Poem on Friendship in Hindi (दोस्ती पर कविता हिंदी में): दोस्ती पर जितना कहा जाए उतना कम है। यह वह रिश्ता है जो हर पल को खुशहाल और अर्थपूर्ण बनाता है। मित्रता वह रिश्ता है जिसे हम खुद चुनते हैं, जो सुख-दुख में कंधे से कंधा मिलाकर चलते हैं। दोस्ती में न स्वार्थ होता है, न दिखावा; बस सच्चाई और विश्वास का बंधन होता है। इसी दोस्ती पर ना जाने कितना कुछ लिखा गया है। दोस्ती पर एक से एक शेर लिखे गए हैं तो वहीं कई कहानियां गढ़ी गई हैं। दोस्ती पर ढेर सारी हिंदी कविताएं भी लिखी गई हैं। आइए पढ़े मित्रता के भाव को शब्दों से बयां करने वाली चंद शानदार कविताएं:
1. दोस्त: विष्णु खरे
एक नौजवान पुलिस सब-इंस्पैक्टर से दोस्ती करो।
तुम देखोगे कि यह कठिन नहीं है—अपने सिद्धांतों की रक्षा करते हुए भी
यह संभव है। तुम पाओगे कि तुम्हारी ही तरह
वह गेहुँआ और छरहरा है, उसे टोपी लगाना और वर्दी पहनना
पसंद नहीं है
और वह हॉस्टलों, पिकनिकों और बचपन के क़िस्से सुनाता है—
तुम्हें इसका भी पता चलेगा कि उसने सर्किल इंस्पैक्टर से कहकर
अपनी ड्यूटी वहाँ लगा ली है जहाँ लड़कियों के कॉलिज हैं
और हरचंद कोशिश करता है कि बुश्शर्ट पहनकर वहाँ जाए
और रोज़ संयोगवश बीच रास्ते में उसी स्पैशल को रुकवाकर बैठे
जिसमें नौजवान गर्म शरीर सुबह पढ़ने पहुँचते हैं। उससे हाथ मिलाने पर
तुम्हें उसकी क़रीब-क़रीब लड़कीनुमा कोमलता पर आश्चर्य होगा।
ज़िला सरहद पर
तैनात किए जाने से पहले एकाध बियर के बाद
जब वह अपनी किशोर आवाज़ में
दो आरजू में कट गए तो इंतज़ार में नुमा कोई चीज़ पढ़ेगा
तो तुम कहोगे—कुछ भी कहो, तुम इस लाइन में ग़लत फँस गए हो।
लेकिन दो तीन-बरस बाद तुम अचानक पहचानोगे
कि सड़क जहाँ पर रस्से लगाकर बंद कर दी गई है
और लोग साइकिलों पर से उतरकर जल्दी-जल्दी जा रहे हैं
और तमाशबीनों की क़िस्तों को बार-बार तितर-बितर किया जा रहा है
पास एक की दूकान से बैंच उठवा कर वह वर्दी में बैठा हुआ है
टेबिल पर टोपी और पैर रखकर।
तुम कहोगे कि उसकी हैल्थ शानदार हो गई है
जबकि ऊपर उठ आए गलों के ऊपर स्याह हलक़े पड़ गए हैं
और पेट और पुट्ठों के अप्रत्याशित उभारों पर कसी हुई पोशाक में
वह यत्नपूर्वक साँस ले रहा है। उसकी बग़लें
कलफ़ और पसीने से चिपचिपा रही हैं
और माचिस की सींक से दाँत कुरेदते हुए वह
उसे बार-बार नाक की तरफ़ ले जा रहा है। सियासत
और बड़े लोगों की रंगीन रातों की कुछ अत्यंत
गोपनीय बातें बताते हुए वह उस समय एकाएक चुप हो जाता है
जब सड़क के उस ओर दूर पर भीड़नुमा
कुछ नज़र आता है
और मेहनत के साथ वह उठते हुए कहता है
अच्छा, अब तुम बढ़ लो, ये आ रहे हैं।
शाम रात में बदल रही होती है जब तुम मुड़कर देखते हो
कि वह तुम्हें बिल्कुल भूल चुका है
पेट से निकली हुई गैस या दाँत से निकले हुए रेशे की तरह
