गुवाहाटी: असम में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने बाढ़ की स्थिति को बेहद गंभीर बना दिया है। सोमवार को राज्य के कई हिस्सों में जलस्तर बढ़ने के साथ हालात और बिगड़ गए। राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के मुताबिक, 15 जिलों के 3.63 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हैं, जबकि पांच और लोगों की मौत होने से इस साल बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 10 हो गई है। हालात को देखते हुए सेना को भी राहत और बचाव कार्य में लगाया गया है। सेना, एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, फायर एंड इमरजेंसी सर्विस और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से फंसे हुए लोगों को सुरक्षित निकालने और राहत सामग्री पहुंचाने में जुटे हैं।
पांच और मौतों से बढ़ी चिंता
ASDMA के अनुसार, जोरहाट जिले में बाढ़ के पानी में डूबने से दो पुरुषों और दो बच्चियों की मौत हुई है। वहीं कार्बी आंगलोंग जिले में एक व्यक्ति की जान चली गई। इसके अलावा चराइदेव और कार्बी आंगलोंग जिलों से एक-एक व्यक्ति के लापता होने की भी सूचना है। अधिकारियों का कहना है कि लापता लोगों की तलाश लगातार जारी है।
इस साल मानसून के दौरान अब तक बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में कुल 10 लोगों की मौत हो चुकी है, जिससे राज्य सरकार की चिंता और बढ़ गई है।
15 जिले बाढ़ की चपेट में, शिवसागर सबसे ज्यादा प्रभावित
बाढ़ का असर राज्य के बिस्वनाथ, कछार, चराइदेव, चिरांग, धेमाजी, डिब्रूगढ़, गोलाघाट, जोरहाट, कामरूप, कामरूप महानगर, कार्बी आंगलोंग, नगांव, शिवसागर, तिनसुकिया और उदालगुड़ी जिलों में देखा जा रहा है।इसके साथ ही कई गांवों का संपर्क मुख्य सड़कों से कट गया है और हजारों परिवार सुरक्षित स्थानों पर जाने को मजबूर हुए हैं।ये जिले हैं सबसे अधिक प्रभावित
- शिवसागर- करीब 1.58 लाख लोग प्रभावित
- चराइदेव - लगभग 1.05 लाख लोग प्रभावित
- जोरहाट - करीब 51 हजार लोग प्रभावित
सेना, एनडीआरएफ और एसडीआरएफ संभाल रहे मोर्चा
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए ऊपरी असम में सेना की तैनाती की गई है। सेना की टीमें हेलीकॉप्टर, नावों और अन्य संसाधनों के साथ राहत अभियान चला रही हैं। सेना के अलावा राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF), राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF), फायर एंड इमरजेंसी सर्विस और जिला प्रशासन भी राहत और बचाव कार्य में लगे हुए हैं। ASDMA के अनुसार, चराइदेव, गोलाघाट, जोरहाट, कार्बी आंगलोंग और नगांव जिलों से अब तक करीब 7,000 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद कर रहे निगरानी
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा खुद इन हालातों पर राहत कार्यों की निगरानी कर रहे हैं। बाढ़ की स्थिति की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार लोगों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने बताया कि चार कैबिनेट मंत्रियों को प्रभावित जिलों में तैनात किया गया है, ताकि राहत कार्यों की लगातार निगरानी हो सके। इसके अलावा सभी सांसदों और विधायकों को भी अपने-अपने क्षेत्रों में रहकर राहत कार्यों में सहयोग करने के निर्देश दिए गए हैं।
मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, शिवसागर जिले में अब तक 510 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। कई ऐसे इलाके हैं जहां सड़क मार्ग पूरी तरह बंद हो गया है, इसलिए सेना के हेलीकॉप्टर और अतिरिक्त नावों की मदद से लोगों तक राहत सामग्री पहुंचाई जा रही है।
स्वास्थ्य विभाग भी अलर्ट पर
राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में मेडिकल टीमों की तैनाती कर दी है। इन टीमों को स्वास्थ्य जांच, आवश्यक दवाओं की आपूर्ति और बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम की जिम्मेदारी सौंपी गई है। सरकार ने सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रहने, कमजोर तटबंधों को मजबूत करने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने के निर्देश दिए हैं।
रेल सेवाओं पर पड़ा बाढ़ का असर
लगातार बारिश और डिकहौ नदी के उफान के कारण रेलवे ट्रैक और स्टेशन परिसर जलमग्न हो गए हैं। सिमालुगुड़ी-नामतियाली और सिमालुगुड़ी-सेलेंघाट रेलखंड पर ट्रेनों का परिचालन फिलहाल रोक दिया गया है। पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे (NFR) के अनुसार, डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया से चलने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों का मार्ग बदलकर रंगिया-रंगापाड़ा रूट से किया गया है। कई लोकल ट्रेनें रद्द कर दी गई हैं या बीच रास्ते तक ही चलाई जा रही हैं।
चाय बागानों में हजारों मजदूर फंसे
बाढ़ का असर राज्य के प्रमुख चाय उत्पादक क्षेत्रों पर भी पड़ा है। टी एसोसिएशन ऑफ इंडिया (TAI) के अनुसार, शिवसागर जिले के नाजिरा क्षेत्र के लगभग सभी चाय बागान पानी में डूब गए हैं। मजदूरों के आवास, अस्पताल, स्कूल और आंतरिक सड़कें जलमग्न हो गई हैं। हजारों श्रमिक और उनके परिवार फिलहाल फैक्ट्री भवनों, मैनेजर बंगलों और अन्य ऊंचे स्थानों पर शरण लिए हुए हैं।
गुवाहाटी में भूस्खलन की घटनाएं
राजधानी गुवाहाटी में लगातार हो रही बारिश के कारण कम से कम पांच स्थानों पर भूस्खलन हुआ है। हालांकि प्रशासन ने राहत की बात यह बताई है कि इन घटनाओं में अभी तक किसी के हताहत होने की सूचना नहीं मिली है।
राहत शिविरों में हजारों लोग
ASDMA के अनुसार, राज्य के 11 जिलों में 101 राहत शिविर और राहत वितरण केंद्र संचालित किए जा रहे हैं। इन शिविरों में 9,606 विस्थापित लोग रह रहे हैं। 794 गांव अब भी जलमग्न हैं। 19,099.59 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ से प्रभावित हुई है। कई सड़कें, पुल, तटबंध और सार्वजनिक ढांचे क्षतिग्रस्त हुए हैं। 5.97 लाख से अधिक पालतू पशु और पोल्ट्री भी बाढ़ से प्रभावित हुए हैं।
कई नदियां खतरे के निशान से ऊपर
ASDMA के दैनिक बुलेटिन के मुताबिक, ब्रह्मपुत्र नदी नीमतिघाट में खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। इसके अलावा बुरिडीहिंग (खोवांग), डिकहौ (शिवसागर), दिसांग (नंगलामुराघाट) और धनसिरी (नुमालीगढ़) नदियां भी खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं, जिससे अगले कुछ दिनों तक स्थिति और गंभीर बने रहने की आशंका है।
लोगों से सतर्क रहने की अपील
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने असम के कई हिस्सों में भारी बारिश, गरज-चमक और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। इसे देखते हुए ASDMA ने लोगों से अनावश्यक यात्रा से बचने, प्रशासन के निर्देशों का पालन करने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की अपील की है।
