्क्रिय हो जाते हैं। रिसर्च में पाया गया कि यह गम लार में मौजूद वायरस की मात्रा को काफी हद तक कम कर सकती है।

किन वायरस पर हुआ परीक्षण?

वैज्ञानिकों ने इस गम का परीक्षण फ्लू (इन्फ्लूएंजा) और हर्पीस सिंप्लेक्स वायरस (HSV) जैसे वायरस पर किया। लैब स्टडी में सामने आया कि गम ने इन वायरस की संख्या को कम करने में प्रभावी भूमिका निभाई। खास बात यह है कि मुंह के जरिए फैलने वाले संक्रमण को रोकने में यह तरीका कारगर साबित हो सकता है। हालांकि, यह अभी शुरुआती चरण की रिसर्च है और आगे क्लिनिकल ट्रायल की जरूरत होगी।

क्या यह वैक्सीन का विकल्प है?

यह समझना जरूरी है कि यह गम किसी भी तरह से वैक्सीन का विकल्प नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इसका उद्देश्य संक्रमण के खतरे को कम करना है, न कि पूरी तरह से बीमारी से सुरक्षा देना। यानी इसे एक अतिरिक्त सुरक्षा उपाय के तौर पर देखा जा सकता है, खासकर उन हालात में जहां वायरस के फैलने की आशंका ज्यादा हो।

भविष्य में क्या हो सकती है भूमिका?

अगर आगे के ट्रायल सफल रहते हैं, तो यह एंटी-वायरल च्युइंग गम सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक नई उम्मीद बन सकती है। स्कूल, अस्पताल या भीड़भाड़ वाली जगहों पर यह संक्रमण के खतरे को कम करने में सहायक हो सकती है। आसान भाषा में कहें तो, अगर एक साधारण सी च्युइंग गम वायरस को कमजोर कर सकती है, तो यह वाकई बड़ी खोज मानी जाएगी।

फिलहाल, यह रिसर्च हमें यही सिखाती है कि विज्ञान लगातार नए समाधान खोज रहा है, ताकि हम वायरस से बेहतर तरीके से बच सकें।

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विनीत टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में हेल्थ डेस्क के साथ बतौर चीफ कॉपी एडिटर जुड़े हैं। दिल्ली के रहने वाले विनीत को हेल्थ, फिटनेस और न्यूट्रिशन जैसे विष... और देखें

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