Sadhguru Thoughts on Women : आज के बदलते समय में जहां महिलाएं पुरुषों के कंधे से कंधा मिलाकर नौकरी के क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं, तो कुछ महिलाएं घर में रहते हुए अपने परिवार का पालन-पोषण करती हैं। लेकिन आमतौर पर घर संभाल रही महिलाओं में आपको ये भाव देखने को मिलता होगा कि 'मैं तो सिर्फ एक हाउसवाइफ हूं'। यदि आप एक महिला हैं और हाउस वाइफ के तौर पर अपनी अहमियत को कम करके देखती हैं, तो आपको ईशा फाउंडेशन के संस्थापक और आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु जग्गी वासुदेव की बात सुननी चाहिए। जी हां आज हम आपको सद्गुरु के महिलाओं को लेकर विचार बताने जा रहे हैं, जो आपकी सोच बदल सकते हैं।
क्यों दिखे सम्मान की कमी?
आज अक्सर सुनने में आता है कि महिलाएं कहती हैं, “मैं तो बस एक गृहिणी हूँ।” लेकिन सद्गुरु के अनुसार यह वाक्य परिवार के लालन-पालन में उस महिला के योगदान को कम दिखाता है। उन्होंने स्पष्ट कहा है कि यदि कोई महिला अपने घर-परिवार का ख्याल रखती है, बच्चों का पालन-पोषण करती है, तो वह काम बेहद महत्वपूर्ण है। इसलिए परिवार संभालने वाली महिलाओं के प्रति किसी भी तरह से सम्मान की कमी नहीं दिखनी चाहिए।
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महिला स्वतंत्रता का महत्व
सद्गुरु के अनुसार महिला की स्वतंत्रता अर्थ की स्वतंत्रता और करियर की स्वतंत्रता दोनों के आधार पर होती है। लेकिन इसमें भी अंतिम इच्छा महिला की अपनी होनी चाहिए। इसमें समाज का दबाव होने से परिणाम बेहतर नहीं होगा। सद्गुरु के अनुसार "उनके अनुसार, अगर आर्थिक जरूरत हो तो काम करना समझदारी है; लेकिन अगर सिर्फ इसलिए काम कर रही है कि समाज कहता है हर महिला काम करेगी, तब यह सही नहीं है"।
बदलाव की जरूरत
आज हमारे समाज की सोच है कि नौकरी करने वाली महिला को एक विशेष सम्मान से देखा जाता है। जबकि परिवार और बच्चों की परवरिश कर रही महिला को उतना सम्मान नहीं दिया जाता है। इसलिए सद्गुरु कहते हैं कि घर-परिवार, बच्चों की परवरिश, भावनात्मक वातावरण ये सभी उतना ही महत्व रखते हैं जितना कि रोजगार। इसलिए ये बदलाव पूरे समाज में नजर आना चाहिए और हर योगदान सम्मान पाने लगे चाहे वह घर का काम हो या बाहर का।
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