The Odyssey Life Lessons: क्रिस्टोफर नोलन की The Odyssey इस समय बॉक्स ऑफिस पर तूफान मचा रही है। फिल्म ने पहले वीकेंड में दुनियाभर में करीब 264.1 मिलियन डॉलर की कमाई की है। फिल्म के बॉक्स ऑफिस आंकड़े बताते हैं कि फिल्म ने अमेरिका और कनाडा से 124.5 मिलियन डॉलर कमाए, जबकि दूसरे देशों से 139.6 मिलियन डॉलर का कलेक्शन हुआ। यानी फिल्म को लेकर केवल सोशल मीडिया पर शोर नहीं है, दर्शक सचमुच इसे देखने के लिए सिनेमाघरों तक पहुंच रहे हैं।
मैं भी The Odyssey देखने गई थी। फिल्म खत्म हुई, स्क्रीन पर नाम आने लगे और थिएटर की लाइटें जल गईं। लेकिन मेरा मन अब भी उसी समुद्र में कहीं अटका हुआ था।
उफनती लहरें, विशाल जहाज, युद्ध का शोर और हर हाल में घर लौटने की बेचैनी... फिल्म के कई दृश्य ऐसे हैं, जो थिएटर से बाहर निकलने के बाद भी आंखों के सामने चलते रहते हैं। बड़े पर्दे पर यह दुनिया इतनी भव्य दिखाई देती है कि कुछ देर के लिए आप कहानी देख नहीं रहे होते, बल्कि खुद उस यात्रा का हिस्सा बन जाते हैं।
पहले तो लगा कि मैं इसके शानदार Visuals के असर में हूं। लेकिन घर लौटते समय मेरे दिमाग में कुछ और ही चल रहा था। बार-बार ओडीसियस के फैसले याद आ रहे थे। उसका साहस भी और अहंकार भी। पेनेलपी का इंतजार और उसका धैर्य भी। साथ ही यह सवाल भी कि आखिर घर लौटने की एक यात्रा इतनी कठिन क्यों हो गई?
तभी महसूस हुआ कि हजारों साल पुरानी यह कहानी हमसे बहुत दूर नहीं है। हम भी तो अपनी-अपनी यात्रा पर निकले हुए हैं। कोई सफलता के पीछे भाग रहा है। कोई रिश्तों को बचाने में लगा है। कोई अपनी बात सही साबित करना चाहता है और कोई सब कुछ हासिल करने के बाद बस थोड़ा-सा सुकून तलाश रहा है।
फिल्म देखकर मैं केवल उसके शानदार दृश्य साथ लेकर नहीं लौटी। जिंदगी से जुड़ी ये 9 बातें भी मेरे साथ चली आईं। यहां पढ़ें -
द ओडिसी की वो 9 बातें जो जीवन का बड़ा सबक हैं
1. काबिल होना अच्छी बात है, लेकिन उसका अहंकार खतरनाक है
ओडीसियस कोई साधारण योद्धा नहीं है। वह बहादुर है, बुद्धिमान है और मुश्किल से मुश्किल परिस्थिति में भी कोई न कोई रास्ता खोज लेता है। परेशानी उसकी काबिलियत नहीं बल्कि उस काबिलियत पर होने वाला गर्व है। उसे केवल जीतना काफी नहीं लगता। वह चाहता है कि दुनिया यह भी जाने कि जीत किसने हासिल की है। बस यहीं उसकी सबसे बड़ी ताकत धीरे-धीरे कमजोरी बनने लगती है।
यह देखकर मैंने खुद से भी एक सवाल पूछा। क्या हम ऐसा नहीं करते?
कोई काम अच्छा हो जाए तो केवल उसकी खुशी महसूस करने के बजाय तारीफ का इंतजार करने लगते हैं। किसी मुश्किल को पार कर लें तो मन चाहता है कि सबको पता चले कि हमने क्या किया। सफलता मिलने पर खुश होना गलत नहीं है, लेकिन हर बार खुद को साबित करने की बेचैनी कई बार हमें उसी जगह वापस ले आती है, जहां से हम बड़ी मुश्किल से निकले थे।
2. हर जीत का ऐलान करना जरूरी नहीं होता
फिल्म देखते हुए एक बात बार-बार महसूस हुई कि कुछ जीत को चुपचाप अपने साथ लेकर आगे बढ़ जाना चाहिए। हर विरोधी को यह बताना जरूरी नहीं कि हमने उसे हरा दिया है। हर बहस में अंतिम जवाब हमारा ही हो, यह भी जरूरी नहीं। कई बार समस्या खत्म हो चुकी होती है, लेकिन हमारा एक वाक्य या एक प्रतिक्रिया उसे दोबारा जिंदा कर देती है।
ओडीसियस अपनी बुद्धि से मुश्किलों को पार तो कर लेता है, लेकिन जीत के बाद स्वयं को रोक नहीं पाता। यही व्यवहार कई बार नए खतरे को बुला लेता है। असल जिंदगी में भी हम अक्सर सही साबित होने की जिद में अपना सुकून गंवा देते हैं। जबकि कभी-कभी चुपचाप आगे बढ़ जाना ही सबसे बड़ी जीत होती है।
खामोशी सबसे बड़ा हथियार होती है...
