आपने ये तो नोटिस किया ही होगा कि हर जींस की पिछली जेब के ठीक ऊपर एक लेदर पैच लगा होता है। इस पैच पर ब्रांड का नाम लिखा होता है। लेकिन क्या आप जानते हैं कि इस छोटे से पैच का असल काम क्या था? इस छोटे से टुकड़े के पीछे 19वीं सदी का एक बेहद दिलचस्प और अनूठा इतिहास छुपा हुआ है।
कामगारों के कपड़ों से हुई थी शुरुआत
जींस के इतिहास को खंगालें तो पता चलता है कि इसकी शुरुआत मजदूरों और खान में काम करने वाले कामगारों के लिए एक बेहद मजबूत और टिकाऊ वर्किंगवियर के रूप में हुई थी। साल 1873 में टेलर जैकब डेविस और मशहूर ब्रांड लेवी स्ट्रॉस एंड कंपनी ने मिलकर कपड़ों को मजबूत बनाने वाले मेटल रिवेट्स का पेटेंट कराया था। यहीं से मजबूत डेनिम पैंट्स यानी आज की जींस का चलन दुनिया भर में शुरू हुआ।
जैसे-जैसे बाजार में डेनिम का कॉम्पिटिशन बढ़ने लगा, हर ब्रांड अपने प्रोडक्ट्स को अलग पहचान देना चाहता था। इसी जरूरत को पूरा करने के लिए साल 1886 में लेवी स्ट्रॉस ने अपने कपड़ों पर प्रसिद्ध 'टू हॉर्स' ट्रेडमार्क की शुरुआत की।
दो घोड़ों की कहानी जो देती है ताकत की गवाही
इस चमड़े के पैच पर छपी तस्वीर में दो घोड़ों को एक जींस को विपरीत दिशा में खींचते हुए दिखाया जाता था। यह तस्वीर इस बात का प्रतीक थी कि यह जींस इतनी मजबूत और टिकाऊ है कि दो घोड़े भी मिलकर इसे फाड़ नहीं सकते। उस दौर में जब ज्यादातर लोग पढ़े-लिखे नहीं थे, तब इस तरह के विजुअल सिंबल ग्राहकों को उत्पाद की मजबूती और उच्च गुणवत्ता का भरोसा दिलाते थे। यह पैच धीरे-धीरे ब्रांड की पहचान और उसकी विरासत का सबसे बड़ा प्रतीक बन गया।
चमड़े का ही इस्तेमाल क्यों किया गया?
चमड़ा अपनी बेजोड़ मजबूती और रफ-टफ यूज के लिए जाना जाता है। शुरुआती दौर में जब जींस का इस्तेमाल मुख्य रूप से खदानों और खेतों में काम करने वाले मजदूर करते थे, तो उनके कपड़े धूल, मिट्टी और भारी घर्षण के संपर्क में आते थे। ऐसे में चमड़े का पैच लंबे समय तक टिकता था और उस पर छपा ब्रांड का नाम या लोगो आसानी से मिटता नहीं था। हालांकि, समय के साथ जैसे-जैसे विकल्प बदले, कंपनियों ने असली चमड़े की जगह भारी-भरकम कार्डस्टॉक, सिंथेटिक मटीरियल और रीसाइकिल किए हुए फैब्रिक का इस्तेमाल करना भी शुरू कर दिया।
क्या यह जींस को मजबूत बनाने के लिए होता है?
आमतौर पर यह माना जाता है कि यह पैच जींस को फटने से बचाता है, लेकिन तकनीकी रूप से इसका मुख्य काम अब कपड़ों को मजबूती देना नहीं रह गया है। जींस की असल मजबूती उसकी डेनिम बुनाई, मजबूत सिलाई और स्ट्रेस पॉइंट्स पर लगे मेटल रिवेट्स से आती है। आज के समय में इस पैच की मुख्य भूमिका ब्रांडिंग और पहचान की है।
