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Psychology: इन 3 खास गुण वालों पर लोग जल्दी कर लेते हैं भरोसा, बना लेते हैं फेवरेट

Psychology of trust: आज जब हर कोई खुद को सही साबित करने के लिए चीखकर बोलने का आदि हो गया है, वहां ध्यान से सुनना एक दुर्लभ गुण बन चुका है।

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जानिए क्या कहता है विश्वास का मनोविज्ञान (AI Image)

Psychology of trust: भरोसा किसी भी रिश्ते की रूह होता है। अगर यह ना हो तो कोई भी रिश्ता चल ही नहीं सकता। मनोविज्ञान के मुताबिक ज्यादातर लोग ऐसे लोगों पर जल्दी भरोसा करते हैं जो उन्हें ध्यान से सुनते हैं। हाल ही में कई रिसर्च और साइकोलॉजी एक्सपर्ट्स ने भी इस बात की तस्दीक की है। ताजा रिपोर्ट्स बताती हैं कि बातचीत के दौरान छोटे-छोटे हावभाव भी सामने वाले के मन पर गहरा असर डालते हैं। खासतौर पर सिर हिलाकर प्रतिक्रिया देना भी सामने वालों को यह एहसास दिलाता है कि उनकी बात सच में सुनी जा रही है।

बैकचैनलिंग से बढ़ता है विश्वास

मनोवैज्ञानिकों के अनुसार, जब कोई व्यक्ति हमारी बात सुनते समय धीरे-धीरे सिर हिलाता है, आंखों से संपर्क बनाए रखता है और बीच-बीच में हां या ना के तौर पर रिएक्शन देता है, तो हमारा दिमाग उसे भरोसेमंद मानने लगता है। इस प्रोसेस को साइकोलॉजी की भाषा में बैकचैनलिंग कहा जाता है। यह एक ऐसा तरीका है जिसमें बिना बीच में टोके सामने वाले को महसूस कराया जाता है कि उसकी बात महत्वपूर्ण है।

एक्टिव लिस्निंग

कई साइकोलॉजिकल रिसर्च में यह भी सामने आया कि लोग उन व्यक्तियों के साथ ज्यादा सहज महसूस करते हैं जो एक्टिव लिसनर होते हैं। यानी केवल सुनना नहीं, सामने वाले की भावनाओं को समझना और उन्हें महत्व देना भी जरूरी है। हार्वर्ड-ट्रेंड एक्सपर्ट्स का मानना है कि भरोसा सिर्फ शब्दों से नहीं बनता, यह इस बात से तय होता है कि सामने वाला व्यक्ति कितना उपस्थित और ईमानदार महसूस होता है।

बिना जज किये सामने वाले को सुनना

मनोवैज्ञानिक यह भी कहते हैं कि भरोसा पैदा करने के लिए जरूरत से ज्यादा बोलना जरूरी नहीं होता। कई बार शांत रहकर, मुस्कुराकर और ध्यान से सुनकर भी इंसान दूसरों के करीब आ सकता है। लोग अकसर ऐसे व्यक्तियों को पसंद करते हैं जो उन्हें जज किए बिना सुनते हैं। यही वजह है कि अच्छे श्रोता जल्दी भरोसा जीत लेते हैं।

आज जब हर कोई खुद को सही साबित करने के लिए चीखकर बोलने का आदि हो गया है, वहां ध्यान से सुनना एक दुर्लभ गुण बन चुका है। शायद यही कारण है कि साइकोलॉजी अब यह मानती है कि भरोसा जीतने का सबसे आसान तरीका है- सामने वाले को यह महसूस कराना कि उसकी बात सच में मायने रखती है।

Suneet Singh
सुनीत सिंहauthor

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे हैं। टीवी और डिजिटल पत्रकारिता में 13 वर्षों के अनुभव के साथ, सुनीत उन बहुमुखी पत्रकारों में शामिल हैं जिन्होंने न्यूजरूम और फील्ड—दोनों मोर्चों पर खुद को साबित किया है। माइक, कैमरा और एडिटिंग डेस्क तीनों से उनकी सहज जुगलबंदी ने उन्हें एक संतुलित और विश्वसनीय मीडिया प्रोफेशनल के रूप में स्थापित किया है। पिछले 10 वर्षों से सुनीत लाइफस्टाइल, लिटरेचर, सिनेमा और संस्कृति से जुड़ी गहन व विश्लेषणात्मक स्टोरीज लिखते रहे हैं और अबतक 12,000 से अधिक आर्टिकल पब्लिश कर चुके हैं। उनकी लेखन शैली गहराई, मौलिक दृष्टिकोण और रिसर्च-आधारित प्रस्तुति से पहचानी जाती है। वे विषयों की बारीकियों को पकड़कर उन्हें सरल, प्रभावी और पाठकों से जुड़ने वाली भाषा में ढालने में दक्ष हैं।

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