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साथी पर 20 मशहूर शेर: क्या जरूरी है साथ दें साथी, यूं तो साया भी साथ चलता है

Sathi Par Shayari (साथी पर शायरी): जीवन में साथी का होना इसलिए जरूरी है क्योंकि इंसान अकेले चल तो सकता है, लेकिन दूर तक नहीं। किसी का हाथ थामकर चलता है तो सफर आसान भी लगता है और खूबसूरत भी। एक साथी आपकी सोच को पूरा करता है, आपकी हिम्मत बनता है और आपकी खामोशी में भी छिपे दर्द को पढ़ लेता है।

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साथी पर शायरी (फोटो सोर्स - iStock)

Sathi Par Shayari: साथी- इस जीवन के लंबे सफर में एक ऐसा इंसान, जिसके साथ सफर को आसान बना देता है। सच्चा साथी वह होता है जो हमारी बातें बिना कहे भी समझ जाए। यह सिर्फ पति-पत्नी या प्रेमी-प्रेमिका का रिश्ता नहीं, बल्कि वह व्यक्ति है जो खुशियों में ताली बजाता है और मुश्किलों में कंधा बनकर साथ खड़ा हो जाता है। साथी वह है जो आपको आपकी खराबियों के साथ स्वीकार करे, आपकी खूबियों पर गर्व करे और आपकी हर छोटी-बड़ी जीत को अपनी जीत समझे। कभी वह दोस्त के रूप में आता है, कभी जीवनसाथी के रूप में और कभी अचानक रास्ते में मिलकर आपकी कहानी का सबसे खूबसूरत हिस्सा बन जाता है। इन्हीं साथियों पर कई मशहूर शेर लिखे गए हैं। आइए पढ़ें साथी पर शायरी हिंदी में:

1. ज़ख़्म ही तेरा मुक़द्दर हैं दिल तुझ को कौन संभालेगा

ऐ मेरे बचपन के साथी मेरे साथ ही मर जाना

ज़ेब ग़ौरी

2. दिल की तमन्ना थी मस्ती में मंज़िल से भी दूर निकलते

अपना भी कोई साथी होता हम भी बहकते चलते चलते

- मजरूह सुल्तानपुरी

3. साथी मिरे कहां से कहां तक पहुंच गए

मैं ज़िंदगी के नाज़ उठाने में रह गया

- उमैर मंज़र

4. ग़म हो कि ख़ुशी दोनों कुछ दूर के साथी हैं

फिर रस्ता ही रस्ता है हंसना है न रोना है

- निदा फ़ाज़ली

5. दयार-ए-नूर में तीरा-शबों का साथी हो

कोई तो हो जो मिरी वहशतों का साथी हो

- इफ़्तिख़ार आरिफ़

6. उस से पूछो अज़ाब रस्तों का

जिस का साथी सफ़र में बिछड़ा है

- अब्बास दाना

7. मैं उस से झूट भी बोलूं तो मुझ से सच बोले

मिरे मिज़ाज के सब मौसमों का साथी हो

- इफ़्तिख़ार आरिफ़

8. ऐ बुतो रंज के साथी हो न आराम के तुम

काम ही जब नहीं आते हो तो किस काम के तुम

- मुज़्तर ख़ैराबादी

9. ओ पिछली रुत के साथी

अब के बरस मैं तन्हा हूं

- नासिर काज़मी

10. तुम मिरी वहशतों के साथी थे

कोई आसान था तुम्हें खोना?

- फ़रीहा नक़वी

11. ये भी शायद ज़िंदगी की इक अदा है दोस्तो

जिस को साथी मिल गया वो और तन्हा हो गया

- अफ़ज़ल मिनहास

12. पीछे छूटे साथी मुझ को याद आ जाते हैं

वर्ना दौड़ में सब से आगे हो सकता हूं मैं

- आलम ख़ुर्शीद

13. वो मेरे नाम की निस्बत से मो'तबर ठहरे

गली गली मिरी रुस्वाइयों का साथी हो

- इफ़्तिख़ार आरिफ़

14. तुझ से बिछड़े गांव छूटा शहर में आ कर बसे

तज दिए सब संगी साथी त्याग डाला देस भी

- नासिर शहज़ाद

15. इक हुस्न-ए-तसव्वुर है जो ज़ीस्त का साथी है

वो कोई भी मंज़िल हो हम लोग नहीं तन्हा

- हफ़ीज़ बनारसी

16. सब बिछड़े साथी मिल जाएं मुरझाएं चेहरे खिल जाएं

सब चाक दिलों के सिल जाएँ कोई ऐसा काम करो 'वाली'

- वाली आसी

17. ये मेरे साथी हैं प्यारे साथी मगर इन्हें भी नहीं गवारा

मैं अपनी वहशत के मक़बरे से नई तमन्ना के ख़्वाब देखूं

- उमैर मंज़र

18. हक़ीक़तें तो मिरे रोज़ ओ शब की साथी हैं

मैं रोज़ ओ शब की हक़ीक़त बदलना चाहती हूं

- अज़रा नक़वी

19. दश्त की ना-तमाम राहों पर

कोई साथी है तो शजर तन्हा

- विजय शर्मा

20. क्या ज़रूरी है साथ दें साथी

यूं तो साया भी साथ चलता है

- फ़रहान दिल

जीवन में साथी का होना इसलिए जरूरी है क्योंकि इंसान अकेले चल तो सकता है, लेकिन दूर तक नहीं। किसी का हाथ थामकर चलता है तो सफर आसान भी लगता है और खूबसूरत भी। एक साथी आपकी सोच को पूरा करता है, आपकी हिम्मत बनता है और आपकी खामोशी में भी छिपे दर्द को पढ़ लेता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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