और कुछ कह रहा है
पिछले हफ़्ते धुली हुई वर्दियों में तैनात एक से चेहरे वाले अपने मातहतों से
जिनके हाथों में बाँस के हथियार कभी-कभी काँपते हैं
उस एरियल की तरह
जो दाईं और कुछ दूर उस पेड़ के नीचे अदृश्य होने की कोशिश करती हुई
नीली मोटर पर हिलता है।
2. सहेलियां: देवयानी भारद्वाज
अब भी एक-दूसरी के जीवन में
बनी हुई है उनकी ज़रूरत
बीते समय के पन्नों को पलटते हुए कभी
झाँक जाता है जब
किशोरपने का वह जाना-पहचाना चेहरा
मुस्कान की एक रेखा
देर तक पसरी रहती है होंठों पर
अनेक बार
मन ही मन
अनेक लंबे पत्र लिखे उन्होंने
इच्छाओं की उड़ानों में
कई बार हो आती हैं एक-दूसरी के घर
खो जाती हैं
एक-दूसरी के काल्पनिक सुखों के संसार में
सचमुच के मिलने से बचती हैं
एक-दूसरी के सुख के भ्रम में रहना
कहीं थोड़ी-सी उम्मीद को बचा लेना भी तो है।
3. महिला मित्र: रेखा चमोली
आपके साथ इनको हमेशा संदेह से देखा जाता है
हमउम्र या छोटी हो तो शंका और भी गहराती है
आपके जीवन में नाटक के उस पात्र जैसा होता है इनका रोल
जिसे ज़रूरत पड़ने पर कोई भी निभा सकता है
ये आम दोस्तों की तरह नहीं जा सकतीं आपके स्कूटर के पीछे बैठकर
इनके साथ किसी सड़क किनारे ढाबे पर
नहीं पी जा सकती एक कप चाय
पारिवारिक समारोहों में इन्हें नहीं मिलता मौक़ा मांगलिक गीत गाने का
जबकि ये यह सब करना चाहती हैं
ये आपकी पीठ पर एक धप्पा मारकर चौंकाना चाहती हैं
देर शाम फ़ोन पर अपनी कविता सुनाना चाहती हैं
किसी बहस में उलझे-उलझे सड़क पर घूमना चाहती हैं
कठिन समय में हाथ पकड़कर साथ होने का भरोसा देना चाहती हैं
पहाड़ की ऊँची चोटी पर चढ़कर ज़ोर से आपका नाम पुकारना चाहती हैं
लाॅन्ग ड्राइव पर आपके साथ किशोर लता के गाने सुनना चाहती हैं
ये आपकी हर बात को धैर्य से सुनती हैं
इनसे बात करके आप थोड़ा और जीना चाहते हैं
दुनिया पर आपका भरोसा थोड़ा और ज़्यादा बढ़ जाता है
ये आपके लिए दरवाज़े के पीछे लगे हैंगर-सी ज़रूरी होती हैं
इनकी भूमिका हमेशा परदे के पीछे की होती है
इनकी फ़ोन कॉल्स और मैसेज़स को आप तुरंत डिलीट कर देते हैं
आपके आस-पास के लोगों को ये क्यारी में उगे अनचाहे पौधे-सी खटकती हैं
इनके आने पर शुरू हुई ख़ुसफुसाहट अर्थभरी मुस्कानों पर रुकती है
आप इनको कभी नहीं देख पाते घर के कपड़ों में
बर्तन साफ़ करते या कपड़े धोते
न ही आपका सामना इनसे कभी सिलेंडर की लाइन में होता है
आप कई बार नहीं जान पाते
पिछले दिनों किस क़दर बुख़ार से तप रही थीं ये
ये भी कहाँ पूछ पाती हैं समय पर आपकी ख़ैर-ख़बर
ये ऐसा कुछ भी नहीं कर पाती हैं
ये आपकी महिला मित्र जो होती हैं।
दोस्ती की इन कविताओं में आपको हूबहू वही भाव मिलेगा जो किसी मित्रता के रिश्ते में होता है। ये कविताएं मित्रता के दूसरे पहलुओं को भी बड़ी खूबसूरती से बयां करती हैं।