3. रास्ते से भटकाने वाली हर चीज डरावनी नहीं होती
ओडीसियस की यात्रा में खतरे हमेशा राक्षस, युद्ध या समुद्री तूफान बनकर नहीं आते। कई बार वे आराम, आकर्षण और सुख का रूप लेकर भी सामने आते हैं। यही बात मुझे सबसे ज्यादा आज की जिंदगी से जुड़ी लगी।
हमें अपने लक्ष्य से हमेशा कोई बड़ी परेशानी नहीं भटकाती। कई बार फोन पर बिताए गए 'बस पांच मिनट' हमें रोक लेते हैं। कई बार थोड़ा-सा आराम धीरे-धीरे आदत बन जाता है। कभी तारीफ, कभी सुविधा और कभी कोई ऐसा आकर्षण, जो उस समय अच्छा लगता है, लेकिन हमें अपनी असली मंजिल से दूर कर देता है।
फिल्म बहुत सहजता से समझाती है कि हर अच्छी दिखाई देने वाली चीज हमारे लिए अच्छी हो, यह जरूरी नहीं। कुछ आकर्षण अवसर नहीं, परीक्षा होते हैं।
4. घर केवल चार दीवारें नहीं, वह जगह है जहां आपको साबित नहीं करना पड़ता
ओडीसियस युद्ध जीत चुका है। उसने ऐसी दुनिया देखी है, जिसके बारे में एक सामान्य इंसान केवल कल्पना कर सकता है। फिर भी उसकी सबसे बड़ी इच्छा किसी नए राज्य पर विजय पाना नहीं है। वह बस अपने घर इथाका लौटना चाहता है।
पूरी फिल्म के दौरान 'घर' का अर्थ धीरे-धीरे बदलता जाता है। घर केवल वह जगह नहीं, जहां हम रहते हैं। घर वह जगह है, जहां हमारी उपलब्धियों से ज्यादा हमारी मौजूदगी मायने रखती है। जहां हमें हर समय यह साबित नहीं करना पड़ता कि हम कितने सफल, मजबूत या काबिल हैं।
हममें से कितने ही लोग अपने परिवार को बेहतर जीवन देने के लिए दिन-रात भाग रहे हैं। लेकिन कई बार इसी भागदौड़ में उन लोगों के लिए समय नहीं बचता, जिनके लिए हम यह सब कर रहे हैं। ओडीसियस की घर वापसी की बेचैनी देखकर लगा कि दुनिया की सबसे बड़ी सफलता भी अधूरी हो सकती है, अगर उसे बांटने के लिए अपने पास न हों।
घर को लेकर The Odyssy एक बड़ी बात बताती है
5. धैर्य कमजोरी नहीं, एक शांत साहस है
फिल्म में ओडीसियस का साहस साफ दिखाई देता है। वह समुद्र से लड़ता है, दुश्मनों का सामना करता है और लगातार आगे बढ़ता है। दूसरी ओर पेनेलपी का साहस बिल्कुल अलग है। वह तलवार नहीं उठाती, लेकिन अपने हिस्से की कठिन लड़ाई लगातार लड़ती रहती है।
उसका इंतजार केवल बैठकर समय गुजरते देखना नहीं है। उसमें उम्मीद है, समझदारी है और अपने घर को बचाए रखने की कोशिश भी। पेनेलपी को देखकर लगा कि जीवन की हर बहादुरी शोर नहीं करती। कुछ लोग बाहर की दुनिया से लड़ते हैं और कुछ चुपचाप घर के भीतर सब कुछ टूटने से बचाते रहते हैं।
कठिन समय में परिवार को संभालना, परिस्थितियां विपरीत होने पर भी उम्मीद न छोड़ना और घबराहट में कोई गलत फैसला न लेना भी साहस है। शायद कई बार यह युद्ध के मैदान में लड़ने से भी ज्यादा कठिन होता है।
6. हमारे फैसलों की कीमत कई बार दूसरे लोग चुकाते हैं
ओडीसियस एक नेता है। इसलिए उसका कोई भी फैसला केवल उसकी जिंदगी को प्रभावित नहीं करता। उसकी समझदारी उसके साथियों को बचा सकती है, लेकिन उसकी एक गलती सबको खतरे में भी डाल सकती है।
यहीं फिल्म नेतृत्व और जिम्मेदारी के बीच का फर्क समझाती है। नेता होने का अर्थ केवल सबसे आगे खड़ा होना या आदेश देना नहीं होता। इसका अर्थ यह समझना भी है कि आपके पीछे चलने वाले लोगों का भरोसा और सुरक्षा आपसे जुड़ी हुई है।
घर में माता-पिता हों, दफ्तर में किसी टीम को संभालने वाला व्यक्ति हो या परिवार का कोई ऐसा सदस्य, जिस पर बड़े फैसलों की जिम्मेदारी है- उसके निर्णय कभी पूरी तरह निजी नहीं रहते।
