8th Pay Commission DA Merger : दिवाली से ठीक पहले केंद्र सरकार ने देश के लाखों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को बड़ी सौगात दी है। सरकार ने महंगाई भत्ते (DA) और महंगाई राहत (DR) में 3 प्रतिशत की बढ़ोतरी का ऐलान कर दिया है। इस फैसले के बाद 7वें वेतन आयोग के तहत मिलने वाला महंगाई भत्ता 60 प्रतिशत से बढ़कर अब 63 प्रतिशत हो गया है। बढ़ी हुई दरें 1 जुलाई 2026 से लागू मानी जाएंगी। सरकार के इस कदम से देश के करीब 49 लाख केंद्रीय कर्मचारियों और करीब 69 लाख पेंशनर्स को सीधा और बड़ा वित्तीय लाभ मिलेगा।
6ठे और 5वें वेतन आयोग के दायरे वाले कर्मचारियों को भी मिला फायदा
सिर्फ 7वें वेतन आयोग ही नहीं, बल्कि पुराने वेतन आयोगों के दायरे में आने वाले कर्मचारियों के भत्तों में भी संशोधन किया गया है। 6ठे वेतन आयोग के तहत आने वाले कर्मचारियों और पेंशनभोगियों का DA या DR मूल वेतन के 262% से बढ़कर 269% (7% की वृद्धि) हो गया है। वहीं, 5वें वेतन आयोग के तहत काम कर रहे कर्मचारियों के लिए यह दर 483% से बढ़ाकर 497% (14% की वृद्धि) कर दी गई है। सरकार के इस पूरे डीए और डीआर इजाफे से राजकोष पर कुल 10,016 करोड़ रुपये का अतिरिक्त सालाना बोझ आएगा।
क्या अब बेसिक सैलरी में मर्ज होगा महंगाई भत्ता?
महंगाई भत्ता बढ़ने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या बढ़ा हुआ डीए बेसिक सैलरी में मर्ज किया जाएगा? इसे लेकर नेशनल फेडरेशन ऑफ इंडियन रेलवेमेन (NFIR) के कार्यकारी अध्यक्ष बीसी शर्मा ने स्पष्ट किया है कि जब डीए 50 प्रतिशत तक पहुंच जाता है, तो उसे मूल वेतन (बेसिक पे) में मिला देने का प्रावधान रहा है। ऐसा होने पर हाउस रेंट अलाउंस (HRA) जैसे कई अन्य भत्ते भी स्वतः 25 प्रतिशत तक बढ़ जाते हैं। जानकारों का मानना है कि 8वें वेतन आयोग के गठन और उसकी सिफारिशों के लागू होने पर सरकार इसे नए सिरे से व्यवस्थित करेगी।
जानिए क्या है डीए मर्जर और इसका गणितीय फॉर्मूला
बेसिक सैलरी में महंगाई भत्ते को मिलाने या मर्ज करने का गणितीय पैमाना बहुत ही सरल और स्पष्ट होता है। इसे इस फॉर्मूले से समझा जा सकता है। नया बेसिक वेतन = मौजूदा बेसिक वेतन + (मौजूदा बेसिक वेतन × DA प्रतिशत)। उदाहरण के लिए, अगर किसी कर्मचारी का मूल वेतन 40,000 रुपये है और उस पर डीए 50 प्रतिशत है, तो डीए की रकम 20,000 रुपये बनेगी। मर्जर के बाद नया बेसिक वेतन 40,000 रुपये और 20,000 रुपये जुड़कर कुल 60,000 रुपये हो जाएगा। इसके बाद से भविष्य का डीए इसी नई मूल राशि पर तय होगा।
सातवें वेतन आयोग के मौजूदा नियम और डीए मर्जर की मांग
सातवें वेतन आयोग के मौजूदा नियमों के तहत डीए के स्वतः (ऑटोमैटिक) मर्जर का नियम समाप्त कर दिया गया है। 5वें वेतन आयोग में डीए 50 प्रतिशत होने पर उसे 'डियरनेस पे' के रूप में बेसिक में जोड़ दिया जाता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होता। हालांकि, डीए 50 प्रतिशत पार होने पर एचआरए और ग्रेच्युटी की सीमाएं अपने आप बढ़ जाती हैं। अब जब आठवें वेतन आयोग की सुगबुगाहट तेज हो चुकी है, तो ऑल इंडिया एनपीएस एंप्लॉइज फेडरेशन के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. मंजीत सिंह पटेल समेत तमाम कर्मचारी संगठनों ने पुरजोर मांग उठाई है कि आगामी आयोग में बेहतरीन फिटमेंट फैक्टर दिया जाए और डीए को मूल वेतन में पूरी तरह मर्ज किया जाए, ताकि कर्मचारियों को भविष्य में इसका अधिकतम लाभ मिल सके।
