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Quote of the day: भूलकर भी इन 5 मौकों पर ना खोलें मुंह, चाणक्य ने बताया चुप रहना ही बेहतर

Chanakya Niti Quote of the Day: चाणक्य नीति में कहा गया है कि जुबान पर लगाम रखना बुद्धिमत्ता की सबसे बड़ी निशानी है। कुछ मौकों पर चुप रहना बोलने से कहीं ज्यादा लाभदायक होता है।

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आज का सुविचार

Chanakya Niti Quote of the Day: आचार्य चाणक्य महान अर्थशास्त्री होने के साथ ही लोगों के लिए मोटिवेशनल गुरु भी थे। चाणक्य नीति में दर्ज उनकी नीतियां आज भी जीवन को सरल और सफल बनाने की राह दिखा रही हैं। उनकी शिक्षाओं में यह बात खास तौर पर कही गई है कि हर स्थिति में बोलना समझदारी नहीं होता। चाणक्य का मानना था कि जैसे सही समय पर बोलना जितना जरूरी है, उतना ही जरूरी सही समय पर चुप रहना भी है। कई बार चुप रहना ही सबसे बड़ा कदम होता है। आइए जानते हैं ऐसे 5 मौके, जब चाणक्य नीति के अनुसार चुप रहना ही बेहतर माना गया है:

Chanakya Niti for Success in Hindi

1. गुस्से की स्थिति में

जब व्यक्ति गुस्से में होता है, तब वह अकसर ऐसी बातें कह देता है जिनका बाद में पछतावा होता है। चाणक्य के अनुसार, क्रोध के समय मौन रहना ही बुद्धिमानी है। इससे रिश्ते भी बचते हैं और स्थिति बिगड़ने से भी बचती है।

2. जब सामने वाला समझने के लिए तैयार न हो

अगर कोई व्यक्ति आपकी बात समझना ही नहीं चाहता, तो बार-बार समझाने का कोई फायदा नहीं होता। ऐसे में चुप रहना बेहतर है, क्योंकि अनावश्यक बहस केवल समय और ऊर्जा की बर्बादी होती है।

3. दूसरों की बुराई सुनते समय

जब कोई व्यक्ति किसी की बुराई कर रहा हो, तो उसमें शामिल होने से बचना चाहिए। चाणक्य मानते हैं कि ऐसी स्थिति में मौन रहना ही सही है, ताकि आप नकारात्मकता से दूर रह सकें।

4. जब ज्ञान अधूरा हो

किसी विषय पर पूरी जानकारी न होने पर बोलना आपकी छवि को नुकसान पहुंचा सकता है। इसलिए, अगर आपको पूरी जानकारी नहीं है, तो चुप रहना और पहले सीखना ही बेहतर है।

5. अपमानजनक स्थिति में

अगर कोई व्यक्ति आपको अपमानित करने की कोशिश कर रहा है, तो हर बार जवाब देना जरूरी नहीं होता। कई बार मौन ही सबसे बड़ा जवाब होता है, जो सामने वाले को खुद ही उसकी गलती का एहसास करा देता है।

आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति में बार-बार कहा है कि जुबान पर लगाम रखना बुद्धिमत्ता की सबसे बड़ी निशानी है। वे मानते थे कि कुछ मौकों पर चुप रहना बोलने से कहीं ज्यादा लाभदायक होता है। चुप रहने से न सिर्फ सम्मान बना रहता है, बल्कि अनावश्यक मुसीबतों से भी बचा जा सकता है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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