Moon Shayari, Chand Pe Shayari: चांद आसमान की सबसे सुंदर चीज है। उसकी ठंडी रोशनी में न कोई शोर है, न जल्दबाज़ी। कुछ है तो बस एक सुकून जो दिल तक उतर जाता है। चांद न जाने कितनी कविताओं, कितने खयालों और कितने अधूरे सपनों का साक्षी रहा है। कभी चाद आशिकों का हमराज बनता है, तो कभी बच्चों की कहानी का हीरो। किसी के लिए वह जुदाई की याद है, तो किसी के लिए मिलने की उम्मीद। इसी चांद पर बहुत से शायरों ने एक से बढ़कर एक शेर लिखे हैं। आइए पढ़ते हैं हैं चांद पर शायरी:
1. सुना है रात उसे चांद तकता रहता है
सितारे बाम-ए-फ़लक से उतर के देखते हैं
- अहमद फ़राज़
2. बात वो आधी रात की रात वो पूरे चांद की
चांद भी 'ऐन चैत का उस पे तिरा जमाल भी
- परवीन शाकिर
3. नहीं बे-हिजाब वो चांद सा कि नज़र का कोई असर न हो
उसे इतनी गर्मी-ए-शौक़ से बड़ी देर तक न तका करो
- बशीर बद्र
4. कल चौदहवीं की रात थी शब भर रहा चर्चा तिरा
कुछ ने कहा ये चाँद है कुछ ने कहा चेहरा तिरा
- इब्न-ए-इंशा
5. चांद कहता था नहीं अहल-ए-ज़मीं है कोई
कहकशां कहती थी पोशीदा यहीं है कोई
- अल्लामा इक़बाल
6. रोज़ तारों को नुमाइश में ख़लल पड़ता है
चांद पागल है अँधेरे में निकल पड़ता है
- राहत इंदौरी
7. इतने घने बादल के पीछे
कितना तन्हा होगा चाँद
- परवीन शाकिर
8. ईद का चांद तुम ने देख लिया
चांद की ईद हो गई होगी
- इदरीस आज़ाद
9. बच्चों के छोटे हाथों को चांद सितारे छूने दो
चार किताबें पढ़ कर ये भी हम जैसे हो जाएंगे
- निदा फ़ाज़ली
10. याद के चांद दिल में उतरते रहे
चांदनी जगमगाती रही रात भर
- मख़दूम मुहिउद्दीन
11. जी में आता है ये मुर्दा चांद तारे नोच लूं
इस किनारे नोच लूं और उस किनारे नोच लूं
असरार-उल-हक़ मजाज़
12. खेलने के लिए बच्चे निकल आए होंगे
चांद अब उस की गली में उतर आया होगा
कैफ़ भोपाली
उम्मीद करते हैं कि चांद की ही तरह खूबसूरत ये शेर आपको जरूर पसंद आए होंगे। आप चाहें तो अपने इश्क के चांद, अपने महबूब को ये शायरियां गिफ्ट कर सकते हैं।
