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Psychology: आपके सुनने का तरीका बता देगा आप कैसे हैं इंसान, जानिए क्या कहता है मनोविज्ञान

Psychology of Listening: किसी व्यक्ति की पर्सनैलिटी को केवल एक आदत से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता, लेकिन सुनने का तरीका उसके व्यवहार, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और रिश्तों को निभाने की क्षमता के बारे में काफी कुछ बता सकता है।

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सुनने के तरीके पर क्या कहता है मनोविज्ञान (Photo: iStock)

Psychology of Listening: हम अकसर यह सोचते हैं कि हमारी बात करने की शैली हमारी शख्सियत बयां करती है, लेकिन मनोविज्ञान कहता है कि हम कैसे सुनते हैं, यह भी हमारे व्यक्तित्व का एक बड़ा संकेत हो सकता है। बातचीत के दौरान हमारा ध्यान, प्रतिक्रिया देने का तरीका और सामने वाले को महसूस कराया गया सम्मान हमारे स्वभाव की कई परतों को उजागर करता है।

हालांकि किसी व्यक्ति की पर्सनैलिटी को केवल एक आदत से पूरी तरह नहीं समझा जा सकता, लेकिन सुनने का तरीका उसके व्यवहार, भावनात्मक बुद्धिमत्ता और रिश्तों को निभाने की क्षमता के बारे में काफी कुछ बता सकता है।

अगर आप बीच में टोके बिना सुनते हैं

जो लोग बातचीत के दौरान सामने वाले को पूरा बोलने का मौका देते हैं, उन्हें आमतौर पर धैर्यवान और भावनात्मक रूप से परिपक्व माना जाता है। ऐसे लोग दूसरों के विचारों का सम्मान करते हैं और जल्दबाजी में निष्कर्ष निकालने से बचते हैं।

मनोवैज्ञानिक मानते हैं कि अच्छी तरह सुनने वाले लोग आमतौर पर मजबूत रिश्ते बनाने में सफल होते हैं, क्योंकि वे सामने वाले को यह एहसास दिलाते हैं कि उसकी बात महत्वपूर्ण है।

अगर आप बार-बार सलाह देने लगते हैं

कुछ लोग किसी की बात पूरी सुने बिना ही समाधान बताने लगते हैं। यह आदत इस बात का संकेत हो सकती है कि आप समस्याओं को जल्दी हल करना पसंद करते हैं और व्यावहारिक सोच रखते हैं।

हालांकि कई बार सामने वाला सलाह नहीं, बल्कि केवल सुने जाने की उम्मीद करता है। ऐसे में तुरंत सलाह देना बातचीत की गहराई को कम कर सकता है।

सिर हिलाकर प्रतिक्रिया देने वाले लोग

बातचीत के दौरान हल्का सिर हिलाना, आंखों से संपर्क बनाए रखना और छोटी-छोटी प्रतिक्रियाएं देना इस बात का संकेत होता है कि आप बातचीत में पूरी तरह मौजूद हैं।

रिसर्च बताती हैं कि ऐसा व्यवहार सामने वाले के मन में भरोसा पैदा करता है और उसे खुलकर बात करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

अगर आप ज्यादा सुनते और कम बोलते हैं

जो लोग दूसरों को ध्यान से सुनते हैं और सोच-समझकर जवाब देते हैं, उन्हें अकसर समझदार और संतुलित व्यक्तित्व वाला माना जाता है। विशेषज्ञों के अनुसार, गहराई से सुनने वाले लोग बातचीत को बेहतर तरीके से समझते हैं, इसलिए उनकी बातों का असर भी अधिक होता है।

अगर आपका ध्यान जल्दी भटक जाता है

बातचीत के दौरान बार-बार मोबाइल देखना, इधर-उधर नजर घुमाना या सामने वाले की बात से कट जाना यह संकेत दे सकता है कि आपका ध्यान लंबे समय तक एक जगह केंद्रित नहीं रह पाता। ऐसी स्थिति में सामने वाले को यह महसूस हो सकता है कि उसकी बातों को महत्व नहीं दिया जा रहा।

सवाल पूछने वाले लोग कैसे होते हैं?

जो लोग बातचीत के दौरान फॉलो-अप सवाल पूछते हैं, वे अकसर जिज्ञासु और सीखने के इच्छुक होते हैं। ऐसे लोग केवल सुनते नहीं, बल्कि सामने वाले के अनुभवों और भावनाओं को समझने की कोशिश भी करते हैं। मनोवैज्ञानिकों का मानना है कि यह अच्छे श्रोता की एक महत्वपूर्ण पहचान है।

क्या सुनने का तरीका सच में पर्सनैलिटी बताता है?

विशेषज्ञों का कहना है कि किसी व्यक्ति की पर्सनैलिटी कई कारकों से बनती है, इसलिए केवल सुनने की आदत के आधार पर किसी को पूरी तरह परिभाषित नहीं किया जा सकता। फिर भी हमारी सुनने की शैली यह जरूर दिखाती है कि हम दूसरों के प्रति कितने संवेदनशील, धैर्यवान और भावनात्मक रूप से जुड़े हुए हैं।

Suneet Singh
सुनीत सिंह author

सुनीत सिंह टाइम्स नाउ नवभारत डिजिटल में डिप्टी न्यूज एडिटर के रूप में कार्यरत हैं और लाइफस्टाइल सेक्शन में स्पेशल स्टोरीज प्रोजेक्ट का नेतृत्व कर रहे ... और देखें

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