Rajiv Gandhi Motivational Quotes: आज देश के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की जयंती (Rajiv Gandhi Birth Anniversary) है। उनका जन्म 20 अगस्त 1944 को मुंबई में हुआ था। महज 40 वर्ष की उम्र में उन्होंने देश के प्रधानमंत्री का पद संभाला। वे भारत के सबसे युवा प्रधानमंत्रियों में से एक थे।
राजीव गांधी का राजनीतिक दौर ऐसे समय में आया, जब भारत तेजी से बदलती दुनिया का सामना कर रहा था। वे देश को आधुनिक तकनीक से जोड़ना चाहते थे। कंप्यूटर और टेलीकम्युनिकेशन के विस्तार को उन्होंने विकास का अहम हिस्सा माना। उनके दौर में भारत में तकनीकी बदलाव की नींव मजबूत हुई।
राजीव गांधी शिक्षा, विज्ञान और तकनीक को देश के भविष्य से जोड़कर देखते थे। वे चाहते थे कि भारत 21वीं सदी की चुनौतियों के लिए तैयार हो। 21 मई 1991 को तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में एक आत्मघाती हमले में उनकी हत्या कर दी गई। आज भले राजीव गांधी इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी बहुत सी बातें लाखों हिंदुस्तानियों को प्रेरित करती हैं। यहां देखें राजीव गांधी के अनमोल विचार:
1. राजीव गांधी आज भी भारतीय राजनीति में उस दौर के नेता के रूप में याद किए जाते हैं, जिन्होंने तकनीक, आधुनिकता और 21वीं सदी के भारत का सपना देखा था।
2. देश की प्रगति केवल सरकार के काम से नहीं होती; यह हर नागरिक के योगदान, निष्ठा और अनुशासन से तय होती है। हमें पहले भारतीय बनना होगा, बाकी सब बाद में।
3. शिक्षा केवल डिग्री हासिल करने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह चरित्र निर्माण और समाज को बेहतर बनाने की दृष्टि देती है।
4. यदि किसान कमजोर हो जाते हैं तो देश आत्मनिर्भरता खो देता है, लेकिन अगर वे मजबूत हैं तो देश की स्वतंत्रता भी मजबूत हो जाती है। अगर हम कृषि की प्रगति को बरकरार नहीं रख पाए तो देश से हम गरीबी नहीं मिटा पाएंगे।
5. महिलाएं एक देश की सामाजिक चेतना होती है. वे हमारे समाज को एक साथ जोड़ कर रखती है।
6. हिंसा कभी भी किसी समस्या का समाधान नहीं हो सकती। शांति, बातचीत और आपसी समझ ही देश को आगे ले जाने का एकमात्र रास्ता है।"
7. भारत की ताकत उसकी विविधता में छिपी एकता है। हमें हर धर्म, जाति और संस्कृति का सम्मान करते हुए एक साथ आगे बढ़ना होगा।"
8. दिमाग का विदेश पलायन (ब्रेन ड्रेन) बेहतर है, बजाय इसके कि दिमाग नाले में बर्बाद हो जाए।
9. राष्ट्र निर्माण का लोकतांत्रिक तरीका धैर्य, दृढ़ता और समझौते की भावना की मांग करता है।
10. हमारी योजनाएं कठोर और जड़ नहीं हो सकतीं। उन्हें समय के साथ बदलना होगा और देश के विकास के साथ आगे बढ़ना होगा।
11. सभ्यताएं कई पीढ़ियों के लगातार परिश्रम से बनती हैं। नरमी और आलस्य के कारण सभ्यताएं कमजोर होकर समाप्त हो जाती हैं। हमें पतन से सावधान रहना चाहिए।
12. एक संवेदनशील और जवाबदेह प्रशासन की सबसे बड़ी परीक्षा उस जगह होती है, जहां उसका सामना सीधे जनता से होता है।
