Single Child Parenting: आजकल ज्यादातर कपल्स एक ही बच्चा कर रहे हैं। लोगों को लगता है कि मौजूदा लाइफस्टाइल में शायद एक से ज्यादा बच्चे की जिम्मेदारी उतने बेहतर तरीके से नहीं संभाल पाएंगे। वैसे सिंगल चाइल्ड की परवरिश आसान तो है लेकिन इसके साथ कुछ चुनौतियां भी आती हैं। कई बार पेरेंट्स को चिंता रहती है कि उनका बच्चा अकेलापन महसूस न करे, जरूरत से ज्यादा जिद्दी न बन जाए या इमोशनली कमजोर न पड़ जाए।
एक्सपर्ट्स के सामने बहुत से पेरेंट्स के ऐसे ही सवाल आते हैं। विशेषज्ञ बताते हैं कि कुछ आसान उपाय अपनाकर सिंगल चाइल्ड की पेरेंटिंग को काफी बेहतर बनाया जा सकता है। आइए जानते हैं क्या हैं ये उपाय:
बच्चे को बहुत ज्यादा अटेंशन न दें
सिंगल चाइल्ब को पेरेंट्स का भरपूर प्यार मिलता है। उसकी हर मांग तुरंत पूरी हो जाती है। इससे बच्चे में यह आदत बन सकती है कि हर चीज उसके मुताबिक ही हो। इसलिए जरूरी है कि प्यार के साथ-साथ उसे इंतजार करना भी सिखाएं। उसे बताएं कि हर चीज तुरंत नहीं मिल जाती।
दोस्तों के साथ टाइम स्पेंड करने दें
सिंगल चाइल्ड को घर में साथी नहीं मिल पाता। ऐसे में दोस्तों के साथ समय बिताना उसके सोशल स्किल्स के लिए बहुत जरूरी है। उसे दूसरे बच्चों के साथ मिलने-जुलने का अवसर दें।
हर समय निगरानी न रखें
सिंगल चाइल्ड के लिए पेरेंट्स कई बार हद से ज्यादा केयरिंग बन जाते हैं। वे बच्चे के लिए फैसले खुद लेने लगते हैं। ऐसा ना करें। बच्चे को अपने फैसले लेने दें। उन्हें गिरने दें। गिरकर खुद से उठ खड़े होने का प्रयास करने दें। इससे उसमें आत्मविश्वास बढ़ेंगा।
शेयरिंग सिखाएं
सिंगल चाइल्ड को अपनी चीजें किसी के साथ बांटने की आदत कम हो सकती है। इसलिए बचपन से ही उसे खिलौने, किताबें और समय दूसरों के साथ शेयर करने की ट्रेनिंग दें। यह आदत आगे चलकर उसकी बहुत मदद करेगी।
दोस्त बनें
सिंगल चाइल्ड अपने माता-पिता के साथ सबसे ज्यादा समय बिताता है। इसलिए पेरेंट्स उसके अच्छे दोस्त भी बनें। उसके साथ खेलें, उसकी बातें सुनें और उसकी भावनाओं को समझने की कोशिश करें। इससे बच्चा भावनात्मक रूप से अधिक सुरक्षित महसूस करता है।
याद रखें कि बच्चे की खुशहाल परवरिश इस बात पर निर्भर नहीं करती कि उसके भाई-बहन हैं या नहीं, बल्कि इस पर निर्भर करती है कि उसे कैसा माहौल मिल रहा है। सिंगल चाइल्ड की पेरेंटिंग मुश्किल नहीं है, बस उसमें बैलेंस की जरूरत होती है। थोड़ा प्यार, थोड़ी आजादी और सही मार्गदर्शन बच्चे को आत्मविश्वासी, संवेदनशील और सामाजिक रूप से मजबूत बना सकता है।