हमारी जल्दबाजी, हमारा गुस्सा और हमारा अहंकार कई बार उन लोगों को भी प्रभावित करता है, जिन्होंने वह फैसला लिया ही नहीं था।
फैसले बड़े ध्यान से लेने चाहिए
7. हर लड़ाई ताकत के दम पर नहीं जीती जाती
ओडीसियस की सबसे बड़ी ताकत उसकी तलवार नहीं, उसका दिमाग है। वह हर परेशानी का सामना एक ही तरीके से नहीं करता। कहीं लड़ता है, कहीं इंतजार करता है और कहीं ऐसी तरकीब खोजता है, जिसकी सामने वाला कल्पना भी नहीं कर सकता।
इसे देखते हुए लगा कि जिंदगी की समस्याओं के साथ भी हमें यही करना चाहिए। हर बात का जवाब गुस्से से नहीं दिया जा सकता। हर टकराव में सीधे कूदना भी समझदारी नहीं है। कभी शांत रहना पड़ता है। कभी सही समय का इंतजार करना होता है और कभी परिस्थिति को बिल्कुल दूसरे नजरिए से देखने की जरूरत होती है।
ताकत हमें लड़ाई में उतार सकती है, लेकिन बुद्धि ही यह तय करती है कि हम उससे सुरक्षित बाहर निकल पाएंगे या नहीं।
8. लंबी यात्राएं हमें पहले जैसा नहीं रहने देतीं
फिल्म की शुरुआत में दिखाई देने वाला ओडीसियस और तमाम मुश्किलों से गुजरकर घर लौटने वाला ओडीसियस एक जैसा इंसान नहीं है। उस यात्रा ने केवल उसके शरीर को नहीं थकाया, बल्कि उसकी सोच और प्राथमिकताओं को भी बदल दिया है।
हमारे साथ भी यही होता है। किसी लंबे संघर्ष, बीमारी, रिश्ते की परेशानी या मुश्किल दौर से बाहर निकलने के बाद हम पहले जैसे नहीं रह जाते। कुछ अनुभव हमारा भरोसा तोड़ देते हैं। कुछ हमें हमारी कल्पना से ज्यादा मजबूत बना देते हैं और कुछ यह साफ कर देते हैं कि हम असल में जिंदगी से चाहते क्या हैं।
हर यात्रा हमें केवल एक जगह से दूसरी जगह नहीं पहुंचाती। कुछ यात्राएं हमारे भीतर इतनी गहराई से उतर जाती हैं कि उनसे लौटकर हम खुद को भी नए तरीके से देखने लगते हैं।
9. सबसे कठिन युद्ध अपने भीतर के अहंकार से होता है
The Odyssey में विशाल समुद्र है। डरावने राक्षस हैं। युद्ध है और देवताओं का क्रोध भी। फिर भी फिल्म देखते हुए मुझे लगा कि ओडीसियस का सबसे बड़ा दुश्मन बाहर नहीं, उसके अपने भीतर है।
वह दूसरों को मात देना जानता है, लेकिन हर बार खुद को रोकना नहीं जानता। वह मुश्किलों से लड़ सकता है, लेकिन अपने अहंकार को हमेशा नियंत्रित नहीं कर पाता। शायद इसीलिए उसकी घर वापसी की यात्रा इतनी लंबी और कठिन हो जाती है।
हम भी कई बार सामने वाले को हराने, अंतिम जवाब देने या हर हाल में खुद को सही साबित करने में अपनी शांति गंवा देते हैं। उस समय लगता है कि हम जीत गए। बाद में समझ आता है कि उस बहस में सबसे ज्यादा नुकसान हमारे अपने मन का हुआ है।
शायद असली जीत किसी और को हराना नहीं, सही समय पर स्वयं को रोक पाना है।
फिल्म खत्म हुई, लेकिन इसकी यात्रा मन में चलती रही
The Odyssey की भव्यता को बड़े पर्दे पर ही पूरी तरह महसूस किया जा सकता है। समुद्र का विस्तार, लहरों का शोर और युद्ध के दृश्य लंबे समय तक याद रहते हैं। लेकिन फिल्म का असर केवल आंखों तक सीमित नहीं रहता।
थिएटर से बाहर आते समय मुझे लगा कि ओडीसियस की यात्रा कहीं न कहीं हम सभी की यात्रा है। हम सब किसी मंजिल तक पहुंचना चाहते हैं। रास्ते में कभी आकर्षण हमें रोकते हैं, कभी अहंकार भटकाता है, कभी हमारे अपने फैसले पीछे खींचते हैं और कभी अपनों की याद आगे बढ़ने की ताकत देती है।
फिल्म खत्म होने के बाद मेरे मन में एक बात रह गई- जिंदगी में केवल अपनी मंजिल तक पहुंचना ही महत्वपूर्ण नहीं है। यह भी मायने रखता है कि उस लंबी यात्रा से गुजरकर हम किस तरह के इंसान बनकर लौटते हैं।
