सावन जिसे बारिश का मौसम भी कहते हैं, एक ऐसा सीजन है जिसमें लोगों के ढेरों जज्बात बादलों की तरह उमड़कर आते हैं। आसमान से गिरने वाली बारिश की हल्की बूंदे जहां लोगों के चेहरों पर एक बड़ी सी मुस्कान ला देती है, तो वहीं कुछ लोगों के मन में यह सावन प्यार के एहसास को भी परवान चढ़ाते हैं। सावन को लेकर हिंदी फिल्म सिनेमा में भी बारिश के तमाम रंग दिखाए गए हैं। बॉलीवुड की फिल्मों ने बरसात पर कई ऐसे बेहतरीन गीत दिए हैं जो सालों बाद भी खूब सुने और सुनाए जाते हैं। ऐसा ही एक गाना है- रिमझिम गिरे सावन। यह गाना फिल्माया गया है अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी पर। फिल्म का नाम है मंजिल।
1979 में रिलीज हुई फिल्म मंजिल का यह गाना बारिश का पर्याय बन चुका है। सावन के मौसम में आपको यह गीत लोगों के घरों से गली मोहल्ले की छोटी-छोटी दुकानों तक पर बजता सुनाई दे जाएगा। लता मंगेशकर और किशोर कुमार की आवाज ने इस गीत के जादू में चार चांद लगाए हैं। आइए डालते हैं इस गीत के लिरिक्स पर एक नजर:
रिमझिम गिरे सावन
सुलग सुलग जाए मन
भीगे आज इस मौसम में
लगी कैसी ये अगन
रिमझिम गिरे सावन
सुलग सुलग जाए मन
भीगे आज इस मौसम में
लगी कैसी ये अगन
रिमझिम गिरे सावन
जब घुंघरुओं सी बजती हैं बूंदे
अरमाँ हमारे पलके न मूंदे
कैसे देखे सपने नयन
सुलग सुलग जाए मन
भीगे आज इस मौसम में
लगी कैसी ये अगन
रिमझिम गिरे सावन
रिमझिम गिरे सावन
सुलग सुलग जाए मन
भीगे आज इस मौसम में
लगी कैसी ये अगन
रिमझिम गिरे सावन
सुलग सुलग जाए मन
भीगे आज इस मौसम में
लगी कैसी ये अगन
पहले भी यूँ तो बरसे थे बादल
पहले भी यूँ तो भीगा था आँचल
पहले भी यूँ तो बरसे थे बादल
पहले भी यूँ तो भीगा था आँचल
अबके बरस क्यू सजन
सुलग सुलग जाए मन
भीगे आज इस मौसम में
लगी कैसी ये अगन
रिमझिम गिरे सावन
बता दें कि मंजिल फिल्म के इस गाने को सुरों से सजाया था आर डी बर्मन ने। इस गाने से जुड़ी एक रोचक जानकारी आपको दे रहे हैं। यह पूरा गाना असली बरसात में शूट हुआ था। जी हां, अमिताभ बच्चन और मौसमी चटर्जी ने असली बारिश में भीतते हुए इस गाने को शूट किया था। अमिताभ बच्चन के छोटे भाई अजिताभ बच्चन बारिश के दौरान अपनी कार से एक्टर्स को एक लोकेशन से दूसरी लोकेशन पर छोड़कर आते थे।